बीमा की गलत बिक्री अब अपराध: वित्त मंत्री की बैंकों को सख्त चेतावनी, 1 जुलाई से लागू होंगे कड़े नियम

punjabkesari.in Monday, Feb 23, 2026 - 05:22 PM (IST)

नई दिल्लीः वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकों द्वारा बीमा सहित अन्य वित्तीय उत्पादों की गलत तरीके से बिक्री (मिस-सेलिंग) पर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कहा है कि यह भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत अपराध है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि बैंकों को अपने मूल कार्य—जमा जुटाने और ऋण देने—पर ध्यान देना चाहिए, न कि अनावश्यक बीमा उत्पाद थोपने पर।

बजट के बाद आरबीआई के केंद्रीय निदेशक मंडल को संबोधित करने के पश्चात पत्रकारों से बातचीत में सीतारमण ने कहा कि कई मामलों में ग्राहकों को ऐसे बीमा उत्पाद बेचे जा रहे हैं, जिनकी उन्हें आवश्यकता ही नहीं है। उन्होंने कहा कि “गलत बिक्री बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”

1 जुलाई से सख्त नियम लागू

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 11 फरवरी को मिस-सेलिंग पर दिशानिर्देशों का मसौदा जारी किया था। प्रस्तावित नियमों के तहत यदि किसी ग्राहक को भ्रामक जानकारी देकर उत्पाद बेचा जाता है, तो बैंक को पूरी राशि लौटानी होगी और नुकसान की भरपाई भी करनी होगी। इस पर 4 मार्च तक सार्वजनिक टिप्पणियां मांगी गई हैं और 1 जुलाई से कड़े नियम लागू होंगे। सीतारमण ने कहा कि अब स्पष्ट संदेश जाना चाहिए कि गलत बिक्री कानूनन अपराध है।

नियामकीय खामियों से ग्राहकों को नुकसान

वित्त मंत्री ने बताया कि अब तक ऐसे मामलों में आरबीआई और बीमा नियामक (इरडा) के बीच नियामकीय अंतर बना रहा, जिससे ग्राहकों को नुकसान उठाना पड़ा। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति गृह ऋण के लिए संपत्ति गिरवी रखता है, तो उससे अतिरिक्त बीमा खरीदने का दबाव क्यों डाला जाता है, जबकि जोखिम पहले से कवर होता है।

जमा और कासा पर दें ध्यान

सीतारमण ने बैंकों से कहा कि वे ग्राहकों की जरूरतों और उनकी वित्तीय स्थिति को समझने पर ध्यान दें। गैर-बैंकिंग उत्पाद बेचने के बजाय उन्हें कम लागत वाली जमा और कासा (चालू खाता-बचत खाता) आधार मजबूत करना चाहिए।

जमा 12.5%, कर्ज 14.5% बढ़ा

इस बीच आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि बैंकिंग प्रणाली में जमा वृद्धि दर करीब 12.5% है, जबकि ऋण वृद्धि लगभग 14.5% के आसपास बनी हुई है। उन्होंने कहा कि मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) आगे की दर कटौती पर निर्णय वृद्धि और मुद्रास्फीति के आंकड़ों को देखते हुए करेगी। फरवरी 2025 से अब तक रेपो दर में 1.25% की कटौती कर इसे 5.25% किया जा चुका है। हालांकि हालिया समीक्षा बैठक में वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच यथास्थिति बनाए रखने का निर्णय लिया गया।

मल्होत्रा ने आश्वासन दिया कि आरबीआई सभी बाजार खंडों में पर्याप्त और सतत नकदी उपलब्ध कराने के लिए जरूरी कदम उठाता रहेगा। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली द्विमासिक मौद्रिक नीति 6 अप्रैल को घोषित की जाएगी।


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Content Writer

jyoti choudhary

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