कोल इंडिया ने परिचालन लागत में वृद्धि के झटके को खुद झेला, कीमतों को नहीं बढ़ाया
punjabkesari.in Friday, Apr 10, 2026 - 04:07 PM (IST)
नई दिल्लीः सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने शुक्रवार को कहा कि उसने विस्फोटकों और औद्योगिक डीजल की बढ़ती कीमतों सहित परिचालन लागत में आए उछाल के झटके को खुद ही वहन किया है। कंपनी ने कहा कि लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर डालने से बाजार में कीमतों पर व्यापक नकारात्मक असर पड़ता और वह देश को किफायती दरों पर कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
घरेलू कोयला उत्पादन में 80 प्रतिशत से अधिक की हिस्सेदारी रखने वाली कोल इंडिया अपनी खदानों में काम करने वाले उन ठेकेदारों को भी औद्योगिक डीजल की बढ़ी हुई कीमतों को लेकर क्षतिपूर्ति दे रही है जो थोक में इसकी खरीदारी करते हैं। कंपनी की खदानों में इस्तेमाल होने वाले विस्फोटकों के निर्माण में 'अमोनियम नाइट्रेट' की हिस्सेदारी लगभग 60 प्रतिशत होती है। इसकी कीमत युद्ध-पूर्व के 50,500 रुपये प्रति टन से 44 प्रतिशत बढ़कर एक अप्रैल, 2026 तक 72,750 रुपए प्रति टन हो गई है।
पश्चिमी एशिया संकट से पहले कोल इंडिया के लिए अमोनियम नाइट्रेट की कीमतें अगस्त 2025 से जनवरी 2026 तक स्थिर थीं लेकिन एक मार्च, 2026 से इसमें लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। कंपनी ने शेयर बाजार को बताया कि अमोनियम नाइट्रेट की कीमतों में इस तेज वृद्धि का सीधा असर विस्फोटकों की लागत पर पड़ा है, जिसका उपयोग कोयले की परतों तक पहुंचने के लिए बड़ी मात्रा में किया जाता है। इसके चलते विस्फोटकों की औसत लागत फरवरी 2026 के 39,588 रुपए से 26 प्रतिशत बढ़कर मार्च के अंत तक 49,783 रुपए प्रति टन हो गई। कोल इंडिया की सहायक कंपनियां सालाना आधार पर लगभग नौ लाख टन विस्फोटकों की खपत करती हैं।
