McDonald, KFC और Dominos रखेंगे आपकी सेहत का ख्याल, घर बैठे ही मिलेगा साफ-सुथरा खाना

punjabkesari.in Saturday, Mar 21, 2020 - 10:50 AM (IST)

बिजनेस डेस्क: दिल्ली सरकार ने कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए 31 मार्च तक रेस्तरां में बैठकर खाने की सर्विस पर रोक लगा दी है। वहीं रेस्तरां व अन्य फूड चेन कम्पनियां भी ऐसे ही कदम उठा रही हैं। सरकार के फैसले के बाद कई रेस्तरांओं में साफ-सफाई का ख्याल रखा जा रहा है। वहीं कई रेस्तरां अस्थायी तौर पर बंद कर दिए गए हैं। अब मैक्डोनाल्ड, के.एफ.सी., डॉमिनोज पिज्जा जैसी फूड चेन कम्पनियां भी जरूरी कदम उठा रही हैं। इन दिनों फूड कम्पनियां केवल फूड ऑर्डर पर फोकस कर रही हैं।

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बता दें कि मैक्डोनाल्ड और के.एफ.सी. ने अपने रैस्टोरैंट में डाइन इन सर्विस को बंद कर दिया है। इन दिनों ये कम्पनियां बिना सीधे संपर्क के खाने की डिलीवरी (कॉन्टैक्टलैस डिलीवरी) को बढ़ावा दे रही हैं। पश्चिमी और दक्षिणी भारत में मैक्डोनाल्ड को चलाने वाली कम्पनी वैस्टलाइफ डिवैल्पमैंट के मुताबिक कम्पनी ने कॉन्टैक्टलैस डिलीवरी शुरू की है, ताकि कस्टमर तक खाना खुले हाथों से छुए बिना सुरक्षित और उचित दूरी को ध्यान में रखते हुए पहुंचे। कम्पनी ने कहा कि उन्होंने अपने सभी राइडरों को सैनिटाजर उपलब्ध कराए हैं, ताकि वे हर डिलीवरी से पहले और उसके बाद हाथों को साफ करें। साथ ही खाना रखने वाले बैगों की भी हर 3 घंटे में सफाई करें।

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डॉमिनोज पिज्जा रेस्तरां में जीरो-कॉन्टैक्ट डिलीवरी शुरू
भारत में डॉमिनोज पिज्जा को चलाने वाली कम्पनी जुबिलैंट फूडवक्र्स लिमिटेड ने बयान जारी कर कहा कि देशभर में कम्पनी के सभी 1,325 डॉमिनोज पिज्जा रैस्टोरैंट में जीरो-कॉन्टैक्ट डिलीवरी शुरू की गई है। जीरो-कॉन्टैक्ट डिलीवरी के तहत कस्टमर कम्पनी की एप से ऑर्डर करते वक्त यह विकल्प चुन सकते हैं। कम्पनी के मुताबिक ये सभी प्रीपेड ऑर्डरों पर लागू होगा। सेफ डिलीवरी एक्सपर्ट जब भी ऑर्डर लेकर पहुंचेगा, तो वह कस्टमर के दरवाजे के सामने एक बैग में उसे रख देगा और पीछे हट जाएगा।

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50 प्रतिशत से ज्यादा कंपनियों ने कहा कि प्रभावित हुआ कारोबार
भारत की 50 प्रतिशत से अधिक कंपनियों को लगता है कि कोरोना वायरस (कोविड-19) के प्रकोप के मद्देनजर उनका परिचालन प्रभावित होगा और करीब 80 प्रतिशत के नकदी प्रवाह में कमी आई है। उद्योग संगठन फिक्की के एक सर्वेक्षण के अनुसार इस महामारी ने देश की अर्थव्यवस्था के लिए नई चुनौतियां पेश की हैं और इससे मांग तथा आपूर्ति दोनों बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। गौरतलब है कि भारत पहले ही वृद्धि दर में कमी का सामना कर रहा है। चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में अर्थव्यवस्था 4.7 प्रतिशत की दर से बढ़ी, जो 6 साल में सबसे कम थी। फिक्की ने कहा कि 53 प्रतिशत भारतीय कंपनियों ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी के चलते कारोबार प्रभावित हुआ है। सर्वेक्षण के मुताबिक महामारी के चलते लगभग 80 प्रतिशत प्रतिभागियों ने नकदी प्रवाह में कमी की बात कही। 
 


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