Energy Drink crackdown: हटेगा एनर्जी ड्रिंक का लेबल, FSSAI के फैसले से कंपनियों की बढ़ी चिंता
punjabkesari.in Thursday, Jul 30, 2026 - 12:52 PM (IST)
नई दिल्लीः भारत के खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने हाई कैफीन वाले पेय पदार्थ बेचने वाली कंपनियों को अपने उत्पादों पर एनर्जी ड्रिंक (Energy Drink) शब्द का इस्तमाल करने पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। रेगुलेटर का कहना है कि भारत में इस तरह के उत्पादों के लिए कोई आधिकारिक मानक तय नहीं है, इसलिए ऐसे दावे ग्राहकों को गुमराह कर सकते हैं।
FSSAI ने कंपनियों को "शरीर और दिमाग को ऊर्जा देता है" या "कमजोरी दूर करता है" जैसे दावे नहीं करने को कहा है। इस फैसले का पेप्सी के साथ- साथ कई कंपनियों ने विरोध किया। उनका कहना है कि इससे उनके ब्रांड और बिक्री पर असर पड़ेगा। हालांकि, एफएसएसएआई के सीईओ रजित पुनहानी ने साफ कर दिया कि अगर कंपनियां असहमत हैं तो वे अदालत जा सकती हैं।
FSSAI ने कंपनियों को दिया 90 दिन का समय
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, कंपनियों ने आखिरकार नियम मानने पर सहमति जताई है और एफएसएसएआई ने लेबल बदलने के लिए 90 दिन का समय दिया है। दुनियाभर में हाई-कैफीन वाले पेय पदार्थों को लेकर स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं बढ़ रही हैं। इनमें कैफीन, चीनी और टॉरिन की मात्रा ज्यादा होती है। इसी कारण इंग्लैंड में अगले साल अप्रैल से 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को ऐसे पेय बेचने पर रोक लग जाएगी। वहीं, पाकिस्तान के कुछ क्षेत्रों में इन्हें "स्टिमुलेंट ड्रिंक" (उत्तेजक पेय) के नाम से बेचा जाता है।
13 हजार करोड़ का सालाना मार्केट
भारत का एनर्जी ड्रिंक्स मार्केट, जिसकी सालाना बिक्री का अनुमान 13,000 करोड़ रुपए है, तेजी से बढ़ रहा है। इसकी सेल्स में 20-25 फीसदी की दर से इजाफा हो रहा है।
अलग-अलग राज्यों के FDA अधिकारियों ने डिस्ट्रीब्यूटर के गोदामों से स्टॉक जब्त करना शुरू कर दिया है, हालांकि निर्देश अभी पूरी तरह लागू नहीं हुआ है। वैसे रेडबुल, पेप्सिको, रिलायंस और कोका-कोला की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
कंपनियों से होनी चाहिए चर्चा
इंडियन बेवरेज एसोसिएशन ने कहा कि वह सरकार के नियमों का पालन करेगी और विज्ञान पर आधारित नीतियों का समर्थन करती है। हालांकि, एसोसिएशन ने 6 जुलाई को FSSAI को भेजे एक पत्र में यह भी कहा कि कोई भी बड़ा नियम लागू करने से पहले कंपनियों से चर्चा की जानी चाहिए, ताकि नियमों को आसानी से लागू किया जा सके, विवाद कम हों और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।
