E20 पेट्रोल की गुणवत्ता पर SIAM का अलर्ट, वाहनों में बढ़ रही समस्याएं, सरकार ने दिए जांच के निर्देश
punjabkesari.in Tuesday, Aug 04, 2026 - 02:29 PM (IST)
नई दिल्ली: देश में E20 पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) ने सरकार के सामने गंभीर चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि E20 ईंधन में क्लोराइड और नमी (Moisture) की बढ़ती मात्रा के कारण वाहनों के महत्वपूर्ण पुर्जे तेजी से खराब हो रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को पेट्रोल पंपों पर ईंधन की गुणवत्ता की सख्त निगरानी के निर्देश दिए हैं।
SIAM के अनुसार, ऑटोमोबाइल कंपनियों ने हाल के समय में फ्यूल इंजेक्टर, फ्यूल पंप, EGR वाल्व, एग्जॉस्ट सिस्टम और अन्य ईंधन से जुड़े पार्ट्स बदलने के मामलों में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की है। SIAM का कहना है कि जांच में इन खराबियों की मुख्य वजह ईंधन में क्लोराइड के कारण होने वाला जंग (Corrosion) और पुर्जों का घिसाव सामने आया है।
ईंधन में तय सीमा से कई गुना अधिक मिला क्लोराइड
SIAM के मुताबिक, वाहनों के फ्यूल टैंक से लिए गए नमूनों में क्लोराइड की मात्रा 500 mg/kg तक और पेट्रोल पंपों से लिए गए नमूनों में 350 mg/kg तक पाई गई। संगठन का कहना है कि देशभर में E20 पेट्रोल लागू होने के बाद से क्लोराइड से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ी हैं।
SIAM FLAGS SERIOUS E20 FUEL QUALITY ISSUES TO GOVERNMENT
— RedboxGlobal India (@REDBOXINDIA) August 4, 2026
Key concerns raised by SIAM:
Chloride contamination reportedly reached 500 mg/kg, raising corrosion and component wear risks.
Moisture levels exceeded 10,000 mg/kg, far above the 3,000 mg/kg specification, increasing the…
SIAM ने यह भी बताया कि कई ईंधन नमूनों में नमी (Moisture) का स्तर 10,000 mg/kg से अधिक पाया गया, जबकि निर्धारित सीमा 3,000 mg/kg है। अधिक नमी के कारण एथेनॉल और पानी अलग-अलग परतों (Phase Separation) में बंट सकते हैं, जिससे वाहन में ईंधन भरवाने के तुरंत बाद भी इंजन बंद होने जैसी समस्या आ सकती है।
सरकार से क्या मांग की गई?
SIAM ने सरकार से मांग की है कि E20 और E85 ईंधन के लिए क्लोराइड की अधिकतम सीमा 1 mg/kg से कम अनिवार्य की जाए। ब्लेंडिंग में इस्तेमाल होने वाले निर्जल (Anhydrous) एथेनॉल में क्लोराइड की सीमा 3 mg/kg से कम तय की जाए। डीजल ईंधन में भी क्लोराइड की सीमा को अनिवार्य बनाया जाए।
सरकार ने शुरू की कार्रवाई
मामले को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार ने ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और ऑटोमोबाइल कंपनियों के साथ कई दौर की बैठकें की हैं। इसके बाद OMCs को देशभर के पेट्रोल पंपों पर ईंधन की गुणवत्ता की निगरानी और जांच तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।
