‘एम्बुलैंसों की खस्ता हालत और लेट-लतीफी से’ मरीजों की जा रही जान!
punjabkesari.in Tuesday, Jul 28, 2026 - 02:45 AM (IST)
एम्बुलैंसों का इस्तेमाल रोगियों को अस्पताल लाने व ले जाने के लिए होता है परंतु एम्बुलैंसों की खस्ता हालत और लेट-लतीफी के कारण जरूरतमंदों, विशेषकर कमजोर वर्ग के लोगों को समय पर एम्बुलैंस न मिलने से जहां अनेक रोगियों की मौत हो जाती है, वहीं मृतक देह को ले जाने के लिए एम्बुलैंस न मिलने से लाशों की बेकद्री भी होती है। पिछले साढ़े चार महीनों में सामने आई ऐसी ही चंद घटनाएं निम्न में दर्ज हैं :
* 8 मार्च को ‘चक्रधरपुर’ (झारखंड) में एक बेबस पिता को एम्बुलैंस न मिलने के कारण अपनी नवजात बेटी का शव गत्ते के डिब्बे में रख कर और बैग में छिपा कर घर ले जाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
* 6 जुलाई को ‘रीवा’ (मध्य प्रदेश) के गांव ‘मनगवां’ में गंभीर रूप से बीमार एक महिला को एम्बुलैंस न मिलने के कारण उसके परिजनों को उसे खटिया पर लिटा कर अस्पताल ले जाना पड़ा परंतु समय पर अस्पताल न पहुंच पाने के कारण रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।
* 7 जुलाई को ‘मंडला’ ( मध्य प्रदेश) में ‘नैगवां’ गांव की एक गर्भवती महिला को अचानक प्रसव पीड़ा हुई, लेकिन बार-बार फोन करने के बाद भी एम्बुलैंस समय पर नहीं पहुंची। महिला को ऑटो-रिक्शा से अस्पताल ले जाया जा रहा था, जहां रास्ते में ही उसने ऑटो में 4 बच्चों को जन्म दे दिया और सभी नवजात शिशुओं की मौत हो गई।
* 10 जुलाई को ‘कालाहांडी’ (ओडिशा) के जिला अस्पताल को रैफर की गई एक बीमार लड़की को ले जा रही एम्बुलैंस का रास्ते में टायर फट गया। दूसरी वैकल्पिक एम्बुलैंस पहुंचने में काफी समय लग गया, जिसके कारण इलाज में देरी हो जाने से लड़की की मृत्यु हो गई।
* 15 जुलाई को ‘गुमला’ (झारखंड) के ‘चैनपुर’ से ‘रांची’ ले जाने के लिए गंभीर रूप से बीमार 14 वर्षीय ‘शिवानी लोहरा’ को समय पर एम्बुलैंस और ऑक्सीजन न मिलने के कारण उसकी अपने परिजनों की गोद में ही तड़प-तड़प कर मौत हो गई। सरकारी एम्बुलैंस मौके पर तो पहुंची, लेकिन वह खराब थी और धक्का लगाने के बाद भी स्टार्ट नहीं हुई।
* 16 जुलाई को ‘जामताड़ा’ (झारखंड) सदर अस्पताल में डाक्टरों की लापरवाही और समय पर एम्बुलैंस न मिलने के कारण एक गर्भवती महिला और उसके नवजात शिशु की मौत हो गई।
* 18 जुलाई को ‘धनबाद’ (झारखंड) में ‘थैलेसीमिया’ से पीड़ित ‘पवन कुमार’ को गंभीर स्थिति में ‘रांची’ रैफर किया गया था। परिजनों ने सुबह 11 बजे से एम्बुलैंस सेवा को लगातार फोन किया, लेकिन 4 घंटे तक कोई रिस्पांस नहीं मिला जिससे हुई देरी के कारण मरीज ने दम तोड़ दिया। * 24 जुलाई को ‘गुमला’ (झारखंड) में सांप के डसने के बाद एक बच्ची के परिजनों ने एम्बुलैंस सेवा के लिए बार-बार फोन किया, लेकिन किसी ने फोन ही नहीं उठाया और एम्बुलैंस न मिलने के कारण बच्ची की मौत हो गई।
* 26 जुलाई को ‘रायपुर’ (छत्तीसगढ़) में गंभीर रूप से बीमार एक मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए परिजनों ने एम्बुलैंस को बार-बार कॉल किया, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी एम्बुलैंस नहीं पहुंची। मजबूरी में परिजनों को मरीज को तड़पती हालत में पिकअप वाहन (लोडर) में लादकर अस्पताल ले जाना पड़ा।
* और अब 26 जुलाई को ही ‘फिल्लौर’ (पंजाब) में गंभीर रूप से बीमार एक युवक को अस्पताल ले जाने के लिए बार-बार फोन करने के बावजूद एम्बुलैंस न आने पर उसे कचरे की रेहड़ी में डाल कर अस्पताल पहुंचाना पड़ा जिसमें एक घंटा खराब हो गया और घायल युवक ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
एम्बुलैंसों की खस्ता हालत के कारण इलाज के लिए तड़पते मरीज तक समय पर एम्बुलैंस न पहुंच पाना देश में स्वास्थ्य सुविधाओं पर प्रश्न चिन्ह लगाता है। इस त्रुटि को दूर करने के लिए स्वास्थ्य प्रणाली में सुधार करने की तुरंत जरूरत है और इसके लिए सिस्टम को चुस्त और संवेदनशील होना पड़ेगा। हालांकि स्वास्थ्य सेवाएं राज्यों का विषय है लेकिन इस मुद्दे पर एक ऐसा केंद्रीय कानून जरूर होना चाहिए जो इलाज के लिए तड़पते मरीजों की जान बचाने के लिए समय पर एम्बुलैंस का पहुंचना सुनिश्चित करे।-विजय कुमार
