सावधान! पैकेट वहीं कीमत वहीं....लेकिन वजन कम, हैरान करेगा पूरा मामला
punjabkesari.in Wednesday, Jul 15, 2026 - 11:41 AM (IST)
बिजनेस डेस्कः महंगाई का असर अब केवल बढ़ती कीमतों तक सीमित नहीं रह गया है। बाजार में एक नई प्रवृत्ति तेजी से देखने को मिल रही है, जिसे अर्थशास्त्र की भाषा में 'श्रिंकफ्लेशन' (Shrinkflation) कहा जाता है। इसमें कंपनियां उत्पाद की कीमत पहले जैसी ही रखती हैं लेकिन उसकी मात्रा या वजन कम कर देती हैं। नतीजतन उपभोक्ता को पहली नजर में कीमत में कोई बदलाव नहीं दिखता, जबकि प्रति ग्राम या प्रति किलो के हिसाब से उसे अधिक कीमत चुकानी पड़ती है।
दिल्ली-एनसीआर के बाजारों, सुपरमार्केट और मॉल्स में कई ऐसे उत्पाद मिल रहे हैं, जिनकी पैकेजिंग पहले जैसी दिखती है लेकिन उनका वजन घट चुका है। पहले जहां 1 किलो के पैक उपलब्ध होते थे, वहीं अब 950 ग्राम, 900 ग्राम या 850 ग्राम के पैक बाजार में बिक रहे हैं। इसी तरह 500 ग्राम की जगह 450 ग्राम और 200 ग्राम की जगह 180 या 170 ग्राम के पैक भी आम हो गए हैं।
रोजमर्रा के सामान पर दिख रहा असर
इसका सबसे अधिक असर रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले पैक्ड फूड और घरेलू उत्पादों पर दिखाई दे रहा है। इनमें बिस्कुट, नमकीन, चिप्स, चॉकलेट, इंस्टेंट नूडल्स, चाय, कॉफी, मसाले, डिटर्जेंट, साबुन, शैंपू, खाद्य तेल, घी और आटे जैसे उत्पाद शामिल हैं।
वजन घटाओ, कीमत मत बढ़ाओ
दुकानदारों का कहना है कि कंपनियां कीमत बढ़ाने से बचने के लिए यह तरीका अपना रही हैं। यदि किसी उत्पाद की कीमत 55 रुपए से बढ़ाकर 65 रुपए कर दी जाए तो ग्राहक तुरंत प्रतिक्रिया देता है लेकिन उसी कीमत पर वजन कम होने पर अधिकांश लोग ध्यान नहीं देते। वहीं उपभोक्ता संगठनों का मानना है कि यह कानूनी रूप से गलत नहीं है, क्योंकि कंपनियां पैकेट पर वास्तविक वजन स्पष्ट रूप से लिखती हैं। हालांकि यह उपभोक्ताओं की खरीदारी की आदतों और मनोविज्ञान का लाभ उठाने वाली रणनीति है।
छिपी महंगाई का हो रहे शिकार
विशेषज्ञों का कहना है कि खरीदारी करते समय केवल कीमत नहीं, बल्कि नेट वेट, प्रति किलो कीमत, एमआरपी और पैकिंग विवरण भी ध्यान से देखना चाहिए। इससे उपभोक्ता यह समझ सकेंगे कि उन्हें वास्तव में उत्पाद की कितनी मात्रा मिल रही है और वे अनजाने में छिपी हुई महंगाई का शिकार बनने से बच सकते हैं।
