‘कानून होने के बावजूद’  ‘महिलाएं लगातार घरेलू हिंसा की शिकार’

punjabkesari.in Thursday, Jul 14, 2022 - 03:46 AM (IST)

महिलाओं की घरेलू हिंसा से सुरक्षा के लिए देश में ‘दहेज प्रतिरोध कानून’ (1961),, ‘अश्लील चित्रण रोकथाम कानून’ (1986), ‘घरेलू हिंसा निवारण कानून’ (2005), ‘बाल विवाह रोकथाम कानून’ (2006)आदि कानून मौजूद होने के बावजूद यहां हर तीन में से एक महिला घरेलू प्रताडऩा की शिकार हो रही है, जिसके लगभग 1 महीने के उदाहरण निम्र में दर्ज हैं :

* 16 जून को अलीगढ़ के गांव ‘सिंधौलीखुर्द’ में एक 22 वर्षीय महिला ने घरेलू कलह और पति द्वारा बुलेट मोटरसाइकिल के लिए पैसे मांगने से तंग आकर दुपट्टो से फंदा बनाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली।

* 26 जून को रतलाम के लखमाखेड़ी गांव में एक महिला ने जब अपने पति को कुछ सामान लाने को कहा तो उसके पति ने उसे बुरी तरह पीट डाला।
* 02 जुलाई को सोनीपत में पति द्वारा परेशान करने पर एक महिला ने आत्महत्या कर ली। पुलिस ने इस सिलसिले में मृतका के पति के विरुद्ध उसे आत्महत्या के लिए विवश करने के आरोप में केस दर्ज किया।
* 03 जुलाई को ‘बांदा’ में शराब पीने के लिए पैसे देने से इंकार करने पर एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी को डंडे से पीटने के बाद मकान की छत से नीचे फैंक कर गंभीर रूप से घायल कर दिया।महिला का आरोप है कि उसका पति नशा करने के लिए अक्सर उससे रुपए-पैसे और गहने मांगता है और इंकार करने पर उसके साथ मारपीट करता है।

* 05 जुलाई को बिलासपुर के ‘मोतिमपुर’ में घरेलू विवाद के चलते एक व्यक्ति ने पहले तो अपनी भाभी से गाली-गलौच किया और फिर उसे पीटना शुरू कर दिया। इसी बीच महिला का पति भी घर आ पहुंचा और वह भी उसे पिटने से बचाने की बजाय अपने भाई के साथ मिलकर उसे पीटने लगा, जिसके विरुद्ध पीड़ित महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई।

* 11 जुलाई को अपने पति से अलग रहने वाली एक महिला जब उत्तर प्रदेश में संभल के ‘घंसूरपुर’ गांव में अपने बेटे से मिलने आई तो उसके पति ने तकिए से गर्दन दबा कर उसे मार डाला।
* 11 जुलाई को ही बिहार के समस्तीपुर में एक महिला द्वारा अपने पति के अवैध संबंधों का विरोध करने पर उसने पत्नी की हत्या कर उसकी लाश बिजली के खंभे से लटका दी।

* 12 जुलाई को पठानकोट के गांव ‘तलारिया’ की रहने वाली महिला ने अपने पति के विरुद्ध दहेज के लिए उसे प्रताडि़त करने, मारपीट करने व बीमारी के कारण बेसहारा छोड़ देने के आरोप में थाने में शिकायत दर्ज करवाई।
* 12 जुलाई को ही मलोट के संदीप नगर में एक व्यक्ति ने गला घोंट कर अपनी बहू को मार डाला।
* 12 जुलाई को ही उत्तर प्रदेश के ललितपुर में घरेलू विवाद के चलते एक महिला अपने 3 मासूम बच्चों को लेकर कुएं में कूद गई। लोगों ने महिला को तो बचा लिया लेकिन तीनों बच्चों की मौत हो गई। इसी दिन महोबा के ‘सियावन’ गांव में शराबी पति की प्रताडऩा, मारपीट तथा जुड़वां बेटियां पैदा होने पर ससुरालियों के तानों से परेशान महिला ने अपनी एक वर्ष की मासूम बच्ची के साथ आत्महत्या कर ली।

* 12 जुलाई को ही कपूरथला में एक महिला ने अपने पति के विरुद्ध शिकायत लिखवाई, जिसमें उसने अप्राकृतिक सम्बन्ध बनाने से इन्कार करने पर उससे मारपीट करने का आरोप लगाया।

* 12 जुलाई को ही हिसार पुलिस ने एक महिला के विरुद्ध अपनी 9 वर्षीय बेटी को किसी व्यक्ति को गोद देने के बदले में उससे 2 लाख रुपए की मांग करने, उसके नग्न (अश्लील) चित्र वायरल करने व वेश्यावृत्ति करवाने के उद्देश्य से उसे बेचने का प्रयास करने के आरोप में केस दर्ज किया। 

उपरोक्त घटनाओं से स्पष्टï है कि महिलाओं के विरुद्ध हिंसा से निपटने के लिए कानून होने के बावजूद इनका प्रभावी ढंग से कार्यान्वयन न होने के कारण महिलाएं घरेलू हिंसा की शिकार हो रही हैं, क्योंकि गवाहों के सामने न आने से इन मामलों में कम आरोपियों को ही दंड मिल पाता है।

यही नहीं, विशेष अदालतों की कमी तथा पुलिस जांच में ढिलाई भी महिलाओं के विरुद्ध अपराधों के बढऩे का एक बड़ा कारण है। अत: जब तक महिला सुरक्षा कानूनों के प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू तथा अपराधियों के मन में कानून का भय पैदा नहीं किया जाएगा, तब तक महिलाओं पर घरेलू हिंसा और उत्पीडऩ समाप्त होने की संभावना कम ही प्रतीत होती है।— विजय कुमार


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