‘क्या रक्षा बजट सुरक्षा चुनौतियों पर खरा उतरेगा’

punjabkesari.in Saturday, Feb 06, 2021 - 02:42 AM (IST)

बजट सत्र के पहले दिन केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में वर्ष 2020-21 का आर्थिक सर्वेक्षण पेश करते हुए कहा कि चालू वर्ष जी.डी.पी. में 7.7 प्रतिशत की गिरावट रहेगी जबकि वर्ष 2021-22 में जी.डी.पी. में 11 प्रतिशत की बढ़ौतरी होगी। क्योंकि आर्थिक सर्वेक्षण बजट को प्रभावित करता है इसलिए मुझे एक राष्ट्रीय चैनल के प्रसिद्ध पत्रकार ने आ घेरा तथा रक्षा बजट से संबंधित सवाल पूछने शुरू कर दिए। बातचीत के दौरान चैनल का केन्द्रबिन्दू यह रहा कि विदेशी एवं अंदरूनी खतरों, सशस्त्र सेनाओं की जरूरत तथा चुनौतियों को दिमाग में रखते हुए बजट के बारे में वित्त मंत्री से क्या उम्मीदें हैं? ऐसा प्रतीत हो रहा है कि जैसे देश की सुरक्षा को लेकर केवल मीडिया ही नहीं बल्कि सारा समाज ही चिंतित है। 

इसमें कोई संदेह की बात नहीं कि कोरोना महामारी ने केवल अपने देश की अर्थव्यवस्था को ही प्रभावित नहीं किया बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में भी 4.4 प्रतिशत गिरावट आने का खतरा है। विकसित देशों की अर्थव्यवस्था को कोविड-19 ने बहुत नुक्सान पहुंचाया है। इसके बावजूद चीन विस्तारवाद तथा हमलावर नीति को आगे बढ़ा रहा है। 

3488 कि.मी. वाली एल.ए.सी. में बदलाव में मंतव्य के साथ कभी पूर्वी लद्दाख में झड़पें, कभी सिक्किम तथा अरुणाचल प्रदेश के क्षेत्रों तथा कभी भूटान के साथ लगते सांझे बार्डर की ओर चीन की निगाहें टिकी रहती हैं। नेपाल में तो उसने अपनी पकड़ मजबूत कर रखी है। म्यांमार, बंगलादेश, श्रीलंका तथा दक्षिण एशिया के कुछ अन्य देशों को अपने घेरे में लेने के लिए चीन प्रयत्नशील है। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि पेइचिंग किसी दूरअंदेशी वाले मनोरथ से शतरंज की चालें चल रहा है। दूसरी ओर पाकिस्तान ने भीतर बगावतों तथा लडख़ड़ाती अर्थव्यवस्था के बावजूद छद्म युद्ध छेड़ रखा है। इतनी ढेर सारी सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए क्या रक्षा बजट कसौटी पर खरा उतरेगा। 

वित्त मंत्री ने 1 फरवरी को वित्तीय वर्ष 2021-22 का बजट जो संसद में पेश किया उसके अनुसार रक्षा बजट हेतु 4.78 लाख करोड़ रुपए राशि की व्यवस्था की गई। जिस पर खुश होकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को यह भी कहा कि बजट में कैपिटल हैड के अन्तर्गत 19 प्रतिशत तक की बढ़ौतरी गत 15 सालों में सबसे ज्यादा है। हम रक्षा मंत्री से सब ओर से सहमत हैं मगर शायद यह पहली बार है कि पैंशन बजट में कटौती भी कर दी गई। वित्तीय वर्ष 2021-22 का कुल रक्षा बजट (पैंशन सहित) 4,78,195.62 करोड़ निर्धारित किया गया। जोकि वर्ष 2020-21 में  4,71,327.00 करोड़ था। यानी कि कुल 6,823.62 करोड़ की वृद्धि थी जोकि केवल 1.4476 प्रतिशत ही बनता है (डेढ़ फीसदी से भी कम)। 

पैंशन बजट 1,15,850 करोड़ तय किया गया जो कि चालू वित्त वर्ष के लिए 1,33,819 करोड़ था यानी कि करीब अब 18 हजार करोड़ कम रहेगा। यदि पैंशन बजट को कुल बजट में से कम करके देखा जाए तो कुल बजट 3,62,345 करोड़ ही बचता है जोकि वर्ष 2020-21 के बजट से केवल 7.4 फीसदी बढ़ा। इसकी महंगाई में ही खपत हो जाएगी। पूंजीगत बजट 1,35,060 करोड़ होगा जोकि चालू वित्त वर्ष के 1,13,734 करोड़ से 18.72 प्रतिशत ज्यादा। मेरे कहने का तात्पर्य यह है कि पैंशन कम करने का फायदा कैपिटल फंड को ही पहुंचा है। कैपिटल हैड : इस पूंजीगत हैड के अन्तर्गत सुरक्षा जरूरतों के लिए सशस्त्र सेनाओं के आधुनिकीकरण को मुख्य रखते हुए हथियार, यंत्र, उपकरण, साजो-सामान, संचार साधन की खरीदारी तथा निर्माण और बुनियादी ढांचे का खर्चा जैसे कि सेवा में रहने वाले लोगों के परिवारों के लिए रिहायशी मकान के निर्माण के लिए भी पूंजीगत हैड के अन्तर्गत आते हैं। 

वर्णनीय है कि हथियारों की प्राप्ति पहले से स्वीकृत परियोजनाओं की अदायगी जैसे कि 36 राफेल लड़ाकू विमानों की प्राथमिक कीमत 60 हजार करोड़, सबमरीन प्रोजैक्ट के लिए 40 हजार करोड़, एंटी-टैंक मिसाइल के लिए 1200 करोड़, एस-400 एआर डिफैंस मिसाइल सिस्टम के लिए 4500 करोड़, आकाश मिसाइल के लिए 900 करोड़, नौसेना के लिए 111 यूटीलिटी हैलीकाप्टर के लिए 21,738 करोड़, ब्रह्मोस मिसाइल के लिए 3000 करोड़, के-9 वज्र तोपों जोकि 4,366 करोड़ की लागत से दक्षिण कोरिया के साथ सौदा हो चुका है, इसी तरीके से 145-एम 777 अल्ट्रा लाइट होवित्जर तोपें अमरीका से आनी हैं जिसके लिए 1000 करोड़ राशि की जरूरत पड़ेगी। 

बाज वाली नजर : उल्लेखनीय है कि रक्षा मामलों से संबंधित संसद की स्थायी कमेटी की ओर से 13 मार्च 2020 को जो रिपोर्ट संसद के पटल पर रखी उसमें यह स्पष्ट किया गया कि जिस तरीके से पाकिस्तान तथा चीन अपनी सैन्य शक्ति को बढ़ाने में लगे हैं उसके मद्देनजर ज्यादा फंडों की आवश्यकता होगी। स्मरण रहे कि जब पी.एल.ए. ने लद्दाख में घुसपैठ करनी शुरू की तो हलचल मच गई थी, फिर जल्दबाजी में एमरजैंसी के तौर पर सरकार ने 20,776 करोड़ का अतिरिक्त बजट सेना को मुहैया करवाया जोकि कमेटी की सिफारिशों को सही सिद्ध करता है।-ब्रिगे. कुलदीप सिंह काहलों (रिटा.)
 


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Recommended News

Related News