‘मोबाइल के जाल में फंसते छात्र-छात्राएं’ इस्तेमाल पर रोक लगाना जरूरी!

punjabkesari.in Tuesday, Mar 24, 2026 - 05:20 AM (IST)

हालांकि मोबाइल फोन के अनेक लाभ हैं परंतु इसके जाल में फंसने वाले छात्र-छात्राओं द्वारा इसके अनुचित इस्तेमाल से कई तरह की समस्याएं पैदा होने के कारण दुनिया भर में स्कूली बच्चों के मोबाइल फोन इस्तेमाल को लेकर चिंता बढ़ रही है। अश्लीलता का प्रसार करने और लोगों, विशेषकर बच्चों के हाथ में मोबाइल आने से उनमें ‘पोर्न’ देखने तथा अन्य अपराध करने की प्रवृत्ति में भारी वृद्धि हो रही है। यहां तक कि सोशल मीडिया पर पोर्न देख कर बच्चों द्वारा बलात्कार किए जाने तक की घटनाएं हो चुकी हैं। इसी कारण अनेक देशों ने बच्चों द्वारा मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया है जिनमें से चंद देश निम्न में दर्ज हैं :

* ब्रिटेन के शिक्षा मंत्रालय ने छात्रों के व्यवहार और पढ़ाई पर एकाग्रता को बेहतर बनाने के लिए स्कूलों में मोबाइल फोनों के इस्तेमाल पर पूर्ण रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। इस आदेश के उल्लंघन पर न सिर्फ छात्र का मोबाइल फोन जब्त कर लेने का निर्देश दिया गया है, बल्कि इस आदेश का पालन यकीनी बनाने के लिए अध्यापकों को बच्चों के बैग सख्तीपूर्वक जांचने का अधिकार भी दिया गया है। 
* स्पेन सरकार ने भी अब बच्चों को 14 की बजाय 16 वर्ष की उम्र तक पहुंचने के बाद ही सोशल मीडिया इस्तेमाल करने की इजाजत देने का फैसला किया है। इसके अलावा स्पेन सरकार ने कुछ ऑनलाइन गेम्स पर भी सख्त कानून की योजना बनाई है।
* नार्वेजियन मीडिया रिपोर्टों के अनुसार 10 वर्ष की आयु तक पहुंचते-पहुंचते अधिकांश बच्चे सोशल मीडिया इस्तेमाल करने लगते हैं। इसी कारण सरकार ङ्क्षचतित है कि इतनी कम उम्र में बच्चे वर्चुअल दुनिया के गुलाम बनते जा रहे हैं, जिसे तुरंत रोकने की आवश्यकता है।
* बच्चों को ऑनलाइन धोखाधड़ी और बुरे प्रभाव से बचाने के लिए जर्मनी में 16 वर्ष से कम आयु  के बच्चों को सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने के लिए अपने माता-पिता की सहमति लेनी होती है। 
* इटली में मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने के लिए 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए अपने माता-पिता की अनुमति लेना आवश्यक है।

* चीन में सोशल मीडिया और इंटरनैट पर सबसे सख्त नियंत्रण है। वहां की सरकार बच्चों को अनुशासित और देशभक्त नागरिक बनाने के लिए उनका डिजीटल जीवन भी नियंत्रित करती है।
चीन में 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को सप्ताह में मात्र 3 घंटे ऑनलाइन गेम्स खेलने की इजाजत है। साथ ही सोशल मीडिया और उस पर डाली जाने वाली सामग्री (कंटैंट) की कड़ी निगरानी की जाती है। 
* आस्ट्रेलिया, फ्रांस तथा कुछ अन्य देशों में कई सोशल मीडिया प्लेटफाम्र्स या तो प्रतिबंधित हैं या उन पर कड़ी निगरानी रखी जाती है। म्यांमार और उत्तर कोरिया में इंटरनैट और सोशल मीडिया पर लगभग पूर्ण प्रतिबंध है।
ऐसे हालात में ‘यूनेस्को’ के ‘वैश्विक शिक्षा निगरानी दल’ (जी.ई.एम.) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि क्लास में ध्यान कम होना, ऑनलाइन उत्पीडऩ और डिजीटल माध्यमों का बच्चों पर बढ़ता असर देखते हुए दुनिया के आधे से अधिक देशों के स्कूलों में मोबाइल फोनों के इस्तेमाल पर राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंध लागू कर दिया गया है। जून, 2023 में केवल 24 प्रतिशत देशों में ही यह प्रतिबंध लागू था, जो 2025 में बढ़कर 40 प्रतिशत और मार्च, 2026 तक बढ़ कर 58 प्रतिशत हो गया है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि सोशल मीडिया का बच्चों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

भारत में भी कर्नाटक तथा हिमाचल प्रदेश आदि चंद राज्यों ने स्कूलों में छात्रों द्वारा मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया है, परंतु इतना ही काफी नहीं है, समूचे देश में ही किशोर-किशोरियों द्वारा मोबाइल फोनों के इस्तेमाल पर रोक लगाने की तुरंत आवश्यकता है ताकि छात्र-छात्राओं को सोशल मीडिया के इस्तेमाल के बुरे प्रभावों से बचाया जा सके।-विजय कुमार 


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