नवाचार, समावेशन और भारत की प्रगति को गति देते हैं ‘स्टार्टअप’
punjabkesari.in Friday, Jan 16, 2026 - 05:23 AM (IST)
स्टार्टअप इंडिया पहल पूरे देश में एक समग्र और नई सोच वाले इकोसिस्टम के रूप में विकसित हुई है। यह युवाओं की उद्यमशील ऊर्जा को रोजगार सृजन और आॢथक विकास को तेज करने की दिशा में लगाकर, माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के मिशन को साकार करने का मार्ग तैयार कर रही है।
भारत में आज दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम में से एक मौजूद है। यह परिवर्तन रातों-रात नहीं हुआ। जब प्रधानमंत्री ने 2015 में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से ‘स्टार्टअप इंडिया’ की घोषणा की, तब उन्होंने एक स्पष्ट और महत्वाकांक्षी दृष्टि रखी कि उद्यमिता देश के हर जिले और हर ब्लॉक तक पहुंचे। 16 जनवरी, 2016 को उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डी.पी.आई.आई.टी.) की ओर से शुरू किए जाने के बाद से स्टार्टअप देश की अर्थव्यवस्था के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नई ऊर्जा भर रहे हैं। आई.टी. सेवाएं, स्वास्थ्य और जीवन विज्ञान, शिक्षा, कृषि और निर्माण जैसे क्षेत्रों में सबसे अधिक स्टार्टअप सक्रिय हैं। इसके अलावा, जलवायु तकनीक और अवसंरचना सहित 50 से अधिक अन्य उद्योगों में भी नए उद्यम सामने आए हैं।
नवाचार और ए.आई. : वैश्विक नवाचार सूचकांक में भारत का रैंक 2015 में 81वें स्थान से बढ़कर पिछले वर्ष 38वें स्थान पर पहुंच गया और गहन तकनीक से जुड़े स्टार्टअप्स को सरकार का समर्थन इसे आगे और बेहतर करेगा। गहन तकनीक वाला राष्ट्र बनाने के प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण के तहत नैशनल रिसर्च फाऊंडेशन की स्थापना तथा इंडिया ए.आई. मिशन और रिसर्च डिवैल्पमैंट एंड इनोवेशन योजना की शुरुआत की गई है। भारत के स्टार्टअप एयरोनॉटिक्स, एयरोस्पेस और रक्षा, रोबोटिक्स, हरित तकनीक, इंटरनैट ऑफ थिंग्स और सैमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में भी नवाचार कर रहे हैं। भारतीय स्टार्टअप्स ने 16,400 से अधिक नए पेटैंट आवेदन दाखिल किए हैं, जो मौलिक नवाचार, दीर्घकालिक मूल्य सृजन और वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर बढ़ते फोकस को दर्शाता है।
अखिल भारतीय विकास : वर्ष 2016 में केवल 4 राज्यों में स्टार्टअप नीतियां थीं, जबकि आज भारत के 30 से अधिक राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में विशेष स्टार्टअप ढांचे मौजूद हैं। अब तक 2 लाख से अधिक स्टार्टअप्स को मान्यता दी जा चुकी है, जो नीति-आधारित पारिस्थितिकी तंत्र के एक दशक के सतत् विकास को दर्शाता है। केवल 2025 में ही 49,400 से अधिक स्टार्टअप्स को मान्यता मिली, जो स्टार्टअप इंडिया की शुरुआत के बाद सबसे अधिक वाॢषक वृद्धि है।
समावेशन इस पूरी यात्रा की एक मजबूत आधारशिला रहा है। महिला नेतृत्व वाले उद्यम एक बड़ी ताकत बनकर उभरे हैं, जहां 45 प्रतिशत से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में कम से कम 1 महिला निदेशक है। इसके अलावा, लगभग आधे स्टार्टअप गैर-मैट्रो शहरों में स्थित हैं, जो नवाचार और रोजगार के नए केंद्र के रूप में टियर-2 और टियर-3 शहरों की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
लोकल से ग्लोबल : जैसे-जैसे भारतीय स्टार्टअप्स का विस्तार हो रहा है, पूरी दुनिया उनके लिए बाजार बनती जा रही है। अब 21 अंतरराष्ट्रीय ब्रिज और 2 रणनीतिक गठबंधन मौजूद हैं, जो यू.के., जापान, दक्षिण कोरिया, स्वीडन और इसराईल सहित प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बाजार तक पहुंच, सहयोग और विस्तार को आसान बनाते हैं। इन पहलों से अब तक 850 से अधिक स्टार्टअप्स लाभान्वित हो चुके हैं।
सुधार और बाजार तक पहुंच : इस विकास को संभव बनाने में कारोबार करने में आसानी में सुधार एक मुख्य आधार रहा है। पात्र स्टार्टअप अपने पहले 10 वर्षों में से किन्हीं भी 3 लगातार वर्षों के लिए कर अवकाश का लाभ ले सकते हैं। अब तक 4,100 से अधिक स्टार्टअप्स को इसके लिए पात्रता प्रमाणपत्र मिल चुके हैं। 60 से अधिक नियामकीय सुधारों के माध्यम से अनुपालन का बोझ कम किया गया है, पूंजी जुटाने को आसान बनाया गया है और घरेलू संस्थागत निवेश को मजबूत किया गया है। एंजेल टैक्स को समाप्त करने और वैकल्पिक निवेश कोषों (ए.टी.एफ.) के लिए दीर्घकालिक पूंजी के रास्ते खोलने से स्टार्टअप फंङ्क्षडग का पारिस्थितिकी तंत्र और सशक्त हुआ है। बाजार तक पहुंच को प्राथमिकता दी गई है। सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जैम) के माध्यम से 35,700 से अधिक स्टार्टअप्स को जोड़ा गया है, जिन्हें 51,200 करोड़ से अधिक मूल्य के 5 लाख से ज्यादा ऑर्डर मिले हैं। स्टार्टअप्स के लिए फंड ऑफ फंड्स योजना के तहत वैकल्पिक निवेश कोषों के जरिए 25,500 करोड़ से अधिक का निवेश किया गया है, जिससे 1,300 से अधिक उद्यमों को लाभ मिला है। इसके अलावा, स्टार्टअप्स के लिए क्रैडिट गारंटी योजना के अंतर्गत 800 करोड़ से अधिक के बिना जमानत ऋण की गारंटी दी गई है।
सांस्कृतिक बदलाव : भारतीय स्टार्टअप्स देश में एक बड़ा सांस्कृतिक परिवर्तन लाए हैं। पहले बच्चों को मुख्य रूप से सरकारी नौकरी, इंजीनियरिंग या चिकित्सा जैसे कुछ ही क्षेत्रों में जाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता था। आज कई युवा नौकरी तलाशने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बनने का सपना देख रहे हैं।-पीयूष गोयल (केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री)
