हम भारत के लोग और हमारी हमेशा रहने वाली जिम्मेदारी
punjabkesari.in Monday, Jan 26, 2026 - 07:29 AM (IST)
भारत के पहले राष्ट्रपति, डा. राजेंद्र प्रसाद ने 16 मई, 1952 को पहली लोकसभा को संबोधित करते हुए संसद के सदस्यों को उनकी लोकतांत्रिक जिम्मेदारियों की गंभीरता की याद दिलाई। उन्होंने यह साफ किया कि संविधान लागू होने, राष्ट्रपति के चुनाव और पहले आम चुनावों के साथ, आजाद भारत की लोकतांत्रिक यात्रा का पहला चरण पूरा हो गया था और देश अब दूसरे चरण में जा रहा है, जिसमें कोई रुकावट नहीं आएगी। उनके अनुसार, लोकतांत्रिक यात्रा का दूसरा चरण तभी सफल होगा जब राज्य और शासन व्यवस्था लोगों की उम्मीदों को पूरा करने के लिए पूरी तरह समर्पित होगी।
लोकतंत्र की एक परिभाषा के अनुसार, डैमोक्रेसी का मतलब है ‘लोगों का, लोगों द्वारा और लोगों के लिए’। हमारे संविधान की प्रस्तावना में साफ तौर पर कहा गया है कि हमारे देश में सम्प्रभुता लोगों के पास है और यह संविधान भारत के लोगों ने अपने लिए बनाया है। इसलिए, संविधान को अपनाने के साथ ही ‘लोगों का’ सिद्धांत साकार हुआ।
दूसरा सिद्धांत : ‘लोगों द्वारा’ साल 1952 में पहले आम चुनावों के साथ स्थापित हुआ, जब लोकसभा और विधानसभाओं के सदस्य वयस्क मताधिकार के आधार पर चुने गए। लेकिन लोकतंत्र का तीसरा जरूरी सिद्धांत-‘लोगों के लिए’ एक लगातार चलने वाला प्रोसैस है, जिसके बारे में डा. राजेंद्र प्रसाद ने बात की थी जब उन्होंने दूसरी स्टेज की यात्रा में कोई रुकावट न आने की बात कही थी। इन सभी बातों से यह बिल्कुल साफ हो जाता है कि संविधान और लोकतंत्र के पूरे सिस्टम के केंद्र में ‘हम भारत के लोग’ हैं और उनकी सामाजिक और आॢथक तरक्की ही लक्ष्य है। यह लक्ष्य हमेशा से भारत की राजनीतिक चेतना का एक अहम हिस्सा रहा है। प्राचीन भारत में, ‘योग-शेम’ का सिद्धांत व्यक्ति की भलाई और सुरक्षा से जुड़ा था। महात्मा गांधी के ‘सर्वोदय’ के विचार के केंद्र में भी सभी का उत्थान है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय के ‘अखंड मानवतावाद’ और ‘अंत्योदय’ के सिद्धांत भी व्यक्ति के समग्र विकास और वंचित वर्गों के उत्थान पर ध्यान केंद्रित करते हैं। नागरिकों को विकास के केंद्र में रखने की यह परंपरा वर्तमान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘सबका साथ, सबका विकास’ की नीति में भी शामिल है।
संविधान में शामिल नीति निर्देशक सिद्धांतों के तहत, राज्य की जिम्मेदारी है कि वह काम करने वालों के लिए मानवीय और न्यायपूर्ण हालात सुनिश्चित करे। इसी दिशा में काम करते हुए, केंद्र सरकार ने हाल ही में 29 लेबर कानूनों को मिलाकर 4 लेबर कोड बनाए हैं। यह काम करने वालों को बेहतर आॢथक और सामाजिक सुरक्षा देने की दिशा में एक बड़ा कदम है। पिछले कुछ सालों में लिए गए कई अहम पॉलिसी फैसलों की वजह से, सभी स्तरों पर मौकों की यह समानता बढ़ी है। इसका एक बड़ा उदाहरण स्टार्टअप इंडिया पहल है, जिसने हाल ही में 10 साल पूरे किए हैं। इसके तहत दिए गए पॉलिसी सपोर्ट, फाइनांशियल मदद और मैंटरशिप से आज किसी के लिए भी इंडस्ट्री शुरू करना बहुत आसान हो गया है। आॢथक विकास तभी सबको साथ लेकर चलने वाला बनता है, जब मौके की समानता हो। यह इंकम में असमानता को कम करने में अहम भूमिका निभाता है। पिछले 12 सालों में सभी इकोनॉमिक पॉलिसीज इसी आइडिया से प्रेरित रही हैं।
वल्र्ड बैंक के सिप्रिंग 2025 पॉवर्टी एंड इक्विटी ब्रीफ के मुताबिक, भारत ने पिछले दशक में 171 मिलियन लोगों को ‘बहुत ज्यादा गरीबी’ से बाहर निकाला है। रिजर्वेशन का फायदा सामाजिक रूप से पिछड़े और आॢथक रूप से कमजोर तबके को भी मिला है। राइट्स ऑफ पर्सन्स विद डिसेबिलिटीज एक्ट, 2016 और मुस्लिम महिला (शादी पर अधिकारों का संरक्षण) एक्ट, 2019 जैसे कानूनों के जरिए सामाजिक न्याय को और मजबूत किया गया है। इज्जतदार जिंदगी सुनिश्चित करने की इस भावना का एक बड़ा उदाहरण स्वच्छ भारत मिशन है। यह सिर्फ सफाई पर फोकस करने वाली पहल नहीं थी, बल्कि उन करोड़ों लोगों की इज्जत वापस लाने की भी कोशिश थी, जो दशकों से खुले में शौच करने को मजबूर थे। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत 80 करोड़ से ज्यादा लोगों को मुफ्त अनाज दिया जा रहा है। साथ ही, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना मुश्किल समय में लाखों भारतीय परिवारों के लिए उम्मीद की किरण बनकर उभरी है। इस योजना के 53 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएं हैं, और 72 प्रतिशत से ज्यादा ग्रामीण भारत से आते हैं। यह सामाजिक सुरक्षा का सबको साथ लेकर चलने का सबूत है।
जब प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ का आह्वान किया, तो यह सिर्फ आॢथक स्तर तक सीमित नहीं था, बल्कि नागरिकों में आत्मनिर्भरता की भावना को बढ़ाने की भी एक कोशिश थी। इसलिए, मुद्रा योजना और स्किल इंडिया मिशन जैसी पहलों के जरिए नागरिकों को आत्मनिर्भर और उद्यमी बनाने पर जोर दिया गया है। इससे आॢथक रूप से कमजोर तबके के लोगों को बहुत फायदा हुआ है, जो पैसे की कमी की वजह से अच्छी हैल्थकेयर से दूर थे। इसी तरह ‘जन धन योजना’ ने बड़ी संख्या में नागरिकों को सामान्य बैंकिंग से जोड़कर वित्तीय सुरक्षा दी है। ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण दिया है।
एक गणतांत्रिक प्रणाली की मजबूती सिर्फ इस बात पर ही निर्भर नहीं करती कि उसके इंस्टीच्यूशंस कितने मजबूत और लंबे समय तक चलने वाले हैं, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करती है कि शासन प्रणाली लोगों की जिंदगी में किस तरह का बदलाव लाती है। हमें याद रखना चाहिए कि भारतीय गणतंत्र का सफर जारी रहना चाहिए। यह 77वां गणतंत्र दिवस न सिर्फ इस जिम्मेदारी को याद करने का मौका है, बल्कि यह भी तय करने का मौका है कि ‘हम, भारत के लोग,’ अपने लाकतांत्रिक और गणतांत्रिक मूल्यों को और गहराई से अपनाएंगे, उन्हें अमल में लाएंगे और यह पक्का करेंगे कि लोग और उनकी भलाई शासन के हर पहलू में और हर फैसले के केंद्र में सबसे ऊपर रहें।-राजनाथ सिंह(केंद्रीय रक्षा मंत्री)
