Gold Loan Boom: सोने की बढ़ती कीमतों का ग्राहकों ने उठाया खूब फायदा, Gold Loan में जबरदस्त उछाल
punjabkesari.in Monday, Jul 06, 2026 - 11:20 AM (IST)
बिजनेस डेस्कः सोने की कीमतों में आई रिकॉर्ड तेजी का सीदा असर गोल्ड लोन मार्केट पर देखने को मिला है। कीमतों में तेजी का भारतीयों ने जमकर फायदा उठाया है। वित्त वर्ष 2025-26 में सोना गिरवी रखकर लिए गए कर्ज की प्रति व्यक्ति औसत राशि 39 प्रतिशत बढ़कर 1.96 लाख रुपए हो गई है। यह आंकड़े वित्त वर्ष 2022-23 में 98,000 रुपए था यानी तीन सालों में औसत गोल्ड लोन लगभग दोगुना हो गया है।
क्रेडिट सूचना प्रदाता कंपनी एक्सपेरियन इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2024 से मार्च 2026 के बीच सोने की प्राइस इंडेक्स में 144% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। सोने के मूल्य में वृद्धि के चलते बैंक और गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थान (NBFC) अब उसी सोने के बदले पहले की तुलना में कहीं अधिक लोन स्वीकृत कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कई मामलों में लोन की राशि 200 प्रतिशत तक बढ़ी है।
खुदरा कर्ज में गोल्ड लोन की हिस्सेदारी बढ़ी
देश के कुल रिटेल लोन बाजार में गोल्ड लोन की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। यह वित्त वर्ष 2023-24 में 20 प्रतिशत थी, जो 2024-25 में बढ़कर 30 प्रतिशत और 2025-26 में 41 प्रतिशत तक पहुंच गई।
तीन साल में तीन गुना हुआ कारोबार
गोल्ड लोन का कुल कारोबार भी तेजी से बढ़ा है। मार्च 2023 में यह 6.3 लाख करोड़ रुपए था, जो मार्च 2026 तक बढ़कर 19.4 लाख करोड़ रुपए हो गया। वहीं, तीन लाख रुपए से अधिक के गोल्ड लोन का हिस्सा भी लगातार बढ़ रहा है।
कई राज्यों में तेज वृद्धि
रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में गोल्ड लोन में 138 प्रतिशत, पश्चिम बंगाल में 112 प्रतिशत, राजस्थान में 105 प्रतिशत और महाराष्ट्र में 102 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इससे स्पष्ट है कि देशभर में गोल्ड लोन की स्वीकार्यता तेजी से बढ़ रही है।
दोबारा लोन लेने वालों की संख्या अधिक
गोल्ड लोन लेने वाले ग्राहकों में दोबारा लोन लेने की प्रवृत्ति भी बढ़ी है। वर्ष 2026 की अंतिम तिमाही में लगभग 75 प्रतिशत ग्राहक ऐसे थे, जिन्होंने पहले भी गोल्ड लोन लिया था और फिर से ऋण के लिए आवेदन किया। साथ ही, लोग अब कम अवधि के लिए लोन लेकर उसे जल्दी चुकाने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
समय पर भुगतान से घटे डिफॉल्ट
गोल्ड लोन बाजार के विस्तार के बावजूद ऋण चूक (डिफॉल्ट) के मामलों में कमी आई है। 90 दिनों से अधिक समय तक किस्त न चुकाने वाले खातों का अनुपात मार्च 2023 के 0.4 प्रतिशत से घटकर मार्च 2026 में 0.2 प्रतिशत रह गया है। इससे संकेत मिलता है कि ग्राहक समय पर भुगतान कर रहे हैं और बैंक व वित्तीय संस्थान भी अधिक सुरक्षित तरीके से ऋण वितरित कर रहे हैं।
