सनातन को लेकर बाबा रामदेव का बड़ा बयान, बोले- राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही साजिश
punjabkesari.in Thursday, Oct 29, 2026 - 01:27 AM (IST)
हरिद्वारः योग गुरु स्वामी रामदेव ने बुधवार को आरोप लगाते हुए कहा कि सनातन धर्म के खिलाफ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहरी साजिश रची जा रही है। उन्होंने कहा कि मुगलों और अंग्रेजों द्वारा पिछले एक हजार वर्षों में सनातन को बदनाम करने के लिए हमारे शास्त्रों में जानबूझकर मिलावट की गयी, जिसके आधार पर देवी-देवताओं और ऋषि-मुनियों पर अनर्गल एवं घिनौने आरोप लगाए जा रहे हैं ताकि आने वाली पीढि़यां अपने ही धर्म से घृणा करने लगें।
विश्व विख्यात पतंजलि विश्वविद्यालय में 29 से 31 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले 52वें‘अखिल भारतीय प्राच्य विद्या सम्मेलन'के संबंध में दिव्य योग मंदिर, कृपालु बाग आश्रम में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए स्वामी रामदेव ने यह बातें कहीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सनातन धर्म में वर्ण व्यवस्था जन्म आधारित नहीं, बल्कि कर्म आधारित है। मनुस्मृति और वेदों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि सनातन में किसी भी जाति या स्त्री का अपमान नहीं है, बल्कि यजुर्वेद के अनुसार सभी मनुष्य और जीव-जगत ईश्वर का ही विग्रहवान स्वरूप हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि विदेशियों और सनातन विरोधियों ने एक साजिश के तहत अगड़े-पिछड़ों, सवर्णों-अछूतों के नाम पर भेद की दीवारें खड़ी कर भारतवासियों को आपस में लड़वाया है, जबकि सनातन के अनुसार हम सभी का एक ही कुल, ब्रह्मकुल है। स्वामी रामदेव ने कहा कि शास्त्रों में हुई इस मिलावट को दूर करने और उनके शुद्धिकरण के लिए योजनाबद्ध तरीके से एक समिति का गठन किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि सनातन धर्म को बदनाम कर, लोगों को धर्म-विहीन करके ईसाई और मुसलमान बनाने तथा नास्तिक बनाने का षड्यंत्र चल रहा है। भारत विरोधी शक्तियां भारत और भारतीयता के उभरते वर्चस्व से आतंकित हैं और देश को सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक रूप से कमजोर करना चाहती हैं।
त्रिदिवसीय सम्मेलन के संबंध में जानकारी देते हुए स्वामी रामदेव ने बताया कि इस 52वें‘अखिल भारतीय प्राच्य विद्या सम्मेलन'(ऑल इंडिया ओरिएंटल कॉन्फ्रेंस) का उद्घाटन राज्यपाल डॉ. ढोला सिंह बिसेन करेंगे। 104 वर्ष पुराने इस ऐतिहासिक और गैर-राजनीतिक आयोजन में देश के शीर्ष धर्मगुरु, पूज्यपाद शंकराचार्य (या उनके प्रतिनिधि) तथा लगभग 4 से 5 हजार संस्कृत विद्वान एवं आध्यात्मिक गुरु भाग लेंगे। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य सनातन पर हो रहे घात-प्रत्याघात से धर्म की रक्षा करना और इसके शुद्धतम स्वरूप को विश्व के सामने प्रस्तुत करना है।
