पंजाब में दिन दिहाड़े हो रही बैंक लूटने की घटनाएं सुरक्षा प्रबंधों पर भारी प्रश्नचिन्ह

punjabkesari.in Sunday, May 08, 2022 - 04:00 AM (IST)

आतंकवाद के दिनों में 1987 में लुधियाना की एक बैंक डकैती बारे हमारे एक पाठक ने बताया कि उस दिन बैंक खुलने के कुछ ही समय के भीतर लुटेरों ने धावा बोल कर तिजोरी की चाबियां छीनीं और थोड़ी ही देर में 5.7 करोड़ रुपए की भारी-भरकम राशि लूट कर ले गए थे। पंजाब में बैंक लूटने की हालिया घटनाओं को देखते हुए मन में शंका पैदा होती है कि कहीं ये उन्हीं दिनों की वापसी की आहट तो नहीं है : 

* 22 दिसम्बर, 2021 को सशस्त्र लुटेरों ने हमला करके जालंधर में ग्रीन माडल टाऊन स्थित एक बैंक की शाखा से 16 लाख रुपए लूट लिए। 
* 19 फरवरी, 2022 को तरनतारन जिले के नौशहरा पन्नुआं गांव में स्थित एक बैंक से 3 सशस्त्र लुटेरे 37.72 लाख रुपए लूट कर ले गए।
* 25 फरवरी को सशस्त्र लुटेरों ने बाबा बकाला स्थित एक बैंक में लूट का प्रयास किया जिसे बैंक के कैशियर ने नाकाम कर दिया। 

* और अब 6 मई को अमृतसर में सैंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की जी.टी. रोड शाखा से दिन-दिहाड़े 4 नकाबपोश युवक बैंक कर्मचारियों को बंधक बना कर कैशियर के काऊंटर पर रखे हुए पौने 6 लाख रुपए लूट कर बैंक से कुछ ही दूर खड़ी सफेद रंग की कार में सवार होकर फरार हो गए। एक लुटेरा ग्राहक बनकर बैंक के अंदर दाखिल हुआ और फिर कुछ ही समय बाद 3 अन्य युवक अंदर आ घुसे। यह घटना दोपहर को उस समय हुई जब बैंक के कर्मचारी अपने काम में व्यस्त थे। 

अनेक बैंक शाखाओं पर कोई सुरक्षागार्ड न होने तथा सुरक्षा कर्मचारियों की लापरवाही से इस तरह की घटनाएं हो रही हैं। अनेक मामलों में अपराधी बैंकों और ए.टी.एम. बूथों आदि में लगाए गए सी.सी.टी.वी. कैमरों के सही ढंग से काम न करने के कारण बच निकलते हैं। कई जगह कैमरों के लैंस पर रंग छिड़क कर उन्हें नाकारा कर देने या डिजीटल वीडियो रिकार्डर (डी.वी.आर.) साथ ले जाने के कारण भी वे पकड़ में नहीं आ पाते। 

अत: बैंक प्रबंधन द्वारा सभी बैंकों और ए.टी.एम. बूथों पर सुरक्षा गार्ड तैनात करके तथा अन्य उपायों से इनकी सुरक्षा अभेद्य बनाने की आवश्यकता है। इसके लिए बैंकों की सुरक्षा व्यवस्था का आडिट करना भी आवश्यक है।—विजय कुमार  


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