सोने-चांदी के आयात का तरीका बदला, 1 अक्टूबर से लागू होगा RBI का नया आदेश
punjabkesari.in Saturday, Jan 17, 2026 - 03:00 PM (IST)
बिजनेस डेस्कः देश में सोना-चांदी के कारोबार से जुड़े लोगों के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने सख्त कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने बुलियन यानी सोना और चांदी के आयात पर एडवांस रेमिटेंस (पहले भुगतान) की सुविधा पर रोक लगा दी है। इस फैसले से बुलियन इंपोर्टर्स और कारोबारियों में हलचल मच गई है।
RBI का यह कदम मनी लॉन्ड्रिंग और विदेशी भुगतान के दुरुपयोग को रोकने की दिशा में अहम माना जा रहा है। भारत में कच्चा तेल और सोना मूल्य के लिहाज से सबसे बड़े आयातित उत्पादों में शामिल हैं। कई मामलों में यह सामने आया है कि आयात के नाम पर विदेश भेजी गई राशि के बदले सामान देश में नहीं पहुंचता, जिससे फंड्स के गलत इस्तेमाल की आशंका बढ़ जाती है।
नुवामा के फॉरेक्स और कमोडिटी हेड साजल गुप्ता के मुताबिक, “जब एडवांस पेमेंट के बावजूद सोना या अन्य धातु नहीं आती, तो बाहर गया पैसा संदिग्ध गतिविधियों से जुड़ सकता है। RBI इसी रास्ते को बंद करना चाहता है।”
नए फॉरेक्स नियम लागू
RBI ने नए फॉरेक्स मैनेजमेंट नियम जारी करते हुए कहा है कि इनका मकसद प्रक्रियाओं को सरल बनाना और एकरूपता लाना है। हालांकि, बुलियन आयात पर एडवांस पेमेंट रोकने के पीछे की वजहें स्पष्ट रूप से नहीं बताई गई हैं।
इसके साथ ही RBI ने इंपोर्ट-एक्सपोर्ट में थर्ड पार्टी पेमेंट और रिसीट की अनुमति दी है। अब एक ही विदेशी खरीदार या सप्लायर, या उनकी ग्रुप कंपनियों के बीच देनदारियों का समायोजन बैंकों की अलग मंजूरी के बिना किया जा सकेगा।
एडवांस राशि लौटाना अनिवार्य
केंद्रीय बैंक ने साफ किया है कि यदि तय या बढ़ाई गई अवधि में आयात नहीं होता है, तो इंपोर्टर को भेजी गई एडवांस राशि भारत वापस लानी होगी। ऐसा न करने पर भविष्य में एडवांस रेमिटेंस के लिए सख्त शर्तें लागू की जा सकती हैं, जैसे इंटरनेशनल बैंक गारंटी या भारतीय बैंक की काउंटर गारंटी।
अन्य आयात पर भी सख्ती
सोना-चांदी को छोड़कर अन्य वस्तुओं के आयात में अब बैंकों को एडवांस पेमेंट की सीमा तय करने का अधिकार दिया गया है। तय सीमा से अधिक भुगतान पर स्टैंडबाय लेटर ऑफ क्रेडिट या बैंक गारंटी अनिवार्य हो सकती है। नियमों के पालन की जिम्मेदारी बैंकों की होगी।
1 अक्टूबर से लागू होंगे नियम
RBI के नए फॉरेक्स नियम 1 अक्टूबर से प्रभावी होंगे। केंद्रीय बैंक का कहना है कि ये बदलाव छोटे इंपोर्टर्स और एक्सपोर्टर्स के लिए ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देंगे, हालांकि बुलियन कारोबार पर इसका सीधा असर देखने को मिलेगा।
