‘चंद! रिश्वतखोर पुलिस कर्मी’ बन रहे बदनामी का कारण!
punjabkesari.in Wednesday, Jun 24, 2026 - 02:43 AM (IST)
हालांकि पुलिस विभाग के कर्मचारियों व अधिकारियों से रिश्वतखोरी जैसी बुराइयों से दूर रहने की उम्मीद की जाती है, परन्तु देश में ‘चंद’ पुलिस कर्मचारी व अधिकारी जिनमें महिला पुलिस कर्मी भी शामिल हैं, भ्रष्टïाचार में लिप्त होकर अपने ही विभाग की बदनामी का कारण बन रहे हैं, जिसकी पिछले लगभग 4 महीनों की घटनाएं निम्न में दर्ज हैं :
* 26 फरवरी को ‘कोरिया’ (छत्तीसगढ़) में ‘भ्रष्टïाचार निरोधक ब्यूरो’ के अधिकारियों ने ‘पोडी’ पुलिस थाने में तैनात एक सब-इंस्पैक्टर ‘अब्दुल मुनाफ’ को ‘सत्येंद्र प्रजापति’ नामक एक किसान से 25,000 रुपए रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया।
* 23 मार्च को ‘उदयपुर’ (राजस्थान) में ‘भ्रष्टïाचार निरोधक ब्यूरो’की टीम ने ‘मांडवा’ के एस.एच.ओ. ‘निर्मल कुमार’ और एक कांस्टेबल ‘भला राम’ को एन.डी.पी.एस. (नशे) के एक केस में आरोपी का नाम हटाने के बदले में 8 लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया।
* 29 मार्च को ‘अनंतनाग’ (जम्मू-कश्मीर) में ‘भ्रष्टïाचार निरोधक ब्यूरो’ ने जब्त किए गए वाहन के दस्तावेज लौटाने के बदले में ‘लरनू’ पुलिस स्टेशन’ के विशेष पुलिस अधिकारी ‘इम्तियाज अहमद भट्टï’ को 18,000 रुपए रिश्वत लेते हुए पकड़ा।
* 1 मई को ‘श्रीनगर’ (जम्मू-कश्मीर)में ‘भ्रष्टïाचार निरोधक ब्यूरो’ के अधिकारियों ने ‘सौरा’ पुलिस थाने में तैनात हैड कांस्टेबल ‘परवेज अहमद राथर’ को एक एफ.आई.आर. में से शिकायतकत्र्ता का नाम हटाने के बदले में 15,000 रुपए रिश्वत लेते हुए पकड़ा।
* 29 मई को ‘पानीपत’ (हरियाणा) में ‘भ्रष्टïाचार निरोधक ब्यूरो’ के अधिकारियों ने ‘थाना तहसील कैम्प’ में तैनात ‘सतीश’ नामक एक हैड कांस्टेबल को 15,000 रुपए रिश्वत लेते हुए हिरासत में लिया।
* 6 जून को ‘केंद्रीय जांच ब्यूरो’ (सी.बी.आई.) ने भ्रष्टाचार की एक शिकायत पर कार्रवाई करते हुए चंडीगढ़ के पुलिस स्टेशन-39 में तैनात असिस्टैंट सब-इंस्पैक्टर ‘हितेश’ को 40,000 रुपए नकद के साथ पकड़ा।
* 15 जून को ‘राजस्थान भ्रष्टïाचार निरोधक ब्यूरो’ के अधिकारियों ने दहेज उत्पीडऩ के एक केस की जांच के सिलसिले में जयपुर आए ‘बेंगलुरु’ के एच.ए.एल. थाने की एक महिला एस.आई. ‘अनीता’ व 2 हैड कांस्टेबलों ‘उरगप्पा’ व ‘यतीश’ को दहेज उत्पीडऩ के एक मामले में आरोपियों को राहत देने के नाम पर 40,000 रुपए रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े जाने के बाद उन्हें निलम्बितकिया गया।
* 18 जून को ‘अहिल्या नगर’ (महाराष्टï्र) में भ्रष्टïाचार निरोधक ब्यूरो की टीम ने एक सड़क दुर्घटना की शिकायत दर्ज करने के एवज में 7000 रुपए की रिश्वत लेने के आरोप में 3 पुलिस कर्मियों को हिरासत में लिया।
* 18 जून को ही ‘जालंधर’ में ‘पंजाब विजीलैंस ब्यूरो’ की टीम ने ‘एंटी नार्कोटिक्स टास्क फोर्स’ में तैनात सब-इंस्पैक्टर ‘अमनदीप सिंह’ को 1,00,000 रुपए की रिश्वत लेते हुए पकड़ा।
* 22 जून को ‘टोहाना’ (हरियाणा) में ‘भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो’ की टीम ने कार्रवाई करते हुए एक सब-इंस्पैक्टर ‘महेंद्र सिंह’ को 35,000 रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया।
* 22 जून को ही ‘जालंधर’ के फिल्लौर थाने में तैनात महिला सब-इंस्पैक्टर ‘अमनदीप कौर’ को 20,000 रुपए रिश्वत लेते हुए पंजाब विजीलैंस ब्यूरो की टीम ने गिरफ्तार किया। उसने ड्रग्स के एक मामले में संलिप्त आरोपी को जमानत दिलाने में मदद करने के बदले यह रकम मांगी थी।
* और अब 23 जून को पंजाब विजीलैंस ब्यूरो ने ‘भोगपुर’ (पंजाब) में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग में तैनात इंस्पैक्टर ‘रजनीश रामपाल’ तथा जिला फूड कंट्रोलर जालंधर कार्यालय में तैनात जूनियर ऑडिटर ‘मानव भनोट’ को क्रमश: 70,000 और 50,000 रुपए रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया। पहले भी पुलिस के चंद कर्मचारी अपनी ऐसी हरकतों के कारण कानून के शिकंजे में फंस चुके हैं। पुलिस कर्मचारियों का इस प्रकार का गलत आचरण सुरक्षा व्यवस्था के लिए भारी खतरा सिद्ध हो सकता है। अत: ऐसा करने वाले पुलिस कर्मियों को कठोर और शिक्षाप्रद दंड देने की आवश्यकता है, ताकि दूसरों को भी इससे सबक मिले और वे रिश्वत लेने की बात तो दूर रही, इसके नाम से भी डरने लगें।—विजय कुमार
