कोरोना हराने के लिए रात के कफ्र्यू को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बताया अवैज्ञानिक

punjabkesari.in Tuesday, Jan 04, 2022 - 05:10 AM (IST)

भारत में कोरोना के बढ़ते मामलों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। जहां महाराष्ट्र के 10 मंत्री और 20 विधायक संक्रमित हो गए हैं, वहीं बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी का पूरा परिवार कोरोना पाजिटिव हो गया है। इस पर काबू पाने के लिए राज्य सरकारें लॉकडाऊन व अन्य पाबंदियां लगा रही हैं। 

इनमें रविवार को अनावश्यक दुकानों और प्रतिष्ठानों को बंद रखना, धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं के जाने पर पाबंदियां लगाना, शादी-विवाह और अंतिम संस्कार जैसे समारोहों में शामिल होने वाले लोगों की संख्या सीमित करना आदि शामिल हैं। इसके अलावा वैक्सीन के दोनों डोज न लगवाने वालों का वेतन रोकने तथा सार्वजनिक स्थलों पर प्रवेश की अनुमति न देने, धार्मिक स्थलों पर फूलमाला, प्रसाद आदि चढ़ाने पर पाबंदियां लगाई गई हैं। परंतु इन सबसे बढ़कर राज्य सरकारें रात का कफ्र्यू लगाने पर जोर दे रही हैं : 

* राजधानी दिल्ली में रात 10 बजे से सुबह 5 बजे तक नाइट कफ्र्यू लागू है और कई जगहों पर रात 8 बजे से बाजार बंद किए जा रहे हैं।
* ओडिशा में रात 10 बजे से सुबह 5 बजे तक नाइट कफ्र्यू लागू है।
* राजस्थान में कोरोना की दूसरी लहर के बाद से ही नाइट कफ्र्यू लागू है।
* मध्य प्रदेश, हरियाणा, गुजरात, उत्तराखंड में रात 11 से सुबह 5 बजे तक नाइट कफ्र्यू लागू किया गया है। 

* महाराष्ट्र में विभिन्न प्रतिबंधों के अलावा मुम्बई में 15 जनवरी तक लागू धारा 144 के अंतर्गत सार्वजनिक स्थानों पर शाम 5 से सुबह 5 बजे तक जाने व अंतिम संस्कार में 20 से अधिक लोगों को जाने की अनुमति नहीं होगी।
* पश्चिम बंगाल में 15 जनवरी तक रात 10 से सुबह 5 बजे तक नाइट कफ्र्यू लगा दिया गया है। स्कूल और विश्वविद्यालय तब तक बंद रहेंगे। 
* गुजरात में 25 दिसम्बर से ही 8 शहरों में रात का कफ्र्यू 2 घंटे के लिए बढ़ा कर रात 1 बजे के बजाय रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक लागू कर दिया गया है। 

जहां तक विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा कोरोना महामारी पर काबू पाने के लिए रात का कफ्र्यू लगाने का संबंध है, जनता इससे सहमत नहीं है तथा आम बातचीत में लोग सभी राज्य सरकारों के इस आदेश का मजाक उड़ाते हैं। इसका कारण यह है कि रात को तो केवल गिने-चुने लोग ही घर से बाहर निकलते हैं जो कुल आबादी का 1 प्रतिशत भी नहीं हैं। शराब के ठेकों पर दूरी बना कर बैठे लोग या कारों में घूमने वाले चंद लोग ही होते हैं। अत: ज्यादातर गतिविधियां दिन में ही होने के कारण रात के कफ्र्यू का कोई लाभ नहीं है। 

इसकी पुष्टि तो विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी कर दी है तथा इसे अवैज्ञानिक करार दिया है। संगठन की प्रवक्ता सौम्या स्वामीनाथन के अनुसार :

‘‘भारत में कोरोना के नए वेरिएंट से निपटने की बात आती है तो सबसे पहले नाइट कफ्र्यू लगाया जाता है परंतु इसके पीछे कोई विज्ञान नहीं है जबकि भारत जैसे देश को वायरस का प्रसार रोकने के लिए विज्ञान तथा साक्ष्य आधारित नीतियां तैयार करनी चाहिएं। मनोरंजन स्थलों पर कोरोना सबसे पहले फैलता है। स्वास्थ्य सुरक्षा उपायों की एक लम्बी सूची है जिनका सरकार को पालन करना चाहिए।’’ बेशक अपनी ओर से सरकार टीकाकरण और बूस्टर डोज लगाने की दिशा में सक्रिय है तथा 3 जनवरी से 15 से 18 साल तक के बच्चों को भी कोरोना वैक्सीन देने की शुरूआत हुई है। 

परंतु चूंकि देश में चुनावी मौसम चल रहा है और राजनीतिक दलों की चुनावी रैलियां और सभाएं आदि दिन में ही होती हैं, अत:चुनावों के मौसम में राजनीतिक दलों से प्रतिबंध कठोर करने की सरकार से मांग करने की आशा करना फिजूल ही होगा क्योंकि ‘इस हमाम में सभी एक जैसे हैं’, अत: राज्य सरकारों द्वारा दिन में पाबंदियां कठोर करने की संभावना कम ही प्रतीत होती है। जैसा कि बसों आदि के पीछे लिखा होता है, ‘सवारी अपने सामान की खुद ही जिम्मेदार है’ , अत: ऐसी हालत में लोगों को स्वयं ही बचावात्मक उपायों का सख्ती से पालन करके अपनी सुरक्षा बढ़ानी होगी।— विजय कुमार  


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