भारत की वैश्विक यात्रा और हमारी सामूहिक जिम्मेदारी
punjabkesari.in Monday, Feb 23, 2026 - 04:14 AM (IST)
पिछले कुछ दिनों में दिल्ली ने यातायात की भारी अव्यवस्था का सामना किया है। जब वी.आई.पी. गण्यमान्य अपने आयोजन स्थल के लिए निकले, तो हमें घंटों इंतजार करना पड़ा। हमें अपने देश में होने वाले इन आयोजनों पर गर्व है, इसलिए यहां-वहां की थोड़ी-बहुत अव्यवस्था पर कोई शिकायत नहीं है।
भारत आज अपनी यात्रा के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। पिछले एक दशक में देश ने आॢथक शक्ति, वैश्विक प्रभाव और तकनीकी आत्मविश्वास में लगातार वृद्धि की है। मुख्य रूप से एक विकासशील राष्ट्र के रूप में देखे जाने से लेकर अब भारत एक गंभीर वैश्विक खिलाड़ी बन गया है। दुनिया भारत को न केवल उसकी जनसंख्या के आकार के कारण, बल्कि उसके विचारों, उसके बाजारों और उसकी भविष्य की संभावनाओं के लिए देख रही है। इस वैश्विक महत्व का एक स्पष्ट संकेत भारत द्वारा प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रमों की मेजबानी करना है। जब भारत ने नई दिल्ली में जी20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी की, तो शक्तिशाली देशों के नेता आए, वैश्विक मीडिया ने इस कार्यक्रम को कवर किया और भारत ने खुद को आत्मविश्वासी और संगठित रूप में प्रस्तुत किया। ऐसे आयोजन केवल बैठकों और भाषणों के बारे में नहीं होते। ये छवि, भरोसे और अवसर के बारे में होते हैं।
अब, जब आर्टिफिशियल इंटैलिजैंस (ए.आई.) को लेकर वैश्विक चर्चाएं भविष्य के लिए केंद्रीय होती जा रही हैं, तो ए.आई. सम्मेलनों की मेजबानी और उनमें भागीदारी करने में भारत की भूमिका यह दर्शाती है कि वह कितनी दूर आ गया है। ए.आई. केवल तकनीकी कंपनियों के बारे में नहीं है, यह नौकरियों, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है। जब भारत वैश्विक मंच पर ए.आई. के बारे में बात करता है, तो वह अपने युवाओं के भविष्य की बात कर रहा होता है। हमारे पास इंजीनियरों और तकनीकी पेशेवरों का सबसे बड़ा समूह है। बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे शहर तकनीकी केंद्र बन गए हैं। भारतीय स्टार्टअप वैश्विक निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं। डिजिटल भुगतान का तेजी से विस्तार हुआ है। सरकारी सेवाएं अधिक तकनीक-संचालित हो रही हैं। यह सब एक ऐसे राष्ट्र की छवि बनाता है जो आधुनिक, दूरदर्शी और महत्वाकांक्षी है, जिससे हमारे युवाओं को आत्मविश्वास मिलता है।
इस तरह का विकास सकारात्मकता लाता है। भारतीय छात्र वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। हालांकि, इन सबके साथ जिम्मेदारी भी आती है। जब भारत ए.आई. शिखर सम्मेलन जैसे वैश्विक कार्यक्रमों की मेजबानी करता है, तो पूरी दुनिया न केवल सरकार को, बल्कि पूरे राष्ट्र को देख रही होती है। यहीं पर राजनीतिक व्यवहार महत्वपूर्ण हो जाता है। भारत एक लोकतंत्र है और विपक्षी दलों को सरकार से सवाल करने का पूरा अधिकार है। बहस स्वस्थ है। आलोचना आवश्यक है। विरोध प्रदर्शन लोकतांत्रिक जीवन का हिस्सा हैं लेकिन समय और लहजा बहुत मायने रखता है।
जब प्रमुख वैश्विक कार्यक्रम हो रहे हों, तो निरंतर शोर-शराबा, आक्रामक विरोध और सार्वजनिक राजनीतिक नाटक विदेशी आगंतुकों को भ्रमित करने वाले संकेत भेज सकते हैं, जो शर्मनाक भी हो सकता है। विदेशी निवेशक अक्सर राजनीतिक स्थिरता की तलाश करते हैं। वे जानना चाहते हैं कि नीतियां जारी रहेंगी। वे जानना चाहते हैं कि व्यापारिक माहौल अनुमानित है। यदि वैश्विक कार्यक्रमों के दौरान सुर्खियां शिखर सम्मेलन की बजाय राजनीतिक टकरावों पर अधिक केंद्रित होती हैं, तो यह ध्यान भारत की उपलब्धियों से हटा देती हैं। नवाचार, स्टार्टअप और वैश्विक सांझेदारी पर चर्चा करने की बजाय, चर्चा घरेलू राजनीतिक संघर्ष की ओर मुड़ जाती है। लोकतंत्र में रचनात्मक आलोचना और निरंतर व्यवधान के बीच अंतर होता है। परिपक्व लोकतंत्र अक्सर अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों के दौरान एक एकजुट चेहरा दिखाते हैं, भले ही पर्दे के पीछे आंतरिक बहस जारी रहे। जब दुनिया देख रही हो, तो ध्यान भारत की ताकत पर रहना चाहिए। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद, राजनीतिक लड़ाई संसद और सार्वजनिक मंचों पर जारी रह सकती है।
भारत के युवाओं को विशेष रूप से एक सकारात्मक वातावरण की आवश्यकता है। वे आर्टिफिशियल इंटैलिजैंस, रोबोटिक्स, डाटा साइंस और डिजिटल उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में प्रवेश कर रहे हैं। वे वैश्विक अवसर चाहते हैं। जब भारत ए.आई. चर्चाओं की मेजबानी करता है, तो यह युवा छात्रों को बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करता है। यह उन्हें बताता है कि उनका देश केवल वैश्विक रुझानों का अनुसरण नहीं कर रहा, बल्कि उन्हें आकार दे रहा है। साथ ही, एक स्थिर लोकतंत्र के रूप में भारत की छवि उसकी सबसे बड़ी ताकतों में से एक है। निवेशक अक्सर अन्य विकासशील देशों के साथ भारत की तुलना करते हैं। राजनीतिक शोर सामान्य है लेकिन महत्वपूर्ण वैश्विक सम्मेलनों के दौरान अत्यधिक व्यवधान अनावश्यक सवाल खड़े कर सकता है। जब नागरिक उन क्षणों के दौरान लगातार संघर्ष देखते हैं, जिनसे गर्व महसूस होना चाहिए, तो इससे राष्ट्रीय आत्मविश्वास कमजोर होता है। विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण ‘विश्वास’ की आवश्यकता होती है। जो राष्ट्र स्वयं पर विश्वास करता है, वह सांझेदारी और सम्मान को आकर्षित करता है।
भारत का वैश्विक उदय किसी एक दल की उपलब्धि नहीं है। यह सरकारों, उद्यमियों, वैज्ञानिकों और आम नागरिकों के दशकों के प्रयास का परिणाम है। आज हम जो भारत देख रहे हैं, उसे बनाने में हर राजनीतिक दल ने किसी न किसी रूप में योगदान दिया है। वह सांझा इतिहास नेताओं को याद दिलाना चाहिए कि राष्ट्रीय छवि एक सांझी जिम्मेदारी है। जैसे-जैसे भारत तकनीक, कूटनीति और आर्थिक विकास में आगे बढ़ रहा है, प्रमुख वैश्विक कार्यक्रमों के दौरान एकता और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। बहस जारी रहनी चाहिए। जवाबदेही मजबूत बनी रहनी चाहिए। लेकिन जब दुनिया अतिथि बनकर आई हो, तो संदेश स्पष्ट होना चाहिए- भारत आत्मविश्वासी है, सक्षम है और भविष्य के लिए तैयार है। देश अवसर के एक मोड़ पर खड़ा है। दुनिया सुन रही है। भारत क्या कहता है-और भारत कैसा व्यवहार करता है-यह तय करेगा कि वह भविष्य कैसे सामने आएगा।-देवी एम. चेरियन
