आस्था और पर्यटन का केंद्र है नासिक, यहीं लक्ष्मण ने काटी थी शूर्पणखा की नाक

Thursday, October 26, 2017 2:38 PM
आस्था और पर्यटन का केंद्र है नासिक, यहीं लक्ष्मण ने काटी थी शूर्पणखा की नाक

मान्यताओं के अनुसार मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम 14 वर्ष के वनवास के दौरान नासिक के पास स्थित तपोवन नामक स्थान पर ठहरे थे। यहीं लक्ष्मण ने शूर्पणखा की नाक काटी थी और इसलिए इस जगह का नाम नासिक पड़ा, जोकि एक नाक का ही अनुवाद रूप है। 150 ईसा पूर्व के प्रसिद्ध दार्शनिक प्लोतेमी ने भी नासिक का उल्लेख किया है। नासिक वर्तमान में महाराष्ट्र के सबसे तेजी से बढ़ते शहरों में से है। इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा, औद्योगिक और कई अन्य पहलुओं में नासिक का उल्लेखनीय विकास हुआ है।


नासिक को नासहिक के नाम से भी जाना जाता है। नासिक महाराष्ट्र राज्य के उत्तर-पश्चिम में नापा घाटी के पश्चिमी घाट पर स्थित है। नासिक भारत में एक प्रमुख तीर्थ स्थल है और सांस्कृतिक रूप से हमारे भारत के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। अतीत में नासिक सत्वहना राजवंश की राजधानी थी। 16वीं सदी के दौरान शहर मुगल शासन के अधीन आया था और गुलशानाबाद कहा जाता था। उसके बाद यह पेशवाओं के पास था, जो 19वीं सदी के अंत में अंग्रेजों से हार गए थे। नासिक को अंगूर के भारी उत्पादन मात्रा के कारण भारत की शराब की राजधानी के रूप में जाना जाता है।


प्रमुख आकर्षण
त्र्यंबकेश्वर-
त्र्यंबकेश्वर भारत के सबसे ज्यादा पवित्र माने गए स्थलों में से एक है। यह नासिक के पास स्थित है तथा भगवान शिव के 12 ज्योर्तिलिंगों में से एक यहां स्थित है। मान्यताओं के अनुसार, त्र्यंबकेश्वर जाने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।


रामकुंड- रामकुंड टैंक नासिक के क्षेत्र में मुख्य आकर्षण में से एक है। इसका निर्माण 300 से अधिक साल पहले, 1696 में चितारो खातरकर द्वारा किया गया। यह पवित्र टैंक 12 मी. से 27 मी. के एक विशाल क्षेत्र पर फैला है। मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम और सीता जी ने वनवास के दौरान इस टैंक में स्नान किया था। मृत व्यक्ति की आत्मा को मोक्ष दिलाने के लिए इस टैंक में राख विसर्जित की जाती है।


सीता गुफा- सीता गुफा को लेकर मान्यता है कि माता सीता को स्वर्ण मृग (सोने का हिरण) यहीं दिखा था तथा यहीं से साधु के भेस में लंका नरेश रावण ने माता सीता का हरण किया था। मंदिर के अंदर एक पुराना शिवलिंग है जिसके बारे में कहा जाता है कि सीता जी यहां शिव की पूजा किया करती थीं। 


तपोवन- तपोवन कपिला नदी और गोदावरी नदी का संगम है। यहीं पर माता सीता की रसोई और उनके नहाने की जगह भी स्थित है।


कालाराम मंदिर- कालाराम मंदिर अपनी स्थापत्य शैली में त्र्यंबकेश्वर मंदिर जैसा दिखता है। इसका निर्माण काले पत्थरों से किया गया है। मंदिर 70 फुट लंबा है और इसका शिखर तांबे का बना है जिस पर सोना चढ़ाया गया है। इस मंदिर में भगवान राम, सीता और लक्ष्मण की मूर्तियां विराजित हैं।


पाडंवलेनी गुफाएं- पांडवलेनी गुफाएं नासिक में स्थित हैं, ये गुफाएं वास्तुकला प्रेमियों को बेहद पसंद आती हैं। त्रिवाष्मी हिल्स के पठार पर बसी पांडवलेनी गुफाएं 20 से अधिक सदी पुरानी हैं।


दूधसागर झरना- दूधसागर झरना महाराष्ट्र राज्य में सर्वाधिक आकर्षक झरनों में से एक है। नासिक के पास सोमेश्वर में स्थित यह झरना एक लोकप्रिय पिकनिक स्पॉट है जिसे सबसे ज्यादा मानसून के दौरान देखा जाता है।


भागुर- भागुर भारत के इतिहास में एक बहुत ही महत्वपूर्ण जगह है। यह प्रतिष्ठित स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर का जन्मस्थान है। यहां भागुर देवी का मंदिर है।


मौसम- शीतकाल और मानसून नासिक की यात्रा के लिए आदर्श समय के रूप में जाने जाते हैं। मार्च से मई के दौरान यहां तेज गर्मी होती है।


कैसे पहुंचें- हवाई यात्रा करने वालों के लिए नासिक हवाई अड्डा सबसे पास है। नासिक, मुंबई से लगभग 180 कि.मी. तथा पुणे से करीब 200 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। रेल मार्ग से नासिक, मुंबई, पुणे सहित देश के कई प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। सड़क मार्ग से भी यहां असंख्य विकल्प उपलब्ध हैं। राज्य सरकार द्वारा चलाई जाने वाली एस.टी. बसों और निजी बसों द्वारा यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। 



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