भारतीय शहरों की स्थिति बेहद दयनीय

punjabkesari.in Wednesday, Jun 29, 2022 - 05:19 AM (IST)

हाल  ही में ‘द इकॉनोमिस्ट’ मैगजीन के सालाना इंटरनैशनल लिवेबिलिटी सूचकांक में ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना दुनिया में रहने के लिए सबसे अच्छे शहरों की सूची में अव्वल रही। दुर्भाग्य से इस सूची के शीर्ष 100 शहरों में भारत के किसी शहर का नाम नहीं है। कुल 173 शहरों की सूची में दिल्ली 112वें और मुंबई 117वें स्थान पर है। दुनिया के 10 शीर्ष शहरों में सबसे ज्यादा 6 शहर यूरोपीय देशों के हैं। 10वें स्थान पर संयुक्त रूप से जापान का ओसाका और ऑस्ट्रेलिया का मेलबर्न है। सीरिया की राजधानी दमिश्क सूची में सबसे नीचे है। 

उल्लेखनीय है कि इकॉनोमिस्ट इंटैलीजैंस यूनिट की रिपोर्ट के मुताबिक शहरों की रैंकिंग राजनीतिक और सामाजिक स्थिरता, अपराध, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच समेत कई कारकों के आधार पर की गई। शीर्ष रहे वियना शहर के मुख्य आकर्षण में स्थायित्व और आधारभूत संरचना शामिल है। वहीं, अच्छी स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ-साथ संस्कृति और मनोरंजन की दृष्टि से यह शहर काफी समृद्ध है। 50 प्रतिशत हरियाली व पार्क क्षेत्र से घिरा यह शहर पर्यावरण के प्रति संजीदा है। झरने, झीलें और नहरें इसकी सुंदरता में चार चांद लगाती हैं। 

वियना में व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सुरक्षा के खास प्रबंध हैं। स्वास्थ्य सेवा के रूप में ई-कार्ड की उच्च स्तरीय सुविधा होने से 90 प्रतिशत लोग सरकारी अस्पतालों में ही इलाज कराते हैं। निजी अस्पतालों में इलाज के लिए सरकारी अनुदान का भी प्रावधान है। आर्थिक सुरक्षा और आजीविका के बेहतर विकल्प उपलब्ध होने के कारण यहां बेरोजगारी दर न के बराबर है। बच्चों के लिए सरकारी शिक्षा नि:शुल्क है। 

इस रिपोर्ट के मद्देनजर हमें गहराई से सोचने की जरूरत है कि स्मार्ट सिटी और स्वच्छ भारत अभियान जैसी योजनाओं पर लाखों-करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी देश का कोई एक शहर भी हम ऐसा नहीं बना पाए, जो शीर्ष 10 न सही, पर शीर्ष 100 बेहतरीन शहरों में अपनी जगह बना पाता। भारत के लिए चिंतित होने वाली बात यह भी है कि इस साल 22 मार्च को स्विस संगठन आई.क्यू.एयर ने प्रदूषण को लेकर एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें कहा गया था कि 2021 में दिल्ली दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी थी।

दिल्ली लगातार चौथे साल दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी बनकर उभरी और बीते वर्ष सबसे खराब वायु गुणवत्ता वाले विश्व के 50 शहरों में से 35 शहर भारत में थे। उस रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 में भारत का कोई भी शहर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित वायु गुणवत्ता मानक (5 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर पी.एम.2.5 सांद्रता) पर खरा नहीं उतर सका था। 

इसके अलावा 80 लाख से अधिक आबादी वाले दुनिया के 404 शहरों में ट्रैफिक जाम की हालिया ग्लोबल लोकेशन टैक्नोलॉजी रिपोर्ट के मुताबिक राजधानी दिल्ली में ट्रैफिक जाम फिर से बढऩे लगा है। कोरोना के बाद गाइडलाइन्स में हुए बदलाव से ट्रैफिक जाम कोविड पूर्व की स्थिति में आने लगा है।

ऐसे में 2021 के दौरान दिल्ली जाम के मामले में दुनिया का 11वां सबसे बड़ा शहर हो गया है। इससे पिछले साल दिल्ली शहर रैंकिंग में 8वें पायदान पर था। मुंबई और बेंगलुरु ऊपर के 10 शहरों में शामिल हैं। मुंबई 5वें, बेंगलुरु 10वें, जबकि पुणे 21वें स्थान पर है। ट्रैफिक जाम की स्थिति का अंदाजा इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि मुंबई में इसके कारण हर साल एक व्यक्ति के औसत 121 घंटे बर्बाद हो जाते हैं। बेंगलुरु व दिल्ली में खराब होने वाले घंटों की संख्या 110-110 है और पुणे में एक साल में औसतन 96 घंटे व्यक्ति सड़क पर जाम में व्यर्थ कर देता है। 

भारत की जनसंख्या का लगभग 31 प्रतिशत शहरों में बसता है और इनका सकल घरेलू उत्पाद में 63 प्रतिशत योगदान है। म्मीद है कि वर्ष 2030 तक शहरी क्षेत्रों में भारत की आबादी का 40 प्रतिशत रहेगा और भारत के सकल घरेलू उत्पाद में इसका योगदान 75 प्रतिशत होगा। इसके लिए भौतिक, संस्थागत, सामाजिक और आॢथक बुनियादी ढांचे के व्यापक विकास की आवश्यकता है। मौजूदा रिपोर्ट से हमारे पर्यटन पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।

कंपनियां यहां आने से कतरा सकती हैं और दुनिया भर में रह रहे भारतीयों के प्रति सम्मानजनक नजरिए को भी ठेस पहुंच सकती है। अत: संभलना जरूरी है। शीर्ष शहरों से सबक लेकर हमें स्थितियां बेहतर करनी होंगी। जाहिर है यह काम एक-दो दिन में नहीं होगा, लेकिन हमें इस दिशा में चलने की शुरूआत करनी होगी, जिससे परिस्थितियों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।-देवेन्द्रराज सुथार 
 


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