बग्गा के बहाने भाजपा का ‘अपनों’ और विरोधियों को ‘संदेश’

punjabkesari.in Friday, May 13, 2022 - 06:20 AM (IST)

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ ट्वीट करके अचानक राजनीतिक सुर्खियों में आए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दिल्ली प्रदेश प्रवक्ता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा के समर्थन में जिस प्रकार भाजपा हाईकमान खड़ी हुई, उससे कहीं न कहीं बग्गा की अहमियत और कद बढ़ा है। 

दिल्ली की हरीनगर विधानसभा सीट से 2019 में भाजपा के उम्मीदवार रहे बग्गा की पहचान सिर्फ ट्विटर पर ट्रोलर की तरह थी, जिसका एकमात्र काम भाजपा के विरोधियों को ट्वीट करके लताड़ना था। लेकिन, पंजाब पुलिस द्वारा कुछ दिन पहले दिल्ली की जनकपुरी से बग्गा की गिरफ्तारी के बाद हरियाणा और दिल्ली पुलिस जिस तरीके से हरकत में आईं, उससे भाजपा के नेताओं और कार्यकत्र्ताओं में साफ संदेश गया कि पूरी पार्टी बग्गा के साथ खड़ी है। इन सारी घटनाओं के बीच तेजिंदर सिंह बग्गा का राष्ट्रीय सिख नेता के तौर पर आगमन हो गया। हालात ये हो गए कि भाजपा में पहले से मौजूद सिख नेताओं को मजबूर होकर बग्गा के समर्थन में सड़क पर उतरना पड़ा। बग्गा की गिरफ्तारी के लिए तय कानूनी मापदंडों का पालन नहीं करने की वजह से दिल्ली और हरियाणा पुलिस द्वारा पंजाब पुलिस के अधिकारियों को हिरासत में लेने के कारण किरकिरी का सामना करना पड़ा। साथ ही  पंजाब सरकार की जिद ने कहीं न कहीं बग्गा को ‘हीरो’ बना दिया है। 

बंदी सिखों के नाम पर मिले विरोधियों के ‘दिल’ : बंदी सिखों की रिहाई को लेकर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एस.जी.पी.सी.) की तरफ से पंथक नेताओं की बुधवार को बुलाई गई बैठक में शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल, शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के अध्यक्ष सिमरनजीत सिंह मान, शिरोमणि अकाली दल (दिल्ली) के अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना, जागो पार्टी के अध्यक्ष मंजीत सिंह जी.के. के एक मंच पर एक साथ आने की खूब चर्चा हो रही है। अपने राजनीतिक वजूद को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे अकाली दल के लिए अपने विरोधियों के साथ इस तरह नजर आना सबको हैरान करने वाला भी है। 

हालांकि सारी कवायद बंदी सिखों की रिहाई को लेकर बताई जा रही है, लेकिन कहीं न कहीं इस एकता के पीछे दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी पर काबिज बागी अकाली धड़े को हटाना, एस.जी.पी.सी. के आगामी चुनाव में मिलकर चुनाव लडऩा आदि गुप्त मामले भी शामिल हैं। इन सबके बीच अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल द्वारा पार्टी की मजबूती के लिए सबको अपने साथ लेने की कोशिशें जारी हैं। 

गुरुद्वारा की दीवारों पर लिखी गुरबाणी में अशुद्धियां, सियासत : गुरुद्वारा सीसगंज साहिब में दीवारों पर लिखी गई गुरबाणी में अशुद्धियों का मामला तूल पकड़ गया है। इसकी शिकायत दिल्ली कमेटी सदस्य बीबी रंजीत कौर और सुखविंदर सिंह बब्बर द्वारा श्री अकाल तख्त साहिब पर की गई है। पलटवार भी दिल्ली कमेटी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने किया है। साथ ही श्री अकाल तख्त साहिब पर कमेटी के पूर्व अध्यक्ष अवतार सिंह हित और पूर्व महासचिव कुलमोहन सिंह के खिलाफ 2002 में छपे गुरबाणी गुटके में अशुद्धि होने की शिकायत कर दी। गुरुद्वारा सीसगंज साहिब के मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए जत्थेदार श्री अकाल तख्त साहिब ने 3 सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। हालांकि अवतार सिंह हित वाले मामले में अभी तक श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। लेकिन राजनीतिक मतभेदों के चलते एक पुराने मामले को लेकर अकाल तख्त साहिब पर शिकायत करने को संगत ठीक नहीं समझ रही। 

कब्जे के लिए श्री गुरु ग्रंथ साहिब का ‘सहारा’ : सिख मर्यादा और परंपरा की रक्षा के लिए 1920 में अस्तित्व में आए शिरोमणि अकाली दल को दिल्ली में अपने कार्यालय को बचाने को लिए अब श्री गुरु ग्रंथ साहिब का सहारा रह गया है। ताला तोड़कर अपने बागी धड़े से कब्जा छीनने वाले अकालियों द्वारा दिल्ली में श्री अखंड पाठ साहिब की लड़ी शुरू कर दी गई है। हालांकि लगातार अखंड पाठ रखना कोई गलत बात नहीं है, लेकिन दफ्तर पर कब्जे से बचाने के लिए लगातार श्री गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश करके रखना कहीं न कहीं राजनीतिक मंशा दर्शाता है। 

दिल्ली कमेटी अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका इस बात का भी आरोप लगा चुके हैं कि दिल्ली अकाली दल के मुखिया अवतार सिंह हित अपने कार्यालय पर कब्जा करने के लिए श्री गुरु ग्रंथ साहिब का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। इस कार्यालय विवाद को हल करने के लिए दिल्ली पुलिस के द्वारा भी कई बैठकें की जा चुकी हैं, पर कोई स्थायी हल नहीं निकला। अकाली दल का दावा है कि उनका इस कार्यालय पर 1999 से कब्जा है, इसलिए बागी धड़े को किसी भी कीमत पर कब्जा नहीं लेने देंगे।-दिल्ली की सिख सियासत सुनील पांडेय          
 


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