‘100 रुपए के नए नोट जारी करके’ नेपाल ने फिर खड़ा किया भारत से विवाद!
punjabkesari.in Saturday, Nov 29, 2025 - 04:46 AM (IST)
राजशाही के खात्मे के बाद नेपाल 2008 में गणतंत्र बना था और 2015 में नेपाल का संविधान लागू हुआ। इस दौरान चीन परस्त के.पी. शर्मा ‘ओली’ 2 बार देश के प्रधानमंत्री बने। हालांकि वह एक बार भी अपना कार्यकाल पूर्ण नहीं कर पाए परंतु इस दौरान उन्होंने भारत विरोधी रवैया ही अपनाए रखा। घरेलू मामलों में मनमाने निर्णय लेने के साथ-साथ चीन के उकसावे पर ‘ओली’ ने भारत के 3 इलाकों ‘लिपुलेख’, ‘कालापानी’ व ‘ङ्क्षलपियाधुरा’ पर अपना दावा जताने के अलावा समय-समय पर भारत विरोधी बयान दिए और भारत विरोधी कदम उठाए जिनसे दोनों देशों के संबंधों में खटास आई। 13 जून, 2020 को ‘ओली’ ने ‘उत्तराखंड’ स्थित ‘लिपुलेख’, ‘लिपियाधुरा’ और ‘कालापानी’ के इलाकों को नेपाल के नक्शे में दिखाने को नेपाल की संसद से स्वीकृति दिलाई और आरोप लगाया कि भारत उनकी सरकार को अस्थिर करना चाहता है जिस पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई थी। इस बीच 3 सितम्बर, 2025 को प्रधानमंत्री ‘के.पी. शर्मा ओली’ तथा उनके मंत्रिमंडल के सदस्यों के मनमाने फैसलों तथा भ्रष्टïाचार के विरुद्ध युवाओं ने मोर्चा खोल दिया।
‘जेन जी’ के बैनर तले आंदोलनकारी युवा नेपाल की राजधानी काठमांडू के कई हिस्सों में ‘के.पी. चोर देश छोड़ो’ और ‘भ्रष्ट नेताओं के विरुद्ध कार्रवाई करो’, ‘भूकम्प की जरूरत नहीं है नेपाल रोज भ्रष्टाचार से हिलता है’ जैसे नारे लगाते हुए प्रदर्शन कर रहे थे। आंदोलनकारियों ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री सहित अनेक मंत्रियों के आवास अग्रि भेंट कर दिए तथा आंदोलन के दौरान 20 लोगों की मौत की जवाबदेही की मांग को लेकर अपना प्रदर्शन जारी रखा। 9 सितम्बर को सुबह से ही तेजी से बदलते हालात के बीच दोपहर को एहतियातन राजधानी काठमांडू तथा आसपास के इलाकों में कफ्र्यू भी लगाया गया परन्तु स्थिति नियंत्रण में नहीं आर्ई। इस आंदोलन के परिणामस्वरूप अंतत: देश में तख्तापलट हुआ और 13 सितम्बर, 2025 को देश की पूर्व चीफ जस्टिस ‘सुशीला कार्की’ (73) को अंतरिम प्रधानमंत्री बनाया गया।
चूंकि 1971 में नेपाल के ‘त्रिभुवन विश्वविद्यालय’ से ग्रैजुएशन करने के बाद ‘सुशीला कार्की’ ने ‘काशी हिन्दू विश्वविद्यालय’ से आगे की पढ़ाई पूरी की थी, इसलिए आशा थी कि भारत में पढ़ाई के बाद अब राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर मिलने पर वह भारत के प्रति अपना सकारात्मक रवैया रखेंगी, परंतु ऐसा होता दिखाई नहीं दे रहा। नेपाल के केंद्रीय बैंक (नेपाल राष्ट्र बैंक अर्थात एन.आर.बी.) ने 27 नवम्बर, 2025 को अपने देश का 100 रुपए का नया नोट जारी करके एक एक बार फिर अपना भारत विरोधी चेहरा उजागर कर दिया है।
इस नोट पर नेपाल का संशोधित मानचित्र लगा हुआ है और इसमें भारत के स्वामित्व वाले ‘काला पानी’, ‘लिपुलेख’ और ‘लिपियाधुरा’ क्षेत्र नेपाल में दिखाकर फिर विवाद खड़ा कर दिया है। भारत के विदेश मंत्रालय ने नेपाल सरकार के इस कदम पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे ‘कृत्रिम विस्तार’ तथा ‘ऐतिहासिक तथ्यों के विपरीत’ बताया है और यह मुद्दा एक बार फिर गर्मा गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव ने स्थिति को जटिल बना दिया है और चीन के प्रभाव में ही नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी की सरकारें भारत विरोधी भावनाओं को बढ़ावा दे रही हैं। नेपाल का यह रवैया भारत के लिए तो चिंता का विषय है ही नेपाल के लिए भी हितकर नहीं है। जब भी वहां कोई प्राकृतिक संकट पैदा होता है तो सबसे पहले भारत ही उसकी सहायता के लिए आगे आता है। लिहाजा वहां जितनी जल्दी परिपक्व फैसले लेने वाली सरकार बने उतना ही दोनों देशों के लिए अच्छा होगा।—विजय कुमार
