रेजांग ला दर्रे के पास 1962 में हुई लड़ाई पर आधारित है कुलप्रीत यादव की नई पुस्तक

09/26/2021 7:35:09 PM

नयी दिल्ली, 26 सितंबर (भाषा) वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध में पांच हजार चीनी सैनिकों से लोहा लेने वाले 120 भारतीय सैनिकों की कहानी पर आधारित एक किताब बाजार में उपलब्ध है। पेंगुइन रैंडम के ‘वीर’ इंप्रिंट द्वारा प्रकाशित “द बैटल ऑफ रेजांग ला” शीर्षक वाली इस पुस्तक को पूर्व नौसना अधिकारी कुलप्रीत यादव ने लिखा है।
यह किताब भारतीय सेना की उस गाथा का दस्तावेज है जिसके कारण पूरे लद्दाख क्षेत्र पर कब्जा होने से रोका जा सका था। सेना की 13 कुमाऊं बटालियन की चार्ली कंपनी ने 18 नवंबर 1962 को लद्दाख में रेजांग ला दर्रे पर चीनी सैनिकों के हमले का जवाब दिया था। इस कम्पनी में लगभग सभी सैनिक दक्षिणी हरियाणा के निवासी थे। टुकड़ी में 120 सैनिक थे जिनका नेतृत्व मेजर शैतान सिंह ने किया था।
इस लड़ाई में टुकड़ी के कुल सैनिकों में से 110 शहीद हो गए थे। यादव ने लिखा है, “यह एक अधिकारी और 120 जवानों की कहानी है जिन्होंने 18 नवंबर 1962 को बेहद ठंड में देश की रक्षा करने के लिए लड़ाई लड़ी थी। हथियार पुराने थे और गोलाबारूद की कमी थी। उनके कपड़े ठंड से बचने के लिए प्रभावी नहीं थे और खाना भी कम था।”
उन्होंने लिखा, “उनके पास एक असाधारण नेतृत्व क्षमता वाले मेजर शैतान सिंह, अनुभवी नायब सूबेदार सुरजा राम, राम चन्दर और हरि राम थे। इसके अलावा उनके पास मातृभूमि के प्रति प्रेम था। और उस सुबह यही सब पर्याप्त था।” चार्ली कंपनी के पराक्रम से न केवल चीन को आगे बढ़ने से रोका जा सका बल्कि चुशुल हवाई अड्डे को भी बचाने में कामयाबी मिली।
किताब में खबरों के हवाले से बताया गया है कि रेजांग ला पर कब्जा करने के प्रयास में कुल 1,300 चीनी सैनिक मारे गए थे। किताब के लेखक यादव को “मर्डर इन पहाड़गंज” पुस्तक के लिए 2018 में गुड़गांव साहित्य महोत्सव में पुरस्कृत भी किया जा चुका है।


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PTI News Agency

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