चीनी सी.सी.टी.वी. कैमरे हो रहे जासूसी व रेकी के लिए इस्तेमाल!
punjabkesari.in Friday, Apr 03, 2026 - 04:53 AM (IST)
ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई पर अमरीका के लक्षित हमले के लिए इसराईल ने ईरान के सी.सी.टी.वी. और मोबाइल नैटवर्क की कई सालों से जासूसी और रेकी की थी। पश्चिम एशिया के इस संकट के बाद भारत में भी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर एक्शन बढ़ रहे हैं। दिल्ली, साहिबाबाद और सोनीपत जैसे तमाम शहरों में सी.सी.टी.वी. के माध्यम से पाकिस्तानी जासूसी नैटवर्क का पुलिस ने खुलासा किया है। सरदार पटेल ने प्रधानमंत्री नेहरू को आगाह करते हुए कहा था कि भारत को पाकिस्तान से ज्यादा खतरा चीन से है।
सी.सी.टी.वी. कैमरों से जासूसी का मास्टर माइंड भी चीन है, जिस खतरे के खिलाफ पिछले कई सालों से खुफिया एजैंसियां आगाह कर रही हैं। इसके बावजूद जनता की सुरक्षा और अपराधों को रोकने के नाम पर पूरे देश में चीनी सी.सी.टी.वी. कैमरों का खतरनाक जाल बिछा दिया गया है। दिल्ली में दो चरणों में 652 करोड़ की लागत से आम आदमी पार्टी सरकार ने लगभग 2.64 लाख कैमरे लगाए थे। पी.डब्ल्यू.डी. रिपोर्ट के अनुसार इनमें 32 हजार से ज्यादा कैमरे काम नहीं कर रहे। दिल्ली सरकार के पी.डब्ल्यू.डी. मंत्री प्रवेश वर्मा ने पहले चरण में लगाए गए 1.4 लाख चीनी सी.सी.टी.वी. कैमरों को तीन चरणों में हटाने का आदेश दिया है।
खबरों के अनुसार इन कैमरों की जांच के लिए बाहरी सलाहकार कम्पनी की नियुक्ति हो रही है जो 6.5 साल में अपनी रिपोर्ट देगी। इस बारे में नेताओं की बयानबाजी के बीच बड़ा सवाल यह है कि जब चीनी कैमरों से जासूसी और राष्ट्रीय सुरक्षा के खतरे के बारे में सरकार को जानकारी है, तो फिर तुरंत प्रभाव से सारे कैमरों को क्यों नहीं हटाया जा रहा? जांच के नाम पर अगले कई सालों तक देश की राजधानी में चीनी कैमरों को लगाए रखना खतरनाक हो सकता है।
चीनी कैमरों के इम्पोर्ट पर रोक जरुरी : चीन की सरकार टैलीकॉम और कैमरा कम्पनियों को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहन और सबसिडी देती है। इसलिए चीनी कैमरे सस्ते होने के साथ आसानी से उपलब्ध हैं। चीन की हिकविजन, दहुआ और टी.पी. लिंक जैसी बड़ी कम्पनियों का सी.सी.टी.वी. कैमरों के उत्पादन और एक्सपोर्ट में वर्चस्व है। प्रतिबंध के बाद ये कम्पनियां ताइवान, हांगकांग और दुबई के माध्यम से भारत में कैमरों को एक्सपोर्ट कर रही हैं। चीनी कम्पनियां भारत में सहयोगी कम्पनियों की आड़ में भी अपने माल को बेचती हैं।
चीनी कैमरों से जासूसी के प्रमाण आने के बाद अमरीका, यूरोप और आस्ट्रेलिया जैसे देशों में उनके इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया है। कोरोना के बाद भारत ने भी पबजी समेत कई चीनी ऐप्स के इस्तेमाल और चीनी टैलीकॉम उपकरणों के आयात पर लगाया था। लेकिन सस्ते चीनी कैमरों और उनके उपकरणों का भारत में धड़ल्ले से आयात जारीहै। सरकारी विभागों और जनप्रतिनिधियों को मेक-इन-इण्डिया के 2017 के आदेश बी.आई.एस. के 16910 के मानक, रजिस्ट्रेशन के लिए 2021 के आदेश और खरीद के बारे में मार्च, 2024 में जारी आदेशों के बारे में सजगता नहीं होने से चीन के जासूसी नैटवर्क का खतरनाक जाल पूरे देश में फैलता जा रहा है।
चीनी चिप्स से मेक इन इंडिया कैमरों का खेल : सबसे खतरनाक बात यह है कि जिन कैमरों को मेक-इन-इंडिया बताया जा रहा है, उनके मुख्य पुर्जे और चिप्स चीन से ही इम्पोर्ट हो रहे हैं। सरकारी बजट, विधायक और सांसद निधि से खर्चे हजारों करोड़ के बजट से देश भर में करोड़ों चीनी सी.सी.टी.वी. कैमरों का खतरनाक जाल फैल गया। आई.टी. मंत्रालय द्वारा जारी मार्च, 2024 के ऑफिस मैमोरेंडम के अनुसार, घटिया क्वालिटी और चीनी कैमरों पर रोक जरूरी है। कैमरों से जुड़े सोर्स कोड, हार्डवेयर की क्वालिटी और सुरक्षा की जांच के लिए आई.टी. मंत्रालय के अंतर्गत एस.टी.क्यू.सी. एजैंसी का गठन हुआ है लेकिन यह एजैंसी भारत में चीनी कैमरों के इस्तेमाल को रोकने में विफल साबित हुई है।
इसके अलावा बाजार में और ई-कॉमर्स के माध्यम से बड़े पैमाने पर गैर-मान्यता प्राप्त कैमरे बिक रहे हैं। सरकारी मानकों पर सख्त अमल नहीं होने से डाटा सुरक्षा, हैकिंग, प्राइवेसी के खतरे और साइबर हमलों की संख्या बढ़ रही है। सरकारी विभागों, बाजार और आवासीय कॉलोनियों में सी.सी.टी.वी. कैमरों के डाटा का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग भी हो रहा है। लेकिन इसे रोकने के लिए केंद्र सरकार ने अभी तक डाटा सुरक्षा कानून लागू नहीं किया, जबकि यह डाटा चीन की कम्पनियों और चीन की खुफिया एजैंसियों के पास आसानी से उपलब्ध है।
सुरक्षा के नाम पर बनाए गए सी.सी.टी.वी. कैमरों के नैटवर्क से चीन की जासूसी को रोकने के लिए आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति की बजाय संसद में बहस होनी चाहिए। दिल्ली सरकार की कार्रवाई से यह साफ है कि चीनी कैमरे देश की राजधानी के लिए खतरनाक हैं। अंतर्राष्ट्रीय संकट और युद्ध के इस माहौल में राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी शहरों और सरकारी कार्यालयों में चीनी कैमरों के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष सभी तरह के इस्तेमाल पर तुरंत रोक लगनी चाहिए।-विराग गुप्ता(एडवोकेट, सुप्रीम कोर्ट)
