विदेशी मुद्रा कमी से जूझ रहे देशों के लिए रुपए में भुगतान को बढ़ावा देना चाहता भारत: सीतारमण

punjabkesari.in Friday, Oct 16, 2026 - 02:53 PM (IST)

नई दिल्लीः वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को कहा कि भारत उन साझेदार देशों की मदद के लिए रुपए में व्यापार भुगतान को बढ़ावा देना चाहता है, जो विदेशी मुद्राओं की कमी का सामना कर रहे हैं। इससे वे जरूरी वस्तुओं का आयात जारी रख सकेंगे। उन्होंने थाईलैंड के बैंकॉक में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ)-विश्व बैंक की वार्षिक बैठकों के दौरान 'अटलांटिक काउंसिल' के साथ अलग से बातचीत में कहा कि प्रमुख विदेशी मुद्राओं तक पहुंच में कठिनाई का सामना करने वाले देशों को अपनी जरूरत के बावजूद वस्तुओं का आयात जारी रखने में परेशानी होती है। स्थानीय मुद्राओं में भुगतान की व्यवस्था इस समस्या को दूर करने में मदद कर सकती है। 

सीतारमण ने कहा, ''भारत चाहता है कि उससे सामान आयात करने वाले देश भुगतान रुपए में करें और हम इस काम करने को इच्छुक हैं।'' मंत्री ने कहा कि भारत उन देशों के साथ व्यापार जारी रखने के लिए रुपए और स्थानीय मुद्राओं में भुगतान की सुविधा देने की दिशा में काम कर रहा है, जो विदेशी मुद्रा की कमी का सामना कर रहे हैं। 

सीतारमण ने कहा, ''रुपए और स्थानीय मुद्राओं में भुगतान की व्यवस्था हम उन देशों के लाभ के लिए करना चाहते हैं, जिनके पास प्रमुख विदेशी मुद्राओं की कमी है लेकिन उन्हें कुछ वस्तुओं का आयात करना जरूरी है। इसलिए, रुपए में व्यापार के जरिये स्थानीय मुद्राओं में भुगतान संभव बनाने की कोशिश की जा रही है, ताकि व्यापार जारी रह सके।'' उन्होंने कहा, ''यह एक ऐसा तरीका है, जिसे हम समझ चुके हैं और जिस पर काम कर रहे हैं।'' 

वित्त मंत्री ने कहा कि युद्ध समेत बढ़ते वैश्विक तनावों के कारण कई देश कर्ज के जाल और भुगतान संतुलन के संकट में फंस गए। बहुपक्षीय विकास संस्थानों को इन समस्याओं से निपटने में तीन से चार साल तक लग जाते थे लेकिन अब इस तरह की कमियों को दूर किया जा रहा है। बहुपक्षीय सहयोग की व्यवस्था में भारत अधिक सार्थक द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देने पर भी जोर दे रहा है। सीतारमण ने कहा कि भारत कई व्यापार समझौतों पर आगे बढ़ रहा है, जिससे साझेदारियों को मजबूती मिल रही है। उन्होंने कहा कि हालांकि दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के संगठन (आसियान) के साथ व्यापार समझौता भारत के पक्ष में नहीं है। 

सीतारमण ने कहा, ''आसियान देशों के साथ हमारे व्यापार समझौते से उन्हें लाभ मिलने के हम खिलाफ नहीं हैं, लेकिन यह भारत के प्रतिकूल है।'' उन्होंने कहा, ''अगर इस समझौते से आसियान को फायदा होता है, तो हमें खुशी है। लेकिन हम उन चिंताओं का भी समाधान चाहते हैं, जिनका सामना हमें आयातक के तौर पर करना पड़ रहा है और जिनसे हमारे बाजार और विनिर्माता प्रभावित हो रहे हैं।'' उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष इस समझौते की समीक्षा कर रहे हैं। भारत इसे 'थोड़े बदले हुए स्वरूप' में जारी रखना चाहता है। 

सीतारमण ने कहा कि भारत ने एशिया और प्रशांत क्षेत्र की 16 अर्थव्यवस्थाओं के बीच हुए क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) समझौते से जानबूझकर दूरी बनाए रखी, क्योंकि इसमें भारत के लिए कुछ खास नहीं था। उन्होंने कहा कि भारत इन सदस्य देशों के साथ व्यापार जारी रखे हुए है लेकिन इस समझौते में शामिल होना भारत के हित में नहीं होगा। भारत ने खासकर चीन से होने वाले सस्ते आयात, बढ़ते व्यापार घाटे और घरेलू उद्योगों तथा कृषि क्षेत्र के लिए पर्याप्त सुरक्षा के अभाव की आशंकाओं के कारण नवंबर 2019 में क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) से हटने का फैसला किया था।  


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Content Writer

jyoti choudhary

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