Tomato Price Crash: टमाटर के दाम में बड़ी गिरावट से किसान परेशान, 65% तक गिरे भाव, जानें वजह?

punjabkesari.in Wednesday, Oct 21, 2026 - 11:29 AM (IST)

नई दिल्लीः टमाटर की कीमतों में भारी गिरावट ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। महाराष्ट्र की प्रमुख थोक मंडियों में से एक पिंपलगांव एपीएमसी में टमाटर के दाम एक सप्ताह के भीतर करीब 65% तक टूट गए हैं। बढ़ती आवक और कमजोर मांग के चलते थोक कीमतें 20 किलो के एक क्रेट के लिए 321 रुपए से गिरकर महज 111 रुपए रह गई हैं। इससे खेती की बढ़ती लागत से जूझ रहे किसानों के सामने अपनी उपज का उचित दाम पाने की चुनौती खड़ी हो गई है।

वहीं, खुदरा बाजार में भी टमाटर सस्ता हुआ है। नासिक में सोमवार को टमाटर करीब 20 रुपए प्रति किलो बिक रहा था, जबकि एक सप्ताह पहले इसकी कीमत लगभग 40 रुपए प्रति किलो थी यानी खुदरा कीमतों में भी करीब 50% की गिरावट दर्ज की गई।

थोक मंडियों में टमाटर की भरमार, कीमतों पर दबाव

एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिंपलगांव एपीएमसी में पिछले सप्ताह से रोजाना करीब 3 लाख से 3.75 लाख क्रेट टमाटर पहुंच रहे हैं। बाजार में सप्लाई बढ़ने के मुकाबले मांग कमजोर रहने से कीमतों पर भारी दबाव बना हुआ है।

एपीएमसी के एक अधिकारी के अनुसार, मंडी में टमाटर की आवक लगातार अधिक बनी हुई है। इसके चलते अलग-अलग गुणवत्ता के टमाटरों की कीमतों में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। सोमवार को एक क्रेट की कीमत गुणवत्ता के आधार पर 20 रुपए से 331 रुपए तक रही। खराब गुणवत्ता वाले टमाटर करीब 1 रुपए प्रति किलो के भाव पर बिके, जबकि बेहतर गुणवत्ता वाले टमाटरों का भाव लगभग 16.55 रुपए प्रति किलो तक पहुंचा।

एक हफ्ते में 321 रुपए से घटकर 111 रुपए हुआ भाव

पिंपलगांव एपीएमसी में 12 अक्टूबर को 20 किलो के एक क्रेट की औसत थोक कीमत 321 रुपए थी। सोमवार तक यह घटकर 111 रुपए रह गई। इस तरह किसानों को मिलने वाले थोक भाव में करीब 65.4% की गिरावट आई है।

कीमतों में इस तेज गिरावट से उन किसानों की परेशानी बढ़ गई है, जिन्हें बीज, खाद, कीटनाशक, मजदूरी और परिवहन जैसी लागतों पर पहले ही अधिक खर्च करना पड़ रहा है।

ज्यादा गर्मी के कारण तेजी से पक रहे टमाटर

व्यापारियों के मुताबिक, तापमान अधिक रहने से टमाटर सामान्य से जल्दी पक रहे हैं। इससे कम समय में बड़ी मात्रा में उपज मंडियों तक पहुंच रही है और सप्लाई का दबाव बढ़ गया है। जब बड़ी मात्रा में टमाटर एक साथ बाजार में पहुंचते हैं, तो मांग के मुकाबले आपूर्ति बढ़ने पर कीमतों में तेज गिरावट आ सकती है। टमाटर जल्दी खराब होने वाली फसल है, इसलिए किसानों और व्यापारियों के पास लंबे समय तक स्टॉक रखने का विकल्प भी सीमित रहता है।

कमजोर मांग ने बढ़ाई किसानों की परेशानी

मांग में कमी भी कीमतों में गिरावट की एक बड़ी वजह है। एपीएमसी अधिकारियों ने नवरात्र के दौरान कारोबार में सुस्ती और कमजोर निर्यात मांग का जिक्र किया। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे प्रमुख उपभोक्ता राज्यों में स्थानीय टमाटर की सप्लाई उपलब्ध होने से नासिक के टमाटरों की मांग प्रभावित हुई है।

इस स्थिति में महाराष्ट्र के उत्पादकों को दूसरे राज्यों के बाजारों में अपनी उपज बेचने के लिए कम अवसर मिल रहे हैं, जिससे कीमतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।

क्या आने वाले दिनों में और सस्ता होगा टमाटर?

खुदरा कारोबारियों के मुताबिक, थोक कीमतों में गिरावट का असर दुकानों पर दिखने में आमतौर पर एक से दो दिन लग सकते हैं। यदि मंडियों में आवक अधिक बनी रहती है और मांग में सुधार नहीं होता, तो खुदरा कीमतों में और कमी आने की संभावना है।

हालांकि, आने वाले दिनों में टमाटर के भाव किस दिशा में जाएंगे, यह मंडियों में आवक, मौसम, स्थानीय मांग और अन्य राज्यों से मिलने वाले ऑर्डर पर निर्भर करेगा। फिलहाल, कम कीमतों से उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है, लेकिन किसानों के लिए यह स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है।
 


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Content Writer

jyoti choudhary

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