ट्रंप टैरिफ पर RBI के पूर्व गर्वनर रघुराम राजन का बड़ा बयान, कहा- अमेरिका के लिए नुकसानदायक सौदा
punjabkesari.in Friday, Apr 04, 2025 - 12:36 PM (IST)

बिजनेस डेस्कः अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 60 देशों पर लगाए गए टैरिफ को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने गुरुवार को कहा कि यह कदम अमेरिका के लिए ही नुकसानदायक साबित होगा और भारत पर इसका प्रभाव कम होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सभी व्यापारिक साझेदारों से आयात पर 10 प्रतिशत से लेकर 50 प्रतिशत तक अतिरिक्त मूल्य-आधारित शुल्क लगाने की घोषणा की है।
अमेरिकी इकोनॉमी पर सीधा असर
राजन ने कहा, "अल्पावधि में, इसका सबसे बड़ा असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर ही पड़ेगा। यह एक तरह से ‘सेल्फ गोल’ (खुद को नुकसान पहुंचाने) जैसा कदम है।"
भारत के निर्यात पर असर लेकिन महंगाई नहीं बढ़ेगी
- ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 27% तक का जवाबी शुल्क लगाया है।
- इसका असर भारतीय निर्यात पर पड़ेगा, क्योंकि अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए कीमतें बढ़ेंगी, जिससे मांग घटेगी।
- हालांकि, घरेलू आपूर्ति अधिक रहने से महंगाई पर असर नहीं होगा।
5 और 9 अप्रैल से प्रभावी होंगे शुल्क
- ट्रंप के नए टैरिफ 5 अप्रैल से 10% और 9 अप्रैल से 27% लागू होंगे।
- सेमीकंडक्टर्स, दवाएं और ऊर्जा उत्पाद शुल्क से मुक्त रहेंगे।
- अन्य देशों पर भी शुल्क लगाया गया है, जिससे भारत को अधिक नुकसान नहीं होगा, क्योंकि अमेरिकी उपभोक्ताओं के पास ज्यादा विकल्प नहीं बचेंगे।
भारत के लिए अवसर भी
राजन ने कहा कि भारत को इस व्यापार संकट को अवसर में बदलने पर ध्यान देना चाहिए। "हम अपने खुद के टैरिफ कम कर सकते हैं, जिससे वैश्विक बाजारों में हमारी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।" भारत को व्यापार रणनीति में बदलाव कर ASEAN, जापान, यूरोप और अफ्रीका जैसे बाजारों को प्राथमिकता देनी चाहिए। चीन और दक्षिण एशियाई देशों के साथ मजबूत व्यापारिक संबंध बनाना जरूरी होगा।
अमेरिकी उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य लेकिन मुश्किलें बरकरार
राजन ने कहा कि ट्रंप प्रशासन का लक्ष्य अमेरिका में उत्पादन को बढ़ावा देना है लेकिन यह बहुत लंबी प्रक्रिया होगी और तत्काल असर दिखना मुश्किल है।
भारत-अमेरिका व्यापारिक रिश्तों में नया मोड़
ट्रंप प्रशासन का मानना है कि भारत अमेरिकी उत्पादों पर ऊंचा शुल्क लगाता है, इसलिए यह जवाबी कार्रवाई जरूरी थी। अब यह देखना होगा कि भारत इस पर क्या रुख अपनाता है।