महंगाई घटी तो 3 महीने के हाई पर मैन्युफैक्चरिंग पी.एम.आई., लगातार 17वें महीने 50 के पार हुआ लेवल

punjabkesari.in Saturday, Dec 03, 2022 - 06:09 PM (IST)

नई दिल्ली: महंगाई में नरमी आने का असर फैक्टरी एक्टिविटीज पर दिख रहा है। नवम्बर में भारत की फैक्टरी एक्टिविटीज 3 महीने के हाई पर पहुंच गई है। एस. एंड पी. ग्लोबल के मुताबिक नवम्बर महीने में भारत का मैन्यूफैक्चरिंग पी.एम.आई. बढ़कर 55.7 पहुंच गया है। 

यह 3 महीने में सबसे ज्यादा है। बता दें कि अक्तूबर में मैन्यूफैक्चरिंग 7.41 फीसदी से अक्तूबर में घ पी.एम.आई. 55.3 के लेवल पर था। नवम्बर 2022 लगातार 17वां महीना दर्शाता है कि आगे कीमतों में बत जब मैन्यूफैक्चरिंग पी.एम.आई. की दर घट सकती है, जि का लेवल 50 के पार बना हुआ है। मैन्यूफैक्चरर्स को कुछ राहत मिल पी.एम.आई. का 50 से अधिक होना है, जबकि 50 से नीचे होना संकुचन को दिखाता है।

इनपुट कास्ट इनप्लेशन 2 साल के पार
एक निजी सर्वे के मुताबिक ग्लोबल इकोनॉमिक कंडीशन में गिरावट के बावजूद डिमांड बनी हुई है, क्योंकि इनपुट कास्ट इनफ्लेशन 2 साल के निचले स्तर पर हैं। दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में कंज्यूमर इनफ्लेशन सितम्बर के 5 महीने के हाईलेवल 7.41 फीसदी से अक्तूबर में घटकर 6.77 फीसदी पर आ गया, जो यह दर्शाता है कि आगे कीमतों में बढ़ौतरी की दर घट सकती है, जिससे मैन्यूफैक्चरिंग को कुछ राहत मिलेगी।

मंदी की आशंकाओं के बीच बेहतर प्रदर्शन
एस. एंड पी. ग्लोबल मार्कीट इंटैलिजेंस में इकोनॉमिक्स एसोसिएट डायरैक्टर पोलियाना डी. लीमा ने कहा कि भारत के मैन्यूफैक्चरिंग सैक्टर ने नवम्बर में अच्छा प्रदर्शन जारी रखा। कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में मंदी की आशंका और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बिगड़ते आऊटलुक के बीच मैन्यूफैक्चरिंग सैक्टर का प्रदर्शन भारत में बेहतर रहा । यह गुड्स प्रोड्यूसर्स के लिए हमेशा की तरह बिजनैस था, जिन्होंने बढ़ रही डिमांड के बीच प्रोडक्शन वैल्यू माक 3 महीने के हाई पर पहुंचा दिया। 

रोजगार में बढ़ौतरी
पॉजिटिव सैंटीमेंट को दर्शाते हुए अक्तूबर को छोड़कर जनवरी 2020 के बाद से रोजगार सबसे तेज दर से बढ़ा है। विशेष रूप से कंज्यूमर और इंटरमीडिएट वस्तुओं के लिए मजबूत मांग और मार्केटिंग ने नए ऑर्डर सब-इंडैक्स को 3 महीने के हाई लेवल पर पहुंचा दिया है। अंतर्राष्ट्रीय मांग में लगातार 8वें महीने और अक्तूबर के समान गति से बढ़ौतरी हुई। 26 महीनों में इनपुट कास्ट सबसे धीमी गति से बढ़ी है, जिससे निर्माताओं को कुछ राहत मिली। 

 

 

 


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Content Editor

rajesh kumar

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