सुख-समृद्धि का संदेश लेकर आए इस वर्ष की दीपावली

11/04/2021 3:32:35 AM

प्रेम, प्यार और भाईचारे का प्रकाश फैलाने तथा स्वच्छता का संदेश देने वाला महापर्व दीपावली युगों पूर्व भगवान श्री रामचंद्र जी द्वारा रावण वध के बाद लंका विजय और चौदह वर्ष का वनवास पूर्ण कर अयोध्या आगमन, जब समस्त अयोध्या वासियों ने दीपमाला करके उनका स्वागत किया था, की याद दिलाता है। मौसम के बदलाव के सूचक इस पर्व के साथ ही प्रकृति में अनेक बदलाव आने लगते हैं। सूर्यास्त जल्दी होने से रातें बड़ी और दिन छोटे होने लगते हैं। वायुमंडल में ठंड बढऩे लगती है। लोग गर्म कपड़े पहनने लगते हैं और मेवों आदि का सेवन करने लगते हैं। 

इस पर्व के आगमन के दौरान लोग बड़े पैमाने पर विभिन्न वस्तुओं की खरीदारी भी करते हैं जिससे व्यापारी वर्ग को कमाई होती है। तरह-तरह के सामान बनाने वाली कम्पनियां भी दीवाली पर ग्राहकों को लुभाने के लिए कई ‘स्कीमों’ और स्पैशल कीमतों की घोषणा करती हैं। 2016 और 2017 में जी.एस.टी. तथा नोटबंदी लागू किए जाने से देश मंदी की चपेट में आ गया। 2019 में इस स्थिति में कुछ सुधार हुआ ही था और देश की अर्थव्यवस्था पटरी पर लौटने ही लगी थी कि वर्ष के अंत में विश्व पर कोरोना महामारी ने धावा बोल दिया। जनवरी, 2020 में भारत के भी इसकी चपेट में आ जाने से लॉकडाऊन तथा अन्य प्रतिबंधों के चलते सब कुछ ठप्प हो गया। व्यापारिक प्रतिष्ठान, स्कूल- कालेज सब बंद हो गए और ‘वर्क फ्रॉम होम’ का सिलसिला शुरू हो गया। 

बस खुले रहे तो कोरोना पीड़ित मरीजों से भरे अस्पताल जहां मरीजों को रखने के लिए बैड भी कम पडऩे लगे। लगभग अन्य सभी रोगों से पीड़ितों का इलाज बंद हो गया और कोरोना पीड़ितों के प्राण बचाने के लिए ऑक्सीजन के सिलैंडरों तक की भारी कमी पैदा हो गई। गत वर्ष दीपावली 14 नवम्बर को थी जबकि सरकारी आंकड़ों के अनुसार 13 नवम्बर, 2020 तक देश में कोरोना से 1,28,668 मौतें हो चुकी थीं। इसी कारण पिछले वर्ष दीपावली बिल्कुल नहीं मनाई गई और हर्ष का माहौल विषाद में बदल गया था। बहरहाल, अब हालात में कुछ सुधार हुआ है तथा सरकार द्वारा प्रतिबंधों में कुछ ढील एवं शर्तों के साथ शिक्षा संस्थान, मैरिज पैलेस, सिनेमाघर आदि खोलने की अनुमति दिए जाने पर लगभग पौने दो वर्ष बाद जिंदगी कुछ-कुछ पटरी पर आती दिखाई देने लगी है। 

व्यापारिक गतिविधियां सामान्य होनी शुरू हो गई हैं। एक बार फिर बाजारों में दुकानों और फडिय़ों पर सामानों के अम्बार लग गए हैं। ऐसा लगता है जैसे  देश के ओर-छोर में लोग किसी घोर संकट से निकल कर कोरोना रूपी रावण पर विजय प्राप्त करने का जश्र मना रहे हों तथा अधिक खरीदारी करके पिछले वर्षों की कसर पूरी कर रहे हों। 

* स्वतंत्र भारत में ‘कोरोना’ तीसरी महा आपदा है। पहली आपदा 1947 में देश के बंटवारे के समय लोगों ने झेली जब भारी साम्प्रदायिक हिंसा और मारकाट के बीच देश में बड़ी संख्या में लोग मारे गए, भारी संख्या में विस्थापन हुआ व लाखों लोग अपने घरों से उजड़ कर शरणार्थी बनने को विवश हो गए।
* दूसरी आपदा तब झेली जब आतंकवाद की आंच राजधानी दिल्ली तक जा पहुंची और एक बार फिर न सिर्फ हजारों लोग मारे गए बल्कि सदियों से चले आ रहे भाईचारे पर भी भारी आंच आई।

* तीसरी महा आपदा गत वर्ष कोरोना रूपी महामारी का रूप धारण करके भारत व विश्व के अन्य देशों पर आई जिसने बड़ी संख्या में लोगों के प्राण छीन कर परिवारों के परिवार तबाह कर दिए और जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया था परंतु प्रभु की कृपा से अब इससे मुक्ति मिलती दिखाई दे रही है। इस पर्व पर अपने प्रियजनों के संग खुशियां मनाते हुए हम अपने उन वीर  सेनानियों और कोरोना योद्धा डाक्टरों को याद करें जो हमारी सुरक्षा के लिए अपनी जान को जोखिम में डाल कर सीमाओं पर पहरा दे रहे हैं और मरीजों की सेवा कर रहे हैं। 

अत: आज हम अपने पाठकों और सहयोगियों को दीपावली की बधाई देते हुए सब लोगों की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं और प्रभु से प्रार्थना करते हैं कि कोरोना की तीसरी लहर या इस जैसी किसी अन्य महामारी का प्रकोप भारत तो क्या विश्व में कहीं न हो। प्रभु सब पर अपनी कृपा बनाए रखें। ‘सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे संतु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित दु:खभाग्भवेत्॥’-विजय कुमार 
                                                                   


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