सिनेपोलिस और कोका-कोला पर ₹85,000 का जुर्माना, पानी की बोतल बनी वजह
punjabkesari.in Friday, Oct 09, 2026 - 11:28 AM (IST)
पटनाः बिहार की राजधानी पटना में उपभोक्ता आयोग ने सिनेपोलिस सिनेमा और कोका-कोला कंपनी पर 85,000 रुपए का जुर्माना लगाया है। मामला सिनेमा हॉल में दर्शक को अपनी पानी की बोतल ले जाने से रोकने और परिसर के अंदर अधिक कीमत पर पैकेज्ड पानी खरीदने के लिए मजबूर करने से जुड़ा है।
यह आदेश शिकायतकर्ता रजत तिवारी द्वारा कंज्यूमर कोर्ट में केस दायर करने के लगभग एक दशक बाद आया है।
क्या है पूरा मामला?
शिकायतकर्ता ने 23 सितंबर 2016 को पटना के सिनेपोलिस सिनेमा हॉल में फिल्म पिंक देखने गए थे। थिएटर में प्रवेश के दौरान सुरक्षा कर्मचारियों ने उन्हें अपनी पानी की बोतल अंदर ले जाने से रोक दिया।
इसके बाद उन्हें सिनेमा परिसर में ही किनले (Kinley) की पानी की बोतल 50 रुपए में खरीदनी पड़ी, जबकि बाहर इसी बोतल का खुदरा मूल्य 20 रुपए था। इस घटना के बाद तिवारी ने अनुचित व्यापार व्यवहार का आरोप लगाते हुए उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने मानसिक परेशानी के लिए मुआवजे और कानूनी खर्च की मांग की थी।
कंपनियों ने क्या दलील दी?
सुनवाई के दौरान सिनेपोलिस ने दलील दी कि उत्पादों की कीमत तय करने में उसकी कोई भूमिका नहीं है। वहीं, कोका-कोला कंपनी ने कीमतों का बचाव करते हुए कहा कि उसकी मूल्य निर्धारण व्यवस्था माप विज्ञान संबंधी नियमों के अनुरूप थी।
हालांकि, आयोग के अध्यक्ष प्रेमरंजन मिश्रा और सदस्य रजनीश कुमार की पीठ ने दोनों कंपनियों की दलीलों को स्वीकार नहीं किया। आयोग ने दर्शक को बाहर से पानी लाने से रोकने और एक ही उत्पाद के लिए अलग-अलग कीमत वसूलने के मामले में दोनों कंपनियों को जिम्मेदार ठहराया।
₹85,000 का जुर्माना कैसे चुकाया जाएगा?
उपभोक्ता आयोग ने दोनों कंपनियों को भुगतान करने का निर्देश दियाः
- ₹25,000: रजत तिवारी को मानसिक परेशानी के मुआवजे के रूप में।
- ₹10,000: शिकायतकर्ता के कानूनी खर्च के लिए।
- ₹50,000: राज्य उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा करने के लिए।
आयोग ने निर्देश दिया कि यदि 45 दिनों के भीतर निर्धारित राशि जमा नहीं की जाती है, तो कुल रकम पर ब्याज लगाया जाएगा।
खाद्य और पेय पदार्थ विक्रेताओं को भी निर्देश
आयोग ने पैकेज्ड खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों की बिक्री करने वालों को सभी उत्पादों पर अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने और एक ही उत्पाद के लिए अलग-अलग कीमत वसूलने से बचने का निर्देश दिया।
यह मामला उपभोक्ताओं के अधिकारों और सिनेमा हॉल जैसे सार्वजनिक मनोरंजन स्थलों पर वस्तुओं की कीमतों को लेकर महत्वपूर्ण सवाल उठाता है।
