Rupee fall: रुपए में 14 साल की सबसे बड़ी गिरावट, 2011-12 के बाद सबसे खराब प्रदर्शन, जानें कारण
punjabkesari.in Tuesday, Mar 31, 2026 - 10:57 AM (IST)
बिजनेस डेस्कः वित्त वर्ष 2025-26 में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब 9.88% कमजोर हुआ है, जो पिछले 14 साल में सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है। इससे पहले वित्त वर्ष 2011-12 में रुपए में 12.4% की गिरावट दर्ज की गई थी, जब चालू खाते का घाटा (CAD) भी काफी बढ़ गया था।
किन कारणों से टूटा रुपया?
इस साल रुपए पर कई मोर्चों से दबाव बना। विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, वैश्विक स्तर पर डॉलर की मजबूती और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता ने मिलकर स्थिति को और बिगाड़ा। इसके अलावा घरेलू स्तर पर नकदी की कमी और संरचनात्मक कमजोरियों ने भी रुपए को कमजोर किया।
एशियाई करेंसी भी दबाव में
सिर्फ रुपया ही नहीं, बल्कि अन्य एशियाई मुद्राएं भी डॉलर के सामने कमजोर पड़ी हैं। जापानी येन में करीब 6% की गिरावट आई, जबकि फिलीपींस की मुद्रा पीसो 5.74% और दक्षिण कोरियाई वॉन 2.88% कमजोर हुआ।
2011-12 से अलग हैं हालात
विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा गिरावट के कारण पहले से अलग हैं। इस बार बाहरी झटकों, पूंजी के बाहर जाने और ढांचागत चुनौतियों का एक साथ असर देखने को मिला है। Shinhan Bank के ट्रेजरी प्रमुख सुनल सोधानी के मुताबिक, इन फैक्टर्स ने रुपए पर दबाव को और बढ़ाया है।
95 के पार गया रुपया, फिर संभला
हफ्ते की शुरुआत में रुपया डॉलर के मुकाबले 95 के स्तर को भी पार कर गया था, हालांकि अंत में यह 15 पैसे की मजबूती के साथ 94.70 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। दिनभर के कारोबार में रुपये में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया, जहां यह 93.62 पर खुला और 93.57 तक मजबूत भी हुआ।
जियोपॉलिटिकल तनाव ने बढ़ाई चिंता
अमेरिका द्वारा लगाए गए शुल्क और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने डॉलर की मांग बढ़ा दी, जिससे रुपये पर दबाव और तेज हो गया। तेल की कीमतों में उछाल ने भी स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना दिया, जिससे बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।
