‘यहां गाय सुरक्षित है, हम नहीं’

03/04/2021 3:50:32 AM

जैसे ही दूध दुहने वाली महिला ने अपनी गाय के रंभाने की आवाज सुनी उसके हाथों के बाल खड़े हो गए। वह अपनी गाय से बोली, ‘‘मेरी प्यारी गाय क्या हुआ?’’ निरंतर दूध दुहने के दौरान भी महिला फुसफुसाती रही और गाय से पूछती रही, ‘‘तुम सुरक्षित हो। हमारे घर की दीवारें बहुत ऊंची हैं। कोई भी शेर कूद कर अंदर नहीं आ सकता और आपको नुक्सान नहीं पहुंचा सकता।’’ 

हमारे कानून बेहद सशक्त हैं और अब आपका कोई भी कत्ल नहीं कर सकता। तुम सुरक्षित हो और तुम्हारी आवाज में भय क्यों झलक रहा है? इतने में घर के निकट एक साधु जो ध्यान लगाने की गहरी मुद्रा में लीन था, ने गाय के रंभाने की आवाज सुनी और कांप उठा। 

चुप्पी को तोड़ते हुए वह साधु उस स्थान की ओर भागा जहां दूध दुहने वाली महिला अपनी गाय के साथ खड़ी थी। गाय निरंतर ही रंभाती चली गई। साधु उसके पास गया। वह बोला, ‘‘गाय अपनी सुरक्षा को लेकर भय में रंभा नहीं रही।’’ इतने में एक नाबालिग लड़की गाय के पास आ खड़ी हुई और साधु को ‘बोली क्या इस गाय को तुम जानते हो।’’ वह बार-बार अपनी दयनीय आंखों के साथ यह सवाल करती जा रही थी। 

साधु बोला, ‘‘गाय कानून के साथ सुरक्षित है जो पारित हुए हैं। मगर तुम सुरक्षित नहीं हो।’’ साधु ने महिला से कहा, ‘‘गाय को छोड़ यहां से भाग जाओ क्योंकि गाय खतरे में है इसीलिए रंभा रही है।’’ वह आने वाली विपत्ति को भांप चुकी है। लड़की बोली, ‘‘मैं क्यों भागूं।’’ उसने साधु को थोड़ा दूध दिया ताकि वह इसे अपनी कुटिया में ले जाए। फिर वह बोली, ‘‘मुझे किससे डरना है?’’ गाय फिर रंभाने लगी क्योंकि साधु भय में यह सब देख रहा था। इतने में कुछ लोगों का गैंग चुपके से इन तीनों लोगों के पास आ पहुंचा। गैंग का नेता हवा में चाकू लहरा रहा था। वह बोला, ‘‘तुम लोग क्या चाहते हो? और इस गाय को छू नहीं सकते, यह पूरी तरह संरक्षित है।’’ गैंग के नेता ने साधु की तरफ चाकू लहराते हुए कहा कि तुम अपना मुंह बंद रखो। लड़की भी डर से कांपने लगी। वह नेता हंसते हुए बोला, ‘‘हमें गाय नहीं चाहिए।’’ 

गाय फिर जोर-जोर से रंभाने लग पड़ी। गाय के रंभाने के बावजूद भी उन लोगों ने दूध दुहने वाली महिला को एक ओर खींच लिया और उसे झाडिय़ों में घसीटते हुए ले गए। साधु को भी एक वृक्ष के साथ बांध दिया। झाडिय़ों में से चिल्लाने की आवाजें आने लग पड़ीं। साधु तथा गाय महिला को बचाने के लिए असमर्थ थे। साधु तो बंधा था और गाय केवल रंभा ही सकती थी। इतने में गैंग ने अपना काम कर डाला और महिला से बलात्कार कर दिया। खून से लथपथ अपने चाकू के साथ उसी गांव में लौट गए जहां से वे आए थे। एक राज्य सरकार का नेता जो एक साधु के वेश में था, लोगों को यह बता रहा था कि गाय के संरक्षण के लिए वोट दो।-दूर की कौड़ी राबर्ट क्लीमैंट्स
 


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Content Writer

Pardeep

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