Digital Fraud के शिकार ग्राहकों को राहत, मिलेगा 25,000 रुपए तक मुआवजा, RBI लाया नया नियम
punjabkesari.in Thursday, Jun 25, 2026 - 01:15 PM (IST)
बिजनेस डेस्कः UPI, मोबाइल बैंकिंग और इंटरनेट बैंकिंग का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। इसके जरिए हर दिन करोड़ों ट्रांजेक्शन हो रहे हैं। इसके साथ ऑनलाइन ठगी और साइबर फ्रॉड के मामलों में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ग्राहकों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए नए मुआवजा नियमों की घोषणा की है।
1 जनवरी 2027 से लागू होंगे नए नियम
RBI के नए नियमों का उद्देश्य डिजिटल फ्रॉड के पीड़ित ग्राहकों को जल्द राहत देना और बैंकों की जवाबदेही बढ़ाना है। नियम इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग ट्रांजेक्शनों से जुड़े धोखाधड़ी के मामलों पर लागू होंगे। यह व्यवस्था 1 जनवरी 2027 से लागू होगी।
50,000 रुपए तक के नुकसान पर मिलेगी राहत
नए नियमों के तहत यदि किसी ग्राहक को डिजिटल फ्रॉड के कारण 50,000 रुपए तक का नुकसान होता है और वह तय समय सीमा के भीतर शिकायत दर्ज कराता है, तो उसे नुकसान की 85% राशि या अधिकतम 25,000 रुपए तक का मुआवजा दिया जाएगा। हालांकि, यह सुविधा ग्राहक को जीवन में केवल एक बार मिलेगी।
इसके लिए जरूरी होगा कि ग्राहक घटना के पांच दिनों के अंदर ही राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल, हेल्पलाइन 1930 और अपने बैंक को इसकी जानकारी दे। समय पर शिकायत दर्ज होने पर मुआवजे का प्रोसेस शुरू हो जाएगा। RBI का मानना है कि इससे लोग फ्रॉड की जानकारी छिपाने के बजाय तुरंत रिपोर्ट करने के लिए प्रोत्साहित होंगे।
बैंक और RBI मिलकर उठाएंगे जिम्मेदारी
नए नियमों के तहत मुआवजे का पूरा भार केवल बैंक पर नहीं होगा। कुछ मामलों में RBI भी मुआवजा राशि का बड़ा हिस्सा खुद उठाएंगे। RBI ने लीमिट पार यानी क्रॉस-बॉर्डर डिजिटल फ्रॉड के मामलों के लिए भी अलग व्यवस्था बनाई है। ऐसे मामलों में ग्राहक का बैंक और लाभार्थी बैंक भी मुआवजे की जिम्मेदारी शेयर करेंगे। इससे वित्तीय संस्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने का दबाव बढ़ेगा और धोखाधड़ी रोकने के लिए बेहतर तकनीकी स्ट्रैटजी अपनाए जा सकेंगे।
फॉरेक्स रिस्क मैनेजमेंट के नियम भी अपडेट
डिजिटल फ्रॉड से जुड़े बदलावों के साथ RBI ने बैंकों के विदेशी मुद्रा जोखिम (फॉरेक्स रिस्क) के आकलन और प्रबंधन से संबंधित नियमों में भी संशोधन किया है। नए दिशा-निर्देशों का उद्देश्य बैंकों को विदेशी मुद्रा जोखिम का बेहतर मूल्यांकन करने और पर्याप्त पूंजी बनाए रखने के लिए तैयार करना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ये बदलाव भारतीय बैंकिंग प्रणाली को वैश्विक मानकों के और करीब लाने में मदद करेंगे। साथ ही डिजिटल भुगतान व्यवस्था में ग्राहकों का भरोसा बढ़ेगा और बैंकिंग सिस्टम में पारदर्शिता तथा जवाबदेही को मजबूती मिलेगी।
