शिक्षामित्रों की मानदेय बढ़ोतरी के उपलक्ष्य में गोरखपुर में आयोजित शिक्षामित्र सम्मान समारोह में CM योगी आदित्यनाथ का संबोधन

punjabkesari.in Tuesday, May 05, 2026 - 04:18 PM (IST)

UP DESK: शिक्षामित्रों की मानदेय बढ़ोतरी के उपलक्ष्य में गोरखपुर में आयोजित शिक्षामित्र सम्मान समारोह में माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा, वर्षो से आपकी मांग थी, लेकिन अपनी मांग को,जो स्वतः स्फूर्त भाव से आगे बढ़ती, उसको आप टकराव के साथ लेना चाहते थे। संवाद से समाधान की तरफ हमे जाना चाहिए। याद करिये,पिछली सरकारों ने गलत तरीक़े से नियमो का उल्लंघन करते हुए सहायक शिक्षक के रूप में मान्यता देने का कुत्सित प्रयास किया,जो नियम विरुद्ध था, उसके लिए पहले कोई नियमावली बनानी चाहिए थी।

प्रावधान नियुक्ति के पहले होना चाहिए था, लेकिन इन सब प्रक्रियाओं को पूरा किये बगैर मनमाने तरह से उन्होंने जो कार्य किया था। सुप्रीम कोर्ट ने बदले में सभी प्रकार के शिक्षामित्रों की सेवाओं को भी समाप्त करने का आदेश दिया था।

हमारे सामने चैलेंज था, कि डेढ़ लाख परिवारों को सड़कों पर भूखे मरने की नौबत आएगी, क्योंकि इन्होंने लंबे समय तक लगभग 18-19 वर्षो से सेवा कर रहे थे, उम्र के इस पड़ाव पर ये कहां जाएंगे! हमारे मंत्रिमंडल ने तय किया कि हम इनकी सेवाएं समाप्त न करके इनका सहयोग लेंगे, और उनका साढ़े 3 हजार मानदेय बढाकर 10 हजार करेंगे। यह हमारी सरकार ने 2017 में किया था। 

हम चाहते थे कि समय समय पर इसको कुछ न कुछ बढ़ाएं,लेकिन आप लोगों के बीच मे कुछ चंदा वसूलीबाज़ आ गए थे,जिन्होंने आपका शोषण व दोहन किया। हमे इस बात को याद रखना होगा कि, आज का समय सकारात्मक सोच का है। आप शिक्षक हैं,एक शिक्षा जगत से जुड़ा व्यक्ति अगर सकारात्मक सोच का नही है, तो वह समाज की अपूर्णीय क्षति कर देगा।

हमारा नेचर ट्रेड यूनियन तरीके नही हो सकता, हमे तो सकारात्मक भाव के साथ कार्य करते हुए समाज के लिए , जिन बच्चों को एक अभिभावक बड़े विश्वास के साथ हमारे पास भेज रहा है, उन बच्चों के भविष्य को बनाने की जिम्मेदारी आपकी है। अगर सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर नही होंगे तो बच्चे की नींव ही कमजोर हो जाएगी, जो जितना सकारात्मक होगा उतना अच्छा परिणाम देगा, जो जितना नकारात्मक होगा, उतना ही विध्वंसक होगा। समाज,देश के लिए खतरनाक होगा।

एक बच्चे का स्कूल छोड़ने का मतलब एक राष्ट्रीय क्षति भी है, समाज की क्षति है। आप समाज को एक नकारात्मक सोच के साथ एक ऐसी बिना माँगे, बिना ट्रेनिंग के ऐसी फौज के साथ झोंक दे रहे हैं, ऐसे लोगों को दे दे रहे हैं जो किसी न किसी रूप में समाज के ऊपर बोझा बनने जा रहे हैं। उसका कारण कोई पूछता नहीं था,बालिकाएँ स्कूल नहीं जा पा रही इसलिए, क्योंकि वहाँ उनके लिए पेयजल नहीं है, उनके लिए टॉयलेट, सेपरेट टॉयलेट नहीं है, सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है। 

आप सोचो आज के दिन पर 1 करोड़ 60 लाख बच्चों को हम लोग दो यूनिफॉर्म, बैग, बुक्स, शूज, सॉक्स, स्वेटर, ये सब उपलब्ध करवा रहे हैं। 2017 के पहले नहीं मिल पाता था, नहीं मिलता था। हर बच्चे के मन में पढ़ने की एक तमन्ना हो, यह उसका अधिकार भी है। उसके अभिभावक की जिम्मेदारी बनती है, शिक्षक की भी जिम्मेदारी बनती है और समाज की भी जिम्मेदारी बनती है कि हम इस राष्ट्रीय कार्य में हम भी सहयोग करें। 

हमें ट्रेड यूनियन की प्रवित्ति से दूर रहना होगा,ये समाज का नुकसान करेगा, क्योंकि इसने अतीत में भारी नुकसान पहुँचाया है। वहाँ पर व्यक्ति के बोल ही क्या होते हैं कि "हमारी माँगें पूरी हों चाहे जो मजबूरी हो", यानी देश की कीमत पर हमारी माँग पूरी होनी चाहिए,ये नहीं हो सकता। 

पहले देश, तब हम हैं, मेरा देश है, तो हम भी हैं। जब ये भाव होगा तो अभाव हम सबको संरक्षित करेगा, सुरक्षित करेगा। अच्छी पीढ़ी तैयार करेंगे,तो हर एक क्षेत्र में अच्छे लोग पैदा होंगे। मुझे बहुत अच्छा लगा कि पहले चरण के स्कूल चलो अभियान में 20 लाख से अधिक बच्चों ने अपना एनरोलमेंट करवाया है, 20 लाख एक बड़ी संख्या होती है। याद करिए दुनिया के अंदर बहुत सारे देश हैं जिनकी आबादी 20 लाख नहीं, यहां नए बच्चे एडमिशन करवा रहे हैं 20 लाख। 

बहुत सारे राज्य ऐसे होंगे जहां बेसिक शिक्षा में पूरे बच्चों की संख्या 20 लाख नहीं होगी यहां हमारे यहां नए बच्चे प्रवेश के लिए नामांकन करा रहे हैं 20 लाख और अभी जब जुलाई में अभियान चलेगा इस संख्या को और बढ़ाने की आवश्यकता है।


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Editor

Sahil Kumar

Related News