‘मणिपुर बना म्यांमार से भारत में नशे’ की आवक का सर्वाधिक सुगम प्रवेश स्थल!
punjabkesari.in Monday, Jun 29, 2026 - 02:19 AM (IST)
हाल ही में अमरीकी खुफिया एजैंसी सी.आई.ए. के एक पूर्व अधिकारी ‘जान किरियाकू’ ने एक इंटरव्यू में कहा कि सी.आई.ए. में नौकरी के दौरान उसे 2009 में अफगानिस्तान भेजा गया। वहां लश्करगाह में एक किसान से यह पूछने पर कि वह सब्जियां आदि उगाने की बजाय अफीम क्यों उगा रहा है तो किसान ने बताया कि आप अमरीकियों ने ही तो हमें 2001 में कहा था कि यदि तुम हमें बताओगे कि तालिबानी कहां हैं तो मैं अफीम उगा सकता हूं। मैंने तब से अफीम उगानी शुरू कर दी है।
वहां से वापस आकर जब उसने अपने इंचार्ज से यह सब करने का कारण पूछा तो उसे बताया गया कि यह हम लोग ईरान और रूस में भेजने के लिए कर रहे हैं ताकि वहां के लोगों को इसके अभ्यस्त और आलसी बना कर ईरान और रूस को कमजोर कर सकें। उक्त उदाहरण से स्पष्ट है कि यह नीति कोई नई नहीं बल्कि तब की है जब अंग्रेज भारत में थे। चूंकि उन्होंने चीन को भी हराना था, इसलिए उन्होंने अफगानिस्तान में अफीम की खेती करवा कर भारत के रास्ते चीन पहुंचा कर सब लोगों को ‘अफीमची’ बना दिया था। इसी नीति पर चलते हुए प्रथम और द्वितीय अफीम युद्ध (1839-42) लड़ा गया था जिसमें चीन को हरा कर इंगलैंड ने हांगकांग तथा अन्य इलाके छीन कर वहां अपनी कालोनियां बसा ली थीं। अत: यह पश्चिमी दुनिया के देशों को नशेड़ी बना कर कमजोर करके उन पर कब्जा कर लेने की पुरानी नीति है।
ऐसे मामलों में जो ‘रूट’ होता है वही समय आने पर ‘यूजर’ भी बन जाता है। अत: हमें अपने नागरिकों की भी सुरक्षा करनी है क्योंकि यदि उत्तर-पश्चिम के बाद उत्तर-पूर्व में भी नशा आना शुरू हो गया तो समस्या और बढ़ जाएगी।
इस समय हालत यह है कि अफगानिस्तान में तालिबान द्वारा नशीले पदार्थों पर प्रतिबंध लगाने के बाद म्यांमार दुनिया के विभिन्न हिस्सों में अफीम की सप्लाई करने का केंद्र बन गया है जिसका प्रभाव भारत के उत्तर पूर्वी भागों पर दिखाई देने भी लगा है। राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो ने 2026 की अपनी वाॢषक रिपोर्ट में कहा है कि मणिपुर, मिजोरम और नागालैंड राज्य म्यांमार से बड़ी मात्रा में अफीम भेजे जाने का शिकार हो रहे हैं तथा मणिपुर कोरिडोर से सबसे अधिक मात्रा में नशा आ रहा है। अत: अफीम तस्करी के इस रूट पर तत्काल कड़ा प्रतिबंध लगाने की जरूरत है।
