‘सुरक्षा बलों के सदस्यों में व्याप्त तनाव’ दूर करने के लिए कदम उठाने की जरूरत!
punjabkesari.in Saturday, Oct 24, 2026 - 03:44 AM (IST)
अपनी वीरता से भारत को विश्वव्यापी प्रतिष्ठा दिलाने वाले हमारे सुरक्षा बलों के जवानों के तनाव में पिछले कुछ वर्षों के दौरान भारी वृद्धि हुई है। इस कारण प्रतिवर्ष सुरक्षा बलों के अनेक जवान अपने ही सहकर्मियों या परिजनों तक की हत्या कर रहे हैं, जिसकी लगभग पिछले 3 महीनों की घटनाएं निम्न में दर्ज हैं :
* 13 जुलाई को ‘दिल्ली पुलिस’ के ‘एंटी आटो थैफ्ट स्कवायड’ (ए.ए.टी.एस.) के कांस्टेबल ‘मनीष भाटी’ ने अपनी पत्नी ‘प्रियंका’ की बीच सड़क पर अपने सर्विस पिस्टल से गोली मार कर हत्या कर दी और उसके अगले दिन 14 जुलाई को ‘मनीष भाटी’ का शव भी मयूर विहार के एक पार्क में पड़ा मिला जहां उसने खुद को गोली मार कर आत्महत्या कर ली थी।
* 23 जुलाई को ‘मालदा’ (पश्चिम बंगाल) के ‘बैशनब नगर’ स्थित ‘बार्डर सिक्योरिटी फोर्स’ (बी.एस.एफ.) की 119वीं बटालियन के एक जवान ‘शिवम मिश्रा’ को कैम्प के भीतर अपने ही साथियों ‘अजय कुमार सिंह’ तथा ‘अम्बा दास सुरेश दरगू’ पर गोली चला कर उनकी हत्या करने तथा एक अन्य जवान को घायल कर देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। इससे पूर्व 2025 में भी उसे गोलीबारी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था तथा बी.एस.एफ. के कानूनों के अनुसार दंडित भी किया गया था और उसकी सजा कुछ दिन पहले ही पूरी हुई थी।
* 4 अगस्त को ‘नगांव’ (असम) जिले के ‘कटिमारी’ में ‘सैंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स’ (सी.आर.पी.एफ.) की 34वीं बटालियन के कैम्प में तैनात एक ए.एस.आई. ने अपनी सॢवस राइफल से गोली मार कर 2 जवानों ‘विष्णु प्रसाद बघेल’ तथा ‘राम नवल सिंह यादव’ की हत्या कर दी तथा एक अन्य जवान को घायल करने के बाद स्वयं भी आत्महत्या कर ली।
* 6 सितम्बर को ‘लखनऊ’ (उत्तर प्रदेश) में पुलिस के हैडकांस्टेबल ‘हिमांशु श्रीवास्तव’ को घरेलू विवाद और शराब की लत के कारण अपनी पत्नी ‘रश्मि श्रीवास्तव’ के सिर पर लोहे का मूसल मार कर उसकी हत्या करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
* 19 सितम्बर को ‘दिल्ली’ पुलिस के हैडकांस्टेबल ‘मोनू’ ने ‘नरेला’ स्थित अपने फ्लैट में घरेलू विवाद के चलते अपनी पत्नी ‘मीनू’ की गला दबा कर हत्या करने के बाद खुद भी फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
* 29 सितम्बर को ‘बसोहली’ (कठुआ) के निकट ‘मशका’ गांव में पावर प्रोजैक्ट में तैनात ‘सैंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स’ (सी.आई.एस.एफ.) के हैड कांस्टेबल ‘अवधेश कुमार सिंह’ ने आपसी रंजिश के कारण अपनी सरकारी ए.के. 47 राइफल से अंधाधुंध गोली चला दी जिससे एक असिस्टैंट कमांडैंट ‘अंकित कुमार पांडे’ तथा 3 अन्य कर्मियों ‘लक्ष्मण सिंह’, ‘रफीक अहमद’ एवं ‘संदीप कुमार’ की मौत हो गई।
* 12 अक्तूबर को ‘रीवा’ (मध्य प्रदेश) में ‘रेलवे सुरक्षा बल’ (आर.पी.एफ.) के एक जवान ने अपने ही एक साथी की गोली मार कर हत्या कर दी।
* और अब 20 अक्तूबर को पंजाब पुलिस के हैडकांस्टेबल ‘गुरविंदर सिंह’ (मानसा के डिप्टी कमिश्रर के गनमैन) ने अपनी पत्नी ‘हरप्रीत कौर’ और 2 बेटों पर अंधाधुंध गोलियां चला दीं जिससे उसके बड़े बेटे ‘जीत’ और स्वयं उसकी गोली लगने से मौत हो गई जबकि उसकी पत्नी और छोटा बेटा गंभीर रूप से घायल हालत में अस्पताल में भर्ती हैं। उपरोक्त घटनाओं से स्पष्टï है कि पिछले कुछ वर्षों में देश के अलग-अलग हिस्सों में भारतीय सुरक्षा बलों के जवान तनाव और नकारात्मकता के शिकार हो रहे हैं। सुरक्षा बलों के जवानों द्वारा अपने ही साथियों या परिवार के सदस्यों की हत्या करने की घटनाएं अत्यंत दुखद और चिंताजनक हैं। इसे ‘फ्रैट्रिसाइड’ या ‘सहकर्मी की हत्या’ कहा जाता है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा गठित टास्क फोर्स और विभिन्न रक्षा अध्ययनों के अनुसार ऐसी घटनाओं के पीछे कोई एक कारण नहीं होता बल्कि यह कई गंभीर मानसिक विकृतियों व सामाजिक परिस्थितियों का परिणाम होता है। इनमें अत्यधिक तनाव और मानसिक अवसाद, घरेलू और पारिवारिक समस्याएं, परिवार से दूरी, घरेलू परेशानियों की सूचना मिलने के बावजूद दूरी पर तैनाती के कारण घर न जा पाना, छुट्टी न मिलना, ड्यूटी रोस्टर को लेकर सहकर्मियों या वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विवाद, कार्यस्थल पर उत्पीडऩ, वित्तीय संकट आदि मुख्य हैं। इसके लिए सुरक्षा बलों के सदस्यों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए काऊंसलिंग, छुट्टी की नीति में सुधार और शिकायत निवारण प्रणाली को और मजबूत करने की आवश्यकता है ताकि देश की शौर्य पताका फहराने वाले हमारे वीरों पर आंच न आए। वे खुश और उनके परिवार खुशहाल रहें और वे देश की सरहदों तथा देशवासियों की पूरी ताकत के साथ रक्षा करने में समर्थ हों।—विजय कुमार
