Turmeric Price: हल्दी की कीमतों में लगी आग, एक साल में 80% हुई महंगी, सूखे का डर और कम सप्लाई से चढ़े दाम
punjabkesari.in Friday, Oct 16, 2026 - 06:24 PM (IST)
नई दिल्लीः रसोई में रोजाना इस्तेमाल होने वाली हल्दी की कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिल रही है। घरेलू और विदेशी बाजारों में मांग बढ़ने, सीमित आपूर्ति और अगली फसल पर सूखे के खतरे ने कीमतों को मजबूती दी है। किसान और स्टॉकिस्ट भी भाव और बढ़ने की उम्मीद में अपना माल बेचने से बच रहे हैं। इसका असर हाजिर और वायदा दोनों बाजारों में दिखाई दे रहा है।
एक महीने में 18% से ज्यादा बढ़े दाम
हल्दी की कीमतें पिछले एक महीने में 18% से अधिक बढ़ चुकी हैं, जबकि एक साल में इनमें करीब 80% की तेजी आई है। तमिलनाडु के पेरुंदुरई हाजिर बाजार में हल्दी के भाव 23,000 रुपए प्रति क्विंटल के पार पहुंच गए हैं। वहीं, NCDEX के वायदा बाजार में कीमतें 24,500 रुपए प्रति क्विंटल से ऊपर कारोबार कर रही हैं।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ और मांग मजबूत बनी रही, तो आने वाले हफ्तों में कीमतों में और तेजी आ सकती है।
सूखे से फसल पर असर की आशंका
महाराष्ट्र के मराठवाड़ा, तेलंगाना के निजामाबाद और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में पानी की कमी को लेकर चिंता बनी हुई है। इरोड हल्दी मर्चेंट्स एंड गोडाउन ओनर्स एसोसिएशन के सचिव एम. सत्यमूर्ति के मुताबिक, कुछ इलाकों में पानी की कमी के कारण हल्दी की बुवाई का रकबा 20% से 30% तक घटने की आशंका है। इससे अगले साल के उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
हालांकि, सरकारी अनुमान के मुताबिक 2026 में भारत का हल्दी उत्पादन करीब 15% बढ़ सकता है। खेती के रकबे में वृद्धि और कुछ उत्पादक क्षेत्रों में बेहतर मानसून से फसल को समर्थन मिलने की उम्मीद है।
पुराने स्टॉक में भी आई कमी
बाजार में उपलब्ध पुराने स्टॉक में कमी कीमतों को सहारा दे रही है। पिछले सीजन में 20 लाख से अधिक बोरों के मुकाबले इस बार करीब 15 लाख बोरे कैरी-फॉरवर्ड स्टॉक रहने का अनुमान है। कर्नाटक में सूखे से हल्दी की फसल को नुकसान पहुंचने की भी खबरें हैं।
विदेशी मांग ने बढ़ाई कीमतें
भारत से जुलाई 2026 में हल्दी का निर्यात सालाना आधार पर 10% घटकर 13,489 टन रहा। हालांकि, अप्रैल से जुलाई के दौरान कुल निर्यात 4% बढ़कर 65,476 टन पहुंच गया। घरेलू मांग के साथ निर्यात बाजार की गतिविधियां भी कीमतों को प्रभावित कर रही हैं।
कमोडिटी विशेषज्ञ अनुज गुप्ता के अनुसार, सीमित आपूर्ति, कम पुराना स्टॉक और किसानों की धीमी बिक्री के कारण हल्दी का बाजार मजबूत बना हुआ है। हालांकि, आगे कीमतों की दिशा मौसम, नई फसल की स्थिति और मांग पर निर्भर करेगी।
