स्वास्थ्य बीमा से वंचित 82 प्रतिशत दिव्यांगों को ‘आयुष्मान भारत’ के साथ जोडऩे की जरूरत

punjabkesari.in Wednesday, Apr 02, 2025 - 05:19 AM (IST)

भारत सरकार की आयुष्मान भारत योजना को चलाने वाली नैशनल हैल्थ अथॉरिटी की वैबसाइट पर देश में  76,54,49,221 आयुष्मान हैल्थ कार्ड बनाने का दावा किया गया है। इनमें से 52,08,653 लोगों का हैल्थ डाटा भी इन कार्ड्स के साथ लिंक करने की बात कही गई है। सरकार का दावा है कि इस योजना से करोड़ों लोग लाभान्वित हो रहे हैं।

लेकिन इतनी बड़ी योजना देश में लागू होने के बावजूद एक ऐसा वर्ग इस योजना का फायदा लेने से चूक रहा है जो शारीरिक तौर पर सक्षम नहीं है। ‘राष्ट्रीय दिव्यांगता नैटवर्क’ द्वारा हाल ही में पेश की गई ‘नैशनल सैंटर फॉर प्रमोशन ऑफ एम्प्लॉयमैंट फॉर डिसेबल्ड पीपुल’ (एन.सी.पी.ई.डी.पी.) की एक सर्वे रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि 82 प्रतिशत दिव्यांगों के पास किसी प्रकार का कोई सेहत बीमा नहीं है और 42 प्रतिशत दिव्यांगों को सरकार की आयुष्मान भारत योजना की जानकारी ही नहीं है। इस सर्वे में 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 5,000 से अधिक दिव्यांग व्यक्तियों की राय ली गई है। सर्वे के आंकड़ों के मुताबिक सिर्फ 28 प्रतिशत दिव्यांगों ने ही आयुष्मान भारत की योजना का लाभ लेने की कोशिश की। एन.सी.पी.ई.डी.पी. के कार्यकारी निदेशक ‘अरमान अली’ ने कहा कि सर्वे की संख्या महज आंकड़े नहीं हैं बल्कि उन लोगों की हालत दर्शाती है जो आवश्यक स्वास्थ्य देखभाल से वंचित रह गए हैं। 

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य बीमा दिव्यांग व्यक्तियों के लिए विशेषाधिकार ही नहीं, यह जीवन-यापन के लिए एक आवश्यकता है और दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने एक ऐतिहासिक फैसले में दिव्यांगों के इस अधिकार की रक्षा करने वाला फैसला भी सुनाया था। दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस ‘प्रतिभा सिंह’ ने ‘सौरभ शुक्ला’ बनाम ‘मैक्स बूपा हैल्थ लाइफ इंश्योरैंस’ और अन्य के मध्य चले एक मामले की सुनवाई के दौरान 13 दिसम्बर, 2022 को सुनाए गए अपने फैसले में कहा था कि जब हम जीवन के अधिकार की बात करते हैं तो उसमें स्वास्थ्य का अधिकार भी शामिल होता है। अदालत ने अपने फैसले के दौरान ‘इंश्योरैंस रैगुलेटरी अथॉरिटी आफ इण्डिया’ (आई.आर.डी.ए.) को आदेश दिया था कि वह सभी इंश्योरैंस कम्पनियों की एक बैठक करके उन्हें दिव्यांगों के लिए स्वास्थ्य बीमा की योजनाएं जारी करने का आदेश दे लेकिन अदालत के इस फैसले के बावजूद 3 साल तक इस दिशा में कोई सार्थक प्रयास नहीं हुआ है। 

दिव्यांगों के बीच अपने स्वास्थ्य अधिकारों को लेकर जागरूकता की कमी का भी बीमा कम्पनियां फायदा उठा रही हैं और उन्हें हैल्थ इंश्योरैंस जैसे स्वास्थ्य के मौलिक अधिकार से वंचित रखा जा रहा है। ‘अरमान अली’ ने सरकार के मानदंडों पर भी सवाल उठाया और कहा कि आयुष्मान भारत 70 वर्ष से अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों को लाभान्वित करता है, लेकिन दिव्यांग व्यक्तियों के लिए ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। दिव्यांगों के अधिकारों की रक्षा करने वाली ‘मल्टीपल स्क्लेरोसिस सोसाइटी ऑफ इंडिया’ के राष्ट्रीय सचिव संदीप चिटनिस का मानना है कि किसी की दिव्यांगता का पता लगने के बाद से ही उसके लिए हैल्थ इंश्योरैंस लेना मुश्किल हो जाता है क्योंकि उनके हैल्थ इंश्योरैंस के आवेदन को बीमा कंपनियों द्वारा सीधे तौर पर रद्द कर दिया जाता है। हमें दिव्यांगों के लिए एक ऐसी आसान कैशलैस हैल्थ इंश्योरैंस प्रणाली की आवश्यकता है जो लोगों को उनकी दिव्यांगता के लिए दण्डित न करे।

एक स्वस्थ व्यक्ति तो फिर भी खुद अपनी कोशिशों और संसाधनों के साथ सरकारी और गैर सरकारी बीमा की सेवाएं हासिल कर सकता है लेकिन दिव्यांगों के लिए शारीरिक तौर पर सक्षम न होने के कारण इस तरह की सुविधा हासिल कर पाना अपने आप में सम्भव नहीं है। ऐसे में सरकार को इस वर्ग के लिए आयुष्मान योजना के तहत विशेष प्रावधान करके इन्हें सरकारी सुविधा का लाभ देने की पहल करनी चाहिए। इस से स्वास्थ्य बीमा से वंचित कई दिव्यांग इसका लाभ उठा सकेंगे और उन्हें बीमार होने की स्थिति में दर-दर भटकना नहीं पड़ेगा।-विजय कुमार


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