कष्ट रहित जीवन के लिए कल ऐसे करें पूजा

Wednesday, January 10, 2018 11:10 AM
कष्ट रहित जीवन के लिए कल ऐसे करें पूजा

कल गुरुवार दि॰ 11.01.18 को माघ कृष्ण दशमी पर विशाखा नक्षत्र होने के कारण देवी जगद्धात्री का पूजन करना श्रेष्ठ रहेगा। जगद्धात्री का अर्थ है जगत रक्षिका अर्थात जगदंबा। शास्त्रों ने इन्हें ही अपराजिता कहा है। सिंहवाहिनी चतुर्भुजा, त्रिनेत्रा व रक्तांबरा जगद्धात्री ही तंत्र विद्या की देवी हैं। शास्त्र शक्ति-संगम-तंत्र, उत्तर-कामाख्या-तंत्र, भविष्यपुराण व दुर्गाकल्प में जगद्धात्री पूजा का उल्लेख है। शास्त्र केनोप-निषद में हेमवती का वर्णन जगद्धात्री का ही रूप है। शास्त्रनुसार हर माह के कृष्ण व शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि देवी अपराजिता अर्थात जगद्धात्री को संबोधित है। देवी जगद्धात्री राजस व तामस दोनों का प्रतीक हैं। 


मान्यतानुसार जगद्धात्री मूल जगदंबा है जो काली व दुर्गा का युग्मक स्वरूप हैं। इन्हीं की कृपा से सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। पौराणिक कथा के अनुसार कालांतर में महादुर्गा महिषासुर का वध कर संसार को त्रिलोक के आतंक से मुक्त करती हैं। जिससे देवताओं को स्वर्ग का अधिपत्य मिलता है व देवताओं में घमंड आ जाता है। जिसे देवी जगद्धात्री के यक्ष देवताओं के घमंड का नाश कर देते हैं। इनके पूजन से जीवन का कल्याण होता है, शत्रु नतमस्तक होते हैं तथा जीवन कष्ट रहित होता है। 


पूजन विधि: घर के उत्तर दिशा में उत्तरमुखी होकर पीले वस्त्र पर चनादाल भरे पीतल के कलश पर नारियल रखकर स्थापना कर देवी जगद्धात्री का दशोपचार पूजन करें। गौघृत में हल्दी मिलाकर दीप करें, कर्पूर जलाकर धूप करें, पीले फूल चढ़ाएं, हल्दी से तिलक करें, दूध व शहद चढ़ाएं, केले का भोग लगाएंं तथा 1 माला इस विशिष्ट मंत्र को जपें। पूजन के बाद भोग को पीपल के नीचे रख दें। 


पूजन मंत्र: ॐ परितुष्टा जगद्धात्री प्रत्यक्षं प्राह चंडिका नमोऽस्तु ते॥
पूजन मुहूर्त: दिन दिन 12:08 से दिन 12:49 तक। (अभिजीत)


उपाय
कष्टों से मुक्ति हेतु हल्दी मिले दूध में अपनी छाया देखकर देवी जगद्धात्री पर चढ़ाएं।


पारिवारिक कल्याण हेतु देवी जगद्धात्री के निमित पीली सरसों कर्पूर से जलाएं।


मनोकामनाओं की पूर्ति हेतु देवी जगद्धात्री पर चढ़ी शहद किसी ब्राह्मणी को दान दें।

आचार्य कमल नंदलाल
ईमेल: kamal.nandlal@gmail.com

 



अपना सही जीवनसंगी चुनिए | केवल भारत मैट्रिमोनी पर- निःशुल्क रजिस्ट्रेशन