नई इस्पात नीति से चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा: उद्योग हितधारक

punjabkesari.in Saturday, Oct 17, 2026 - 06:14 PM (IST)

नई दिल्लीः प्रस्तावित राष्ट्रीय इस्पात नीति से चक्रीय अर्थव्यवस्था और देश में मूल्यवर्धित इस्पात उत्पादन को प्रोत्साहन मिलेगा। इस्पात उद्योग से जुड़े हितधारकों ने यह बात कही है। उन्होंने कहा कि इस नीति में भारतीय इस्पात उद्योग द्वारा कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने पर भी जोर दिया गया है। आरएचआई मैग्नेसिटा इंडिया के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) पंकज मल्हन ने कहा कि मसौदा नीति में पुरानी रिफ्रैक्टरी सामग्री को दोबारा काम में लाने और कच्चे माल के तौर पर मैग्नेसाइट की आसान उपलब्धता सुनिश्चित करने को प्राथमिकता दी गई है। यह कदम मजबूत और प्रतिस्पर्धी इस्पात उद्योग परिवेश विकसित करने के समग्र दृष्टिकोण को दर्शाता है। 

बीएमडब्ल्यू इंडस्ट्रीज के प्रबंध निदेशक हर्ष बंसल ने कहा कि नीति में इस्पात उद्योग के सभी पहलुओं को ध्यान में रखा गया है। उन्होंने कहा कि इसमें मूल्यवर्धित और इस्पात परत वाले उत्पादन पर जोर देने के साथ द्वितीयक इस्पात उत्पादकों को प्रोत्साहित करने पर भी ध्यान दिया गया है। डेलॉयट इंडिया के भागीदार राजीव मैत्रा ने कहा कि नीति में चार चरणों के माध्यम से वर्ष 2047 तक इस्पात क्षेत्र की औसत कार्बन उत्सर्जन तीव्रता को 2.54 टन कार्बन डाइऑक्साइड प्रति टन कच्चे इस्पात से घटाकर लगभग 1.54 टन करने की परिकल्पना की गई है।

कामधेनु समूह के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक सतीश कुमार अग्रवाल ने कहा कि उत्पादन क्षमता बढ़ाने, कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करने, प्रौद्योगिकी के आधुनिकीकरण, विशेष इस्पात और कार्बन उत्सर्जन में कमी पर जोर देने से देश में एकीकृत इस्पात उत्पादकों तथा द्वितीयक इस्पात विनिर्माताओं के लिए महत्वपूर्ण अवसर पैदा होंगे। सरकार ने कच्चे इस्पात की उत्पादन क्षमता को वर्ष 2047 तक बढ़ाकर 60.4 करोड़ टन करने, उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और आयात से जुड़ी प्रमुख चुनौतियों का समाधान करने के उद्देश्य से नई इस्पात नीति का मसौदा जारी किया है। 


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Content Writer

jyoti choudhary

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