बाजार में चीनी के दाम में सुस्ती

Sunday, June 11, 2017 11:10 AM
बाजार में चीनी के दाम में सुस्ती

मुम्बई : रिफाइनरी और मिलों द्वारा 5,00,000 टन तक की कच्ची चीनी के शुल्क मुक्त आयात को सरकार से अनुमति मिलने के बाद भारतीय बाजार में चीनी के दाम सुस्त पड़ रहे हैं। इस दबाव का एक अन्य कारण यह है कि वैश्विक बाजार में चीनी के दामों में तेज गिरावट आई है जिसने 40 प्रतिशत शुल्क पर भी इसके आयात को आसान कर दिया है। हालांकि चालू महीने में आयातित चीनी पर व्यापारियों को शुल्क नहीं चुकाना होगा लेकिन जुलाई में आने वाले स्टॉक के लिए उन्हें 5 प्रतिशत का आई.जी.एस.टी. चुकाना पड़ सकता है।
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सूत्रों के अनुसार घरेलू बाजार के हालात को देखते हुए शुल्क मुक्त 5,00,000 टन कोटे वाली पूरी चीनी के खपने में संदेह लग रहा है। पिराई सीजन के निकट होने के बावजूद थोक बाजार में इस कोटे की घोषणा के बाद कीमतों में प्रति किलोग्राम एक रुपए की कमी नजर आई है। मिलों की आपूॢत बढऩे के कारण ऐसा हुआ है। उद्योग के एक कार्यकारी ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में 11 नंबर की बैंचमार्क  चीनी का अनुबंध मूल्य 4 महीनों से भी कुछ कम समय में 30 प्रतिशत घट गया है। फिलहाल यह प्रति पौंड 14.1 सेंट पर चल रहा है। कुछ दिन पहले यह 14 सेंट के नीचे के स्तर पर चल रहा था। अगर कीमतें मंद रहती हैं तो 40 प्रतिशत के शुल्क के बावजूद भारत में चीनी का आयात होने लगेगा।
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यह सिर्फ  चीनी उद्योग और किसानों को प्रभावित करने वाला मसला नहीं है। दरअसल एक मुश्किल एथेनॉल पर लगने वाले जी.एस.टी. को लेकर भी है। हरित ईंधन के रूप में पैट्रोल में सम्मिश्रित किए जाने वाले गौण उत्पाद एथेनॉल पर 18 प्रतिशत का जी.एस.टी. निर्धारित है। पिछले साल एथेनॉल की कीमत 48 रुपए प्रति लीटर से कम करके 39 रुपए प्रति लीटर की गई थी और अब 18 प्रतिशत के जी.एस.टी. के कारण चीनी मिलों के लिए इसे तेल विनिर्माता कम्पनियों को बेचना मुश्किल हो जाएगा।




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