यौन उत्पीड़न के आरोप लगाने वाली चीन की स्टार टेनिस खिलाड़ी लापता

11/22/2021 2:52:30 AM

चीन की टैनिस स्टार खिलाड़ी पेंग शुआई, जो बीजिंग, लंदन और रियो ओलिम्पिक में चीन का प्रतिनिधित्व कर चुकी है और एक हाई प्रोफाइल नागरिक भी है, 2 नवम्बर को चीन के पूर्व वाइस प्रीमियर पर यौन उत्पीडऩ के आरोप लगाने के बाद से लापता है। संयुक्त राष्ट्र और अमरीका ने अब उसके सही-सलामत होने के सबूत सामने रखने के लिए चीन से कहा है। 

चीन में सरकार की आलोचना करने वालों के लापता होने के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। हाल ही का एक मामला अरबपति अभिनेता झाओ वेई का है। अगस्त में वह अचानक सार्वजनिक जीवन से गायब हो गए थे। 

तभी चीन सरकार ने सैलिब्रिटीज के विरुद्ध कार्रवाई का अभियान छेड़ा था। चीन सरकार का आरोप है कि इन सैलिब्रिटीज के प्रभाव के कारण देश के युवा गुमराह हो रहे हैं। अगस्त से उनकी फिल्में और टी.वी. शो चीन में वैब स्ट्रीमिंग साइट्स से हटा दिए गए जिनमें झाओ ने अभिनय किया था। यह अब तक साफ नहीं हो सका है कि झाओ को उसके घर में नजरबंद रखा गया है या उसने खुद को ही पब्लिक लाइफ से अलग कर लिया है। 

राष्ट्रपति शी जिनपिंग के कार्यकाल में जिन बड़ी शख्सियतों पर गाज गिरी, उनमें इंटरपोल के पूर्व प्रमुख मेंग होंगवेई भी हैं। 2018 में उनके कार्यकाल को अचानक खत्म कर दिया गया। उसके बाद चीन लौटने पर वह गायब हो गए। चीन सरकार ने उन पर रिश्वत लेने का आरोप लगाया और उन्हें सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी से निकाल दिया गया। अब वह 13 वर्ष की कैद काट रहे हैं। 

अरबपति कारोबारी और अलीबाबा ग्रुप के मालिक जैक मा को भी सरकार की आलोचना करना महंगा पड़ा था। वह पिछले वर्ष गायब हुए और उनकी कम्पनी समूह के विरुद्ध चीन सरकार ने कार्रवाई शुरू की थी। उसके कई महीनों बाद तक उनका कहीं अता-पता नहीं रहा। हांगकांग के पुस्तक विक्रेता गुई मिन्हाई का नाम भी इनमें शामिल है जो थाईलैंड में छुट्टी मनाते समय अचानक अक्तूबर 2015 में गायब हो गए और 2016 में चीन में नजर आए। 2018 में उन्हें रिहा किया गया लेकिन कुछ दिन के बाद जब वह स्वीडन के एक राजनयिक से मिलने जा रहे थे, तब सादी वर्दी में आए चीनी पुलिसकर्मियों ने उन्हें फिर हिरासत में ले लिया। 

पेंग के लापता होने की बात करें तो उसके आरोप चीन के लिए बहुत बड़ी बात इसलिए है क्योंकि पहली बार किसी कथित पीड़िता ने कम्युनिस्ट पार्टी के किसी वरिष्ठ अधिकारी पर सीधे तौर पर यौन उत्पीडऩ का आरोप लगाया है। मी-टू आंदोलन अभी तक कम्युनिस्ट पार्टी के ऊपरी पायदान तक नहीं पहुंचा है। कई टैनिस सितारों, खेल निकायों, सरकारों और मानवाधिकार संगठनों ने भी पेंग शुआई के समर्थन में अपनी बात रखी है। व्हाइट हाऊस के प्रैस सचिव जेन साकी ने कहा कि राष्ट्रपति जो बाइडेन का प्रशासन चाहता था कि चीन पेंग के ठिकाने का ‘स्वतंत्र, विश्वास करने लायक सबूत’ पेश करे। संयुक्त राष्ट्र ने भी पेंग के दावों की पूरी तरह से पारदर्शी जांच पर जोर दिया है। 

दरअसल, 2 नवम्बर को चीन की टैनिस खिलाड़ी पेंग शुआई ने चीनी सोशल मीडिया ‘वीबो’ पर पोस्ट डालकर बताया कि चीन के पूर्व प्रीमियर झांग गाओली ने सैक्स के लिए उस पर दबाव बनाया था। इस आरोप के कुछ देर बाद ही उसकी पोस्ट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म  से हटा दी गई। हालांकि तब तक कई लोगों ने पोस्ट के स्क्रीनशॉट ले लिए और यह बात वायरल हो चुकी थी। इसी घटना के बाद से ही वह लापता बताई जा रही है। ऐसी भी आशंका है कि उसके घर पर हमला किया गया  लेकिन इस मामले को दबाने की कोशिश का जा रही है। 

राज्य प्रसारक सी.जी.टी.एन. ने पेंग के वल्र्ड टैनिस एसोसिएशन प्रमुख स्टीव साइमन को कथित तौर पर भेजी एक ईमेल शेयर करते हुए कहा कि वह अपने घर पर ‘आराम’ कर रही है और उसके घर पर हमले का आरोप ‘सत्य नहीं’ है। हालांकि साइमन ने इस ई-मेल की प्रामाणिकता पर सवाल उठाया है। पेंग के गायब होने की खबरों के बाद चीन सरकार पर दबाव बनाने के लिए सोशल मीडया पर ‘हैशटैग व्हेयर इज पेंग शुआई ’ (कहां है पेंग शुआई) नाम से एक अभियान चलाया गया है। 

बीजिंग ने इन आरोपों पर बमुश्किल कोई टिप्पणी की है - विदेश मंत्रालय के प्रवक्ताओं ने इसे आंतरिक मामला बताकर खारिज कर दिया लेकिन सैंसरशिप लगाने में तीव्रता दिखाई गई। न केवल पेंग की पोस्ट को तुरंत ही हटा दिया गया बल्कि चीनी सोशल मीडिया पर उससे जुड़े सर्च के शब्दों को भी प्रतिबंधित कर दिया गया जैसे कि ‘टैनिस’ और ‘पेंग’।

चीनी शासक, कई तानाशाही देशों की ही तरह सच्चाई को गलत तरीके से पेश करने और दबाने की हर सम्भव कोशिश करते हैं। अधिकतर मामलों में इन्हें किसी भी तरह से स्वीकार करने को तैयार नहीं होते और वास्तविक दुनिया से तो वे इस तरह कटे हुए हैं कि उन्हें इस बात की भी परवाह नहीं कि उनकी इन हरकतों का बाकी दुनिया में कैसा संदेश जा रहा है। हालांकि, पेंग के लापता होने के बाद चीन पर दुनिया भर से काफी दबाव बनने लगा है। विशेष रूप से वल्र्ड टैनिस एसोसिएशन का रुख चीन के लिए चिंता पैदा कर सकता है। 

बीजिंग 2022 शीतकालीन ओलिम्पिक की मेजबानी करने की तैयारी कर रहा है और पहले से ही शिनजियांग और अन्य जगहों पर चीन द्वारा मानवाधिकारों के हनन को लेकर संभावित अमरीकी राजनयिक बहिष्कार की तलवार लटक रही है। उइगर कार्यकत्र्ता और अन्य लोग खेलों के व्यापक बहिष्कार की पैरवी कर रहे हैं। चीन पर असर लाजिमी है क्योंकि वह चाहता है कि सारे देश 2022 के शीतकालीन ओलिम्पिक्स में भाग लें। इसलिए शायद कुछ समय के लिए चीन सरकार को विश्व भर के देशों की सोच को नजरअंदाज करना मुश्किल होगा। ऐसे में यदि यह सोच लिया जाए कि शी जिनपिंग अपनी आधिकारिक नीति बदल देंगे यह गलत होगा। परन्तु क्या कुछ देर के लिए उस पर अंकुश लगा सकेंगे। यह सोचने वाली बात है।


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