न्यायाधीशों की नियुक्ति में प्रधानमंत्री-मुख्य न्यायाधीश सामाजिक न्याय सुनिश्चित करें: स्टालिन

punjabkesari.in Thursday, May 12, 2022 - 07:47 PM (IST)

चेन्नई, 12 मई (भाषा) तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमण से न्यायाधीशों की नियुक्ति में सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने का अनुरोध किया। दोनों को संबोधित अपने पत्र में स्टालिन ने आग्रह किया कि अंग्रेजी के अलावा तमिल को भी मद्रास उच्च न्यायालय और इसकी मुदरै पीठ आधिकारिक भाषा घोषित करने के लिए उचित कदम उठाए जाएं।
स्टालिन ने उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति में सामाजिक विविधता और सामाजिक न्याय को सच्चे अर्थों में सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
उन्होंने नयी दिल्ली, चेन्नई, कोलकाता और मुंबई में सर्वोच्च न्यायालय की स्थायी क्षेत्रीय पीठ स्थापित करने का भी आग्रह किया ताकि विशाल देश के अन्य हिस्सों के लोगों की सर्वोच्च न्यायालय तक समान पहुंच सुनिश्चित हो सके।
प्रधानमंत्री और भारत के मुख्य न्यायाधीश को संबोधित एक पत्र में, जिसकी एक प्रति यहां मीडिया को उपलब्ध कराई गई थी, उन्होंने उन तीन मांगों को दोहराया। ये वही मांगे हैं जिसे उन्होंने 23 अप्रैल को यहां उच्च न्यायालय के समारोह में अपने भाषण के दौरान उठाया था।
उन्होंने पत्र में कहा, ‘‘मैं इस उम्मीद में रहता हूं कि तमिलनाडु के लोगों की इन तीन मांगों पर विचार किया जाएगा और निकट भविष्य में आप लोगों द्वारा इसे लागू किया जाएगा।’’
उच्च न्यायपालिका पर स्टालिन ने दावा किया कि न्यायालयों के पदानुक्रम के अनुसार एक सर्वोच्च न्यायालय के साथ न्यायिक शाखा का एकात्मक ढांचा केवल न्यायिक अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए है, ताकि सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों का भारत के सभी न्यायालय और प्राधिकरण में पालन किया जा सके।

स्टालिन के मुताबिक महत्वपूर्ण बात यह है कि सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों की संरचना भारत की विविधता और बहुलतावादी समाज को दर्शाती है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से उच्च न्यायपालिका में समाज के सभी वर्गों के प्रतिनिधित्व में गिरावट आई है।
उन्होंने कहा कि इससे एक ‘‘विविधता घाटा’’ की स्थिति बन गई है। उन्होंने कहा, ‘‘मेरा दृढ़ विचार है कि सभी राज्यों को सर्वोच्च न्यायालय की पीठ में आनुपातिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। यह वास्तव में भारतीय समाज की विविध प्रकृति को उसके विभिन्न आयामों में प्रदर्शित करेगा।’’
स्टालिन ने कहा कि एक और मामले में राष्ट्र के संघीय चरित्र को न्यायिक शाखा में परिलक्षित होना चाहिए, जो सर्वोच्च न्यायालय की स्थायी क्षेत्रीय पीठों की स्थापना से जुड़ा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि देशभर में 25 उच्च न्यायालय हैं, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि उच्चतम न्यायालय में दायर की जा रही अपीलों की संख्या दिल्ली के आसपास के राज्यों से अधिक हैं, जबकि दिल्ली से दूर स्थित राज्यों से अपीलों की संख्या अपेक्षाकृत कम हैं।
उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा कि अंग्रेजी के अलावा अन्य राज्यों की आधिकारिक भाषा को उच्च न्यायालयों की आधिकारिक भाषा बनाने में क्या बाधा हो सकती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि तमिलनाडु पहले से ही तमिल में कानून पर मानक पुस्तकें ला चुका है।



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PTI News Agency

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