वित्त वर्ष 2025-26 में 2.22 लाख से अधिक कर अपीलों का निपटानः CBDT प्रमुख
punjabkesari.in Friday, Apr 10, 2026 - 05:22 PM (IST)
नई दिल्लीः आयकर विभाग ने करदाताओं के साथ विवाद कम करने के प्रयासों के तहत वित्त वर्ष 2025-26 में 2.22 लाख से अधिक अपीलों का निपटारा किया, जो एक वित्त वर्ष पहले की तुलना में करीब 29 प्रतिशत अधिक है। आधिकारिक आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है। अधिकारियों ने पीटीआई-भाषा से कहा कि केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के चेयरमैन रवि अग्रवाल ने आयकर अधिकारियों को लिखे पत्र में कहा है कि वित्त वर्ष 2026-27 में विभाग की कार्रवाई डेटा आधारित, संतुलित और एक 'निष्पक्ष एवं कुशल' कर प्रणाली के लक्ष्य के अनुरूप होनी चाहिए।
अग्रवाल ने कहा कि आयकर विभाग जोखिम पहचान और प्रवर्तन कार्रवाई के लिए डेटा एनालिटिक्स और सूचना-आधारित तरीकों के उपयोग में मजबूती लेकर आया है। इसके तहत गलत कटौती दावों और कुछ इकाइयों द्वारा कारोबार की आय छिपाने जैसे मामलों की पहचान के लिए 'प्रवृत्ति-आधारित' जांच भी की गई। सीबीडीटी के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में कुल 2,22,540 अपीलों का निपटारा किया गया, जबकि 2024-25 में यह संख्या 1,72,361 थी। इस तरह अपीलों के निपटान में 29.11 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
वर्ष की शुरुआत में लंबित 1,51,239 पुराने मामलों में से 50,654 का विशेष अभियान के तहत निपटारा किया गया, जिससे लंबित मामलों में 33.49 प्रतिशत की कमी आई। इस अवधि में 72,933 शिकायतों का निपटारा किया गया, जिनका औसत समाधान समय 47 दिन रहा। साथ ही 1,32,125 संशोधन आवेदनों का निपटारा किया गया और अपील के फैसलों को लागू करने के लिए 5,68,621 आदेश जारी किए गए। इन उपायों के चलते 2025-26 में कुल 10.26 लाख से अधिक मामलों का निपटारा हुआ, जिससे बकाया मांग में 12.33 लाख करोड़ रुपए की कमी आई।
अधिकारियों के मुताबिक, सीबीडीटी प्रमुख ने पत्र में कहा है कि पिछले वित्त वर्ष में लगभग 1.56 लाख ट्रस्टों को पंजीकरण या पुनः पंजीकरण दिया गया और इनमें से कई को डिजिटल रिकॉर्ड प्रणाली में शामिल किया गया। इसके अलावा, 219 अग्रिम मूल्य निर्धारण समझौते (एपीए) किए गए, जो पिछले वर्ष के 174 समझौतों की तुलना में 25.86 प्रतिशत अधिक हैं। अग्रवाल ने कहा कि वर्ष 2026 आयकर विभाग के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि आयकर अधिनियम 2025 और आयकर नियम 2026 लागू किए जा चुके हैं, जो अनुपालन को आसान बनाने के साथ डेटा-आधारित और गैर-हस्तक्षेपकारी कर प्रशासन को मजबूत करेंगे।
