New MF rules from April 1st: म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए बड़ा बदलाव, 1 अप्रैल से लागू होंगे नए नियम
punjabkesari.in Saturday, Jan 17, 2026 - 12:10 PM (IST)
बिजनेस डेस्कः बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने म्यूचुअल फंड निवेशकों के हित में बड़े बदलावों का ऐलान किया है। ये बदलाव करीब 30 साल पुराने ढांचे को पूरी तरह नया रूप देने वाले हैं। सेबी ने बेस एक्सपेंस रेशियो (BER) का नया फ्रेमवर्क पेश किया है, जिसके तहत अब फंड हाउस को मैनेजमेंट फीस और सरकार को दिए जाने वाले टैक्स (GST और STT) को अलग-अलग दिखाना होगा।
अब तक फंड हाउस टोटल एक्सपेंस रेशियो (TER) के नाम पर सभी खर्च एक साथ दिखाते थे लेकिन नए नियमों से निवेशकों को यह साफ दिखेगा कि उनका पैसा कहां और कितना खर्च हो रहा है। ये नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे।
खर्च ज्यादा हुआ तो AMC देगी पैसा
सेबी ने साफ किया है कि म्यूचुअल फंड स्कीम से जुड़े सभी खर्च स्कीम से ही चुकाए जाएंगे और उनकी एक तय सीमा होगी। अगर किसी स्कीम का खर्च सेबी की तय सीमा से ज्यादा होता है, तो अतिरिक्त रकम निवेशकों से नहीं बल्कि AMC को अपनी जेब से देनी होगी। इससे निवेशकों के रिटर्न पर अनावश्यक बोझ नहीं पड़ेगा।
ब्रोकरेज चार्ज में कटौती
सेबी ने ट्रेडिंग लागत घटाने के लिए ब्रोकरेज चार्ज में भी बड़ी कटौती की है—
- कैश मार्केट में ब्रोकरेज 0.12% से घटाकर 0.06%
- डेरिवेटिव्स में 0.05% से घटाकर 0.02%
- साल 2018 से लागू 0.05% का अतिरिक्त एग्जिट लोड पूरी तरह खत्म
KYC प्रक्रिया होगी आसान
निवेशकों की सुविधा के लिए सेबी ने KYC प्रक्रिया को सरल बनाने का प्रस्ताव भी रखा है। अब ग्राहकों की अतिरिक्त जानकारियां KRA (KYC Registration Agency) के पास एक ही जगह सेंट्रलाइज रहेंगी, जिससे अलग-अलग ब्रोकरों या संस्थानों को बार-बार डॉक्यूमेंट देने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
इसके अलावा—
- आधार से लिंक मोबाइल नंबर और अपडेटेड PAN–Aadhaar होने पर अलग वेरिफिकेशन की जरूरत नहीं
- भारत में 182 दिन से ज्यादा रहने वाले OCI कार्ड धारकों को विदेशी पता देने से छूट
विदेशी निवेशकों के लिए नियम आसान
- विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सेबी ने SWAGAT-FI सिस्टम के तहत नियमों को और सरल किया है।
- अब अलग-अलग कैटेगरी के लिए अलग फॉर्म भरने की जरूरत नहीं
- FPI रजिस्ट्रेशन और KYC की वैधता 5 साल से बढ़ाकर 10 साल
- ये बदलाव जून 2026 से लागू होंगे
