अमेरिकी बॉन्ड से भारत की दूरी, RBI का निवेश घटकर 190 अरब डॉलर, इन देशों ने भी घटाई हिस्सेदारी
punjabkesari.in Saturday, Jan 10, 2026 - 11:15 AM (IST)
बिजनेस डेस्कः भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड में निवेश 200 अरब डॉलर से नीचे आ गया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर 2025 के अंत तक भारत के पास अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड्स में निवेश घटकर करीब 190 अरब डॉलर रह गया, जो एक साल पहले के मुकाबले 50.7 अरब डॉलर कम है।
यह रुझान सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। चीन, ब्राजील, सऊदी अरब और हांगकांग जैसे कई देशों ने भी अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड्स में अपनी हिस्सेदारी घटाई है।
सोने की ओर बढ़ा RBI का झुकाव
इसी अवधि में RBI ने अपने सोने के भंडार में इजाफा किया है। अक्टूबर 2025 के अंत तक केंद्रीय बैंक के पास 880.18 मीट्रिक टन सोना था, जो एक साल पहले 866.8 मीट्रिक टन था। 26 सितंबर तक कुल विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़कर 13.6% हो गई, जबकि पिछले साल यह 9.3% थी।
क्यों बदल रही है रणनीति?
IDFC फर्स्ट बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री गौरा सेनगुप्ता के अनुसार, "अमेरिकी और अन्य विकसित देशों में बढ़ते वित्तीय दबावों के कारण बॉन्ड यील्ड बढ़ी है, जिससे ट्रेजरी बॉन्ड्स में वैल्यूएशन लॉस का खतरा बढ़ गया है। इस जोखिम को कम करने के लिए RBI सहित कई केंद्रीय बैंक अब सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं।" रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंक डॉलर पर निर्भरता घटाने और सेफ-हेवन एसेट के तौर पर सोने को प्राथमिकता देने लगे हैं।
अमेरिकी ट्रेजरी में सबसे ज्यादा निवेश किसका?
अक्टूबर 2025 के अंत तक अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड्स में कुल वैश्विक निवेश 9.24 ट्रिलियन डॉलर रहा।
- जापान: 1.2 ट्रिलियन डॉलर (सबसे ज्यादा)
- यूके: 877 अरब डॉलर
- चीन: 688.7 अरब डॉलर (पिछले साल से कम)
वहीं, ब्राजील का निवेश 228.8 अरब डॉलर से घटकर 167.7 अरब डॉलर रह गया।
