‘भ्रष्टाचार का महारोग’ ‘देश में खतरनाक हद तक पहुंचा’

2021-07-11T05:05:53.93

सरकार के लाख प्रयासों के बावजूद देश में भ्रष्टाचार का महारोग लगातार बढ़ता ही जा रहा है जिसमें कई छोटे-बड़े कर्मचारियों और अधिकारियों को शामिल पाया जा रहा है। यह महारोग कितना गंभीर रूप धारण कर चुका है, यह पिछले 10 दिनों के निम्र उदाहरणों से स्पष्ट है : 

* 1 जुलाई को जयपुर विकास प्राधिकरण के इंजीनियर निर्मल कुमार गोयल के मकान से उसकी आय से 1450 गुणा अधिक करोड़ों रुपए की अवैध सम्पत्ति पकड़ी गई जिसमें 30 किलो सोना, 5 लग्जरी कारों के अलावा आलीशान बंगले शामिल हैं।
* 1 जुलाई को चित्तौडग़ढ़ के डी.टी.ओ. मनीष शर्मा के घर पर छापेमारी के दौरान 2 करोड़ रुपए की अवैध स पत्ति के दस्तावेजों के अलावा एक लाख रुपए नकद, कई महंगी गाडिय़ों व लैटों के दस्तावेज जब्त किए गए। 

* 1 जुलाई को ही जोधपुर के थाना सुरसागर के एस.एच.ओ. प्रदीप कुमार के जोधपुर, भोपालगढ़ और बीकानेर स्थित ठिकानों पर हुई छापेमारी में लगभग 4.43 करोड़ रुपए निवेश के दस्तावेज पकड़े गए।
* 2 जुलाई को पटना अदालत ने बिहार परिवहन विभाग के एक पूर्व इंस्पैक्टर अर्जुन प्रसाद की 4 करोड़ 52 लाख, 28 हजार रुपए की अवैध तरीकों से अर्जित स पत्ति जब्त करने का आदेश जारी किया।
* 5 जुलाई को अधिकारियों ने शिकायतकत्र्ताओं से 15 लाख रुपए रिश्वत लेने के आरोपी पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एक वरिष्ठï पर्यावरण इंजीनियर संदीप बहल को तत्काल प्रभाव से स्थानांतरित करने व उसके विरुद्ध जांच के आदेश जारी किए। 

* 5 जुलाई को 104 करोड़ रुपए के बैंक घोटाले के मामले में 75 लाख रुपए रिश्वत मांगने के आरोप में गिर तार ई.डी. के 2 अधिकारियों की आवाज के नमूनों का मिलान करने का आदेश दिया गया।
* 9 जुलाई को छत्तीसगढ़ पुलिस ने आय से अधिक स पत्ति के मामले में निलंबित अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक जी.पी. सिंह पर सरकार के विरुद्ध साजिश रचने के आरोप में राजद्रोह का मामला दर्ज किया। उसके लगभग 15 ठिकानों पर 1 से 3 जुलाई के बीच मारे गए छापों के दौरान अधिकारियों ने लगभग 10 करोड़ रुपए की चल और अचल स पत्ति पकड़ी थी।
* 9 जुलाई को मध्य प्रदेश में ग्वालियर के पी.डब्ल्यू.डी. विभाग के एस.डी.ओ. रविंद्र सिंह कुशवाहा के ग्वालियर स्थित बंगले पर छापेमारी में लगभग 20 करोड़ रुपए  की अवैध स पत्ति का पता चला। एस.डी.ओ. के लगभग 4 करोड़ रुपए कीमत वाले बंगले के दस्तावेजों के अलावा 75 बीघा जमीन और ग्वालियर तथा भोपाल में कई लैटों, प्लाटों और दुकानों के दस्तावेज, 5 किलो चांदी और 3.5 लाख रुपए नकद जब्त किए गए। 

* 9 जुलाई को पंजाब विजीलैंस ब्यूरो ने यूनिसिपल कमेटी सुल्तानपुरलोधी के ई.ओ. बलजीत सिंह और क्लर्क अजीत सिंह को 15,000 रुपए रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा।
* 9 जुलाई को भ्रष्टïाचार निरोधक ब्यूरो जयपुर की टीम ने राजस्थान लोक सेवा आयोग के जूनियर अकाऊंटैंट सज्जन सिंह गुर्जर को 1 लाख रुपए रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों काबू किया। 

* 10 जुलाई को मुज फरपुर के जिला परिवहन अधिकारी रजनीश लाल के आवास पर छापेमारी के दौरान आय से अधिक 1.24 करोड़ रुपए की अवैध स पत्ति का पता चलने पर उसे निलंबित किया गया। इसमें 51 लाख रुपए से अधिक की नकदी और 60 लाख रुपए के स्वर्णाभूषणों के अलावा जमीन और दूसरी प्रापर्टी के दस्तावेज शामिल हैं।
इससे पूर्व इसी वर्ष फरवरी में मध्य प्रदेश के सतना में एक सहायक समिति प्रबंधक राजमणि मिश्रा के आवास सहित कई ठिकानों पर छापेमारी में 2 करोड़ से अधिक की अवैध स पत्ति का पता चला था। मार्च में मारे गए छापे में मध्य प्रदेश में ही बैतूल के एक सरकारी स्कूल के अध्यापक के यहां 5 करोड़ रुपए से अधिक की सम्पत्ति का पता चला।

मई में सी.बी.आई. ने भोपाल में किशोर मीणा नामक क्लर्क के यहां छापा मार कर 3.1 करोड़ रुपए नकद, 387 ग्राम सोना और 600 ग्राम चांदी जब्त की थी। उसने अपने घर में लॉकर बनवा रखा था और नोट गिनने की मशीन लगवा रखी थी। 

ये तो चंद उदाहरण मात्र हैं, इनके अलावा भी न जाने कितनी ऐसी घटनाएं हुई होंगीं। स्पष्ट है कि पद का दुरुपयोग कर सरकारी कर्मचारियों व अधिकारियों का एक वर्ग बड़े पैमाने पर रिश्वत एवं अन्य अनुचित तरीकों से अपनी आय से कहीं अधिक करोड़ों रुपयों की स पत्ति जुटा रहा है। सरकार द्वारा भ्रष्टाचार पर नकेल कसने के तमाम प्रयासों और दावों के बावजूद इसका जारी रहना कानून लागू करने वाले अधिकारियों पर कई तरह के प्रश्र खड़े करता है। लिहाजा इस बुराई पर रोक लगाने के लिए अधिक कठोरता बरतने और दोषी अधिकारियों को निलंबित करने की बजाय नौकरी से निकालने, उनकी स पत्तियों को जब्त करने तथा उनके परिजनों को सरकारी नौकरियों के अयोग्य ठहराने जैसे कठोर कदम उठाने की जरूरत है।—विजय कुमार


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Chief Editor

vijay kumar

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