श्रीकृष्ण ने राक्षस को पकड़ अपनी धोती में लिया बांध

Tuesday, November 14, 2017 2:40 PM
श्रीकृष्ण ने राक्षस को पकड़ अपनी धोती में लिया बांध

एक बार कृष्ण और बलराम किसी जंगल से गुजर रहे थे। चलते-चलते काफी समय बीत गया और अब सूरज भी लगभग डूबने वाला था। अंधेरे में आगे बढ़ना संभव नहीं था, इसलिए कृष्ण बोले, ‘‘दाऊ हम ऐसा करते हैं कि अब सुबह होने तक यहीं ठहर जाते हैं, भौर होते ही हम अपने गंतव्य की ओर बढ़ चलेंगे।’’ बलराम बोले, ‘‘पर इस घने जंगल में हमें खतरा हो सकता है। यहां सोना किसी भी प्रकार से उचित नहीं होगा। हमें जागकर ही रात बितानी होगी।’’

 


‘‘अच्छा, हम ऐसा करते हैं कि पहले मैं सोता हूं और तब तक तुम पहरा देते रहो और फिर जैसे ही तुम्हें नींद आए तुम मुझे जगा देना, तब मैं पहरा दूंगा और तुम सो जाना।’’ कृष्ण ने सुझाव दिया। बलराम तैयार हो गए। कुछ ही पलों में कृष्ण गहरी नींद में सो गए। तभी बलराम को एक भयानक आकृति उनकी ओर आती दिखी वह कोई राक्षस था। राक्षस उन्हें देखते ही जोर से चीखा फिर बलराम बुरी तरह डर गए। इस घटना का एक विचित्र असर हुआ कि भय के कारण बलराम का आकार कुछ छोटा हो गया व राक्षस और विशाल हो गया। उसके बाद राक्षस एक बार और चीखा और पुन: बलराम डर कर कांप उठे, अब बलराम और भी सिकुड़ गए और राक्षस पहले से भी बड़ा हो गया। राक्षस धीरे-धीरे बलराम की ओर बढ़ने लगा, बलराम पहले से ही भयभीत थे और उस विशालकाय राक्षस को अपनी ओर आता देख जोर से चीख पड़े- ‘कृष्णा’ और चीखते ही वहीं मूर्च्छित होकर गिर पड़े।

 


बलराम की आवाज सुनकर कृष्ण उठे, बलराम को वहां देख उन्होंने सोचा कि बलराम पहरा देते-देते थक गए और सोने से पहले उन्हें आवाज दे दी। अब कृष्ण पहरा देने लगे। कुछ देर बाद वही राक्षस उनके सामने आया और जोर से चीखा। कृष्ण जरा भी घबराए नहीं और बोले, ‘‘बताओ तुम इस तरह चीख क्यों रहे हो, क्या चाहिए तुम्हें?’’ इस बार भी कुछ विचित्र घटा। कृष्ण के साहस के कारण उनका आकार कुछ बढ़ गया और राक्षस का आकार कुछ घट गया। राक्षस को पहली बार कोई ऐसा मिला था, जो उससे डर नहीं रहा था। घबराहट में वह पुन: कृष्ण पर जोर से चीखा! इस बार भी कृष्ण नहीं डरे और उनका आकार और भी बड़ा हो गया जबकि राक्षस पहले से भी छोटा हो गया। कृष्ण मुस्कुरा उठे और फिर से बोले, ‘‘बताओ तो क्या चाहिए तुम्हें?’’ फिर क्या था राक्षस सिकुड़ कर बिल्कुल छोटा हो गया और कृष्ण ने उसे हथेली में लेकर अपनी धोती में बांध लिया और फिर कमर में खोंसकर रख लिया।



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