EV अपनाने में नई रुकावट - सोसायटी, सेफ्टी और सिस्टम का टकराव
punjabkesari.in Monday, Apr 20, 2026 - 04:40 PM (IST)
ऑटो डेस्क: देश में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) की रफ्तार तेज हो रही है। सरकार नीतियों के जरिए इसे बढ़ावा दे रही है, लेकिन जमीन पर एक नया टकराव सामने आ रहा है सोसायटी, सेफ्टी और सिस्टम के बीच। दिल्ली-NCR समेत कई शहरों में लोग EV खरीदना चाहते हैं, मगर सोसायटी में चार्जिंग की मंजूरी आसान नहीं है। कहीं अनुमति नहीं मिल रही तो कहीं बेसमेंट में लगे चार्जर हटाने के निर्देश दिए जा रहे हैं।
समस्या की जड़ यही है कि नियम कुछ कहते हैं और जमीनी हकीकत कुछ और है। गाइडलाइंस के मुताबिक सोसायटी में EV चार्जिंग की अनुमति है, बशर्ते अधिकृत कनेक्शन, पर्याप्त लोड, सुरक्षित वायरिंग और प्रमाणित चार्जर इस्तेमाल हो। लेकिन फायर विभाग का फोकस जोखिम पर है। खासकर बेसमेंट पार्किंग में। “थर्मल रनअवे” जैसी स्थिति में बैटरी तेजी से गर्म होकर आग पकड़ सकती है, जिसमें जहरीला धुआं और लंबे समय तक जलने का खतरा होता है। बंद बेसमेंट में यह स्थिति और गंभीर हो जाती है।
हाल ही में इंदौर में एक बड़ा हादसा सामने आया, जहां चार्जिंग के दौरान आग लगी और तेजी से फैल गई। जांच में यह साफ नहीं हो पाया कि वजह बैटरी थी या चार्जिंग सिस्टम, लेकिन ओवरहीटिंग, शॉर्ट सर्किट और असुरक्षित सेटअप को संभावित कारण माना गया। यही वह बिंदु है जहां “जुगाड़ चार्जिंग” सबसे बड़ा जोखिम बनकर सामने आती है। एक्सटेंशन वायर, बिना लोड कैलकुलेशन के कनेक्शन और अनधिकृत इंस्टॉलेशन।
पुरानी हाउसिंग सोसायटियां इस बदलाव के लिए तैयार नहीं थीं। सीमित वेंटिलेशन, पहले से भरा इलेक्ट्रिकल लोड और इमरजेंसी एग्जिट की कमी जोखिम बढ़ाते हैं। बेसमेंट में आग लगने की स्थिति में धुआं तेजी से भरता है और रेस्क्यू मुश्किल हो जाता है। यही वजह है कि फायर विभाग सख्ती बरत रहा है, जबकि RWA अपने स्तर पर चार्जिंग को सीमित या प्रतिबंधित कर रही हैं।
ऑटोमोटिव जर्नलिस्ट एवं एक्सपर्ट पीयूष पंजाबी के मुताबिक “समस्या EV में नहीं, बल्कि हमारी तैयारी में है। जब तक सोसायटी इंफ्रास्ट्रक्चर, फायर सेफ्टी और स्पष्ट नियम साथ नहीं चलेंगे, तब तक EV अपनाना आसान नहीं होगा। पहले से लोगों को रेंज एंजाइटी सता रही है, ऊपर से अब चार्जर कहां लगाएं यह समस्या सामने आ रही है। गाड़ी बाहर चार्ज करना महंगा पड़ेगा और सोसायटी में पॉसिबल नहीं। तो क्या यही समझें कि EV सिर्फ वही खरीदे जो सोसाइटी में नहीं रहते, जिसके पास खुद का घर है, प्रॉपर पार्किंग स्पेस है और स्पेस अंडरग्राउंड नहीं है? ये सवाल अब सामने आ रहे हैं, जिनका जवाब फिलहाल किसी के पास साफ नहीं है। फैसला अब ईवी मैन्युफैक्चरर को लेना है और सॉल्यूशन ढूंढ़ना है। सारे डिपार्टमेंट्स के साथ तालमेल बैठाना है और सेफ्टी को पुख्ता करना है।
कुल मिलाकर मुद्दा EV का नहीं, तैयारी का है। अगर घर पर सुरक्षित चार्जिंग संभव नहीं होगी, तो EV अपनाना हर किसी के लिए व्यावहारिक नहीं रहेगा। अगर EV भविष्य है, तो सिस्टम को भी उतना ही तैयार होना होगा वरना चार्जिंग सुविधा नहीं, एक नई परेशानी बन जाएगी।
